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उत्कल रेल हादसा: एक जोर का झटका लगा फिर बोगी में लगने लगे सिर

Sun, 20 Aug 2017 08:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Sun, 20 Aug 2017 08:40 AM IST
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utkal express train accident, passengers are admitted in district hospital in emergency

खतौली रेल हादसे में घायल हुए 19 लोगों को मेडिकल, जिला अस्पताल, आनंद और कैलाशी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनका कहना है कि इनके डिब्बे में जोर का झटका लगा और फिर सिर ट्रेन की बोगी में लगने लगे। बेहोशी सी छाने लगी। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया। हाहाकार मचा था।

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मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती 13 घायलों में जगदीश (50), बनारसी दास (60)  और नत्थीदास (60) मुरैना मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं, जो हरिद्वार जा रहे थे। इनके अलावा ब्रज किशोर (55) निवासी कुशवा कालोनी, जग्गा रोड आगरा, मंजू (35) पत्नी परविंदर निवासी मंदौर मुजफ्फरनगर, सोनिका (15) जगेरी, मुजफ्फरनगर हैं। मुश्ताक (37) निवासी पौड़ी गढ़वाल, गोलमा (65) करौली राजस्थान से हैं, अरुण (22) निवासी कंकरखेड़ा, राजाराम (45) और रोशन (26) निवासी मुबारिक पुर मुजफ्फरनगर, व एक 50 वर्षीय महिला बेहोश है। राजाराम, रोशन और महिला की हालत गंभीर है।
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प्रेमवती (60) निवासी ग्वालियर प्रगति नगर, हरिद्वार जा रही थीं। इनके अलावा ब्रजपाल सिंह (68) निवासी रुड़की कैलाशी अस्पताल में भर्ती हैं। दिव्या गर्ग (26), इनकी बेटी गुनगुन डेढ़ साल और बेटा अनिरुद्ध (4) घायल हैं, आनंद अस्पताल में भर्ती हैं। दिव्या के पति अंकित गर्ग नई सड़क शिवालिक बैंक में मैनेजर हैं। शास्त्रीनगर में रहते हैं, इनका परिवार सहारनपुर का रहने वाला है। ये सहारनपुर जा रहे थे। इनके अलावा दो घायल जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं, इनमें परमाल (50) और रामजीलाल (60) हैं। दोनों राजस्थान करौली केरहने वाले हैं।
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घायलों का हाल जानने पहुंचे जनप्रतिनिधि-अधिकारी
संभल की रहने वाली राज्यमंत्री गुलाब देवी, विधायक सोमेंद्र तोमर और विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल घायलों का हाल जानने मेडिकल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों का बेहतर इलाज करने को कहा। रात करीब सवा 11 बजे सांसद, जिलाधिकारी और एसएसपी मेडिकल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। 


घायलों को बचाने के लिए आगे सभी धर्मों के लोग 
मेडिकल अस्पताल पहुंचे घायल जगदीश, बनारसीदास और नत्थीदास के साथी  मुनीदास त्यागी, बालकदास, भगीरथदास और आत्मदास ने बताया कि वे बाल-बाल बचे हैं। चीख-पुकार मची थी। लोगों ने बहुत मदद की। हिंदू-मुस्लिम सभी थे बचाने में। अगर लोग इस तरह मदद न करते तो और भी जानें जा सकती थीं। लोगों ने काफी मदद की। कोई पानी लेकर आ रहा था तो कोई घायलों को उठाकर ले जा रहा था।

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