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उत्तर प्रदेश चुनाव: क्या प्रियंका की मेहनत रंग लाएगी? क्या कांग्रेस नवजीवन पाएगी?

Sat, 23 Oct 2021 10:34 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 23 Oct 2021 10:34 PM IST
सार

प्रियंका गांधी कांग्रेस पार्टी का वोट प्रतिशत 6 से 30 फीसदी तक बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी महासचिव प्रियंका महीने से लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं।

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UP election 2022: Many congress party leaders started believing that Priyanka Gandhi is going to increase the party vote percentage in Uttar Pradesh
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की पूरी उम्मीद अपनी महासचिव प्रियंका गांधी पर टिकी है। पार्टी के कई नेताओं को लगने लगा है कि प्रियंका उत्तर प्रदेश में पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ाने जा रही हैं और इसे छह से 30 फीसदी तक ले जाने का उनका लक्ष्य है। कभी कांग्रेस के यूपी प्रभारी रहे मधुसूदन मिस्त्री के साथ पूरे प्रदेश में कड़ी मेहनत कर चुके रोहित कहते हैं कि यह लक्ष्य मुश्किल तो जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं।

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रोहित कहते हैं कि प्रियंका जिस तरह से राजनीतिक अभियान को लगातार जमीनी स्तर तक ले जा रही हैं, वह बेहद समझदारी भरी रणनीति है। आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी के लिए प्रशांत किशोर की टीम में काम कर चुके सूत्र का कहना है कि जनता का मूड बदलने में देर नहीं लगती। वह कहते हैं कि लखीमपुर खीरी प्रकरण के बाद से कांग्रेस महासचिव की लोकप्रियता बढ़ रही हैं। इनमें महिलाओं और युवओं की तादाद ज्यादा है ।
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बनारस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा की टीम में अजय हैं। अजय बताते हैं कि जिस दिन प्रियंका की बनारस में जनसभा थी, भीड़ अपने आप जुटती चली गई थी। इससे तो लग रहा है कि 2022 के चुनाव में काफी अच्छा प्रदर्शन होगा। हालांकि समाजवादी पार्टी के संजय लाठर और भाजपा के ज्ञानेश्वर शुक्ला को कांग्रेस के भीतर अभी भी कोई राजनीतिक दम नहीं दिखाई देता।
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जौनपुर के भाजपा नेता राजेश सिंह का कहना है कि कांग्रेस का वोट कुछ बढ़ेगा, लेकिन सपा और बसपा का वोट पिछली बार से कुछ घटेगा। इस तरह से भाजपा 2022 में फिर 300 के पार सीटें लाएगी। यह बात केवल राजेश नहीं कह रहे हैं, बल्कि भाजपा के तमाम नेताओं का कहना है कि यूपी में बसपा के सामने चुनौती कठिन है। अखिलेश की समाजवादी पार्टी के सामने भी अपने जनाधार को बचाने और नई जातियों को जोड़ने की चुनौती है, क्योंकि कांग्रेस उसके मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकती है।फिर ओवैसी भी सपा का ही नुकसान करेंगे।

मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं: चल पड़ा कैंपेन
मीनाक्षी सिंह महाविद्यालय में प्रोफेसर हैं। उन्हें प्रियंका गांधी की दो तस्वीरें अच्छी लगी हैं। एक तस्वीर जिसमें वह बनारस में महिला कांस्टेबल को गले लगा रही हैं और दूसरी आगरा जाते समय महिला पुलिसकर्मियों के साथ सेल्फी लेने वाली। एक नारा भी उन्हें अच्छा लग रहा है- मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं।

मीनाक्षी कहती हैं कि इसको लेकर कोई चाहे जो कहे लेकिन एक राजनीतिक दल की नेता ने 40 प्रतिशत महिलाओं को यूपी में टिकट देने की बात कही है। अच्छी बात है और उनके कालेज की लड़कियों में भी प्रियंका का क्रेज बढ़ रहा है। पूर्वांचल के पत्रकार श्याम नारायण पांडे भी कहते हैं कि प्रियंका का यह कैंपेन गांव-गांव तक पहुंच रहा है। पांडे बताते हैं कि जिस यूपी में कांग्रेस और राहुल गांधी का नाम आने पर लोग मुंह सिकोड़ लेते थे, वहां प्रियंका गांधी के बारे लोग चर्चा कर रहे हैं। कांग्रेसियों में भी उत्साह दिखाई दे रहा है। इससे कुछ वोट तो हर विधानसभा में जरूर बढ़ेगा।

पूर्वी यूपी में चल रही चर्चा को सुनिए
श्याम नारायण पांडे कहते हैं कि बसपा का जनाधार तेजी से खिसकता दिखाई दे रहा है। बसपा के लिए 2007 के विधानसभा चुनाव प्रचार में बड़ी भूमिका निभाने वाले सुधीर गोयल कहते हैं कि कांशीराम के युग वाले बसपा नेता अब पार्टी के साथ नहीं हैं। मायावती के युग में तमाम नेता आते-जाते रहे। इसलिए जनाधार तेजी से घटा है। कुछ भीम आर्मी के संस्थापक चंद्र शेखर रावण ने भी चोट पहुंचाई हैं और तमाम जातियां भी बसपा का साथ छोड़कर चली गई है।

गोयल कहते हैं मुझे नहीं लगता कि ब्राह्मण समाज अब कभी बसपा को वोट देने की हिम्मत जुटाएगा। वहीं समाजवादी पार्टी में फूट पड़ी है। शिवपाल सिंह यादव अपने भतीजे अखिलेश यादव और सपा के लिए परेशानी का सबब बने हैं। इसी तीनों को आधार बनाकर ज्ञानेश्वर शुक्ला कहते हैं कि अल्पसंख्यकों का वोट एकमुश्त कहीं नहीं पड़ेगा। सपा, बसपा, कांग्रेस में बंटेगा। लेकिन सभी राजनीति के जानकार एक बात पर सहमत हैं कि कांग्रेस का ग्राफ बढ़ रहा है। कांग्रेसियों में चेतना लौट रही है और प्रियंका गांधी राजनीतिक लड़ाई में मजबूती ला रही हैं।

छह से 30 प्रतिशत वोट पहुंचते ही बन जाएगी सरकार!
कांग्रेस के नेता उमेश पंडित कुछ ज्यादा उत्साहित हैं। वह कहते हैं कि यूपी में कांग्रेस का वोट बैंक छह से 30 प्रतिशत पहुंच जाए तो प्रियंका गांधी को मुख्यमंत्री और कांग्रेस की प्रदेश में सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता। उमेश के अपने तर्क हैं। पहला यह कि 30-40 प्रतिशत ब्राह्मण वोट कांग्रेस के खाते में आने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। अभी यह भाजपा के साथ था। दूसरा पूरे यूपी में गोरखपुर से गाजियाबाद तक प्रदेश की जनता को कांग्रेस उसकी आवाज उठाने वाली पार्टी के रूप में दिखाई देने लगी है। उमेश पंडित तर्क देते हैं कि आप देख लीजिए। प्रियंका के लखनऊ पहुंचते ही यूपी की सरकार का सारा जायका खराब हो जाता है। अमेठी के प्रदीप पाठक भी यही दोहराते हैं। पाठक कहते हैं कि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उतना भाव नहीं देती, जितना कि प्रियंका गांधी को लेकर संवेदनशील है। प्रदीप कहते हैं कि यह सब ऐसे ही नहीं है। 

क्या सच में प्रियंका पलट देंगी बाजी?
प्रदेश की नब्ज को समझने और राजनीति को जानने वाले एक पूर्व महासचिव का कहना है कि राजनीति में असंभव क्या है? लेकिन इसके साथ-साथ राजनीति में ख्याली पुलाव भी खूब पकाए जाते हैं। फिलहाल वह इतना कहना चाहते हैं कि प्रियंका गांधी पिछले पांच साल से यूपी में काफी मेहनत कर रही हैं। इसका कुछ फल पार्टी को जरूर मिलेगा।

समाजवादी पार्टी के आजमगढ़ के एक नेता की सुनिए। नाम है सुमेर यादव। सुमेर कहते हैं कि भाजपा की सरकार समाजवादी पार्टी की रफ्तार रोकने के लिए कांग्रेस की प्रियंका को भाव दे रही है, लेकिन यह राजनीति है। कभी कभी गाड़ी उल्टी भी पड़ जाती है।


भाजपा के नेता ज्ञानेश्वर कहते हैं कि चुनाव बाद कहीं वह राहुल गांधी की हार न पचा पाएं और महासचिव पद से इस्तीफा न दे दें? ज्ञानेश्वर का कहना है कि अभी तो भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार अभियान शुरू ही नहीं किया है। इसलिए लोगों को प्रियंका गांधी दिखाई दे रही हैं। कुल मिलाकर भाजपा नेताओं की नजर में कांग्रेस के लिए लखनऊ दूर है और भाजपा दोबारा सत्ता में लौटने को लेकर आश्वस्त है।

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