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उत्तर प्रदेश से ग्राउंड रिपोर्ट: मिर्जापुर में सरकार को मिल सकता है विकास योजनाओं का फायदा, गंगा किनारे निषाद वोटरों का बोलबाला

Sat, 18 Dec 2021 07:55 PM IST
Harendra Chaudhary मिर्जापुर से अमित शर्मा की रिपोर्ट।
मिर्जापुर से अमित शर्मा की रिपोर्ट। Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 18 Dec 2021 07:55 PM IST
सार

लालगंज गांव की श्रमिक सितारा देवी बताती हैं कि उनके परिवार में कुल छह लोग हैं, लेकिन राशन कार्ड पर केवल तीन लोगों का ही नाम चढ़ा हुआ है। कई बार कहने पर भी प्रधान सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ा रहा है, जिससे उन्हें कम राशन मिल रहा है। आज भी अनेक महिलाएं जंगल से लकड़ी लाकर ही चूल्हा फूंकती हैं...

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UP Election 2022 Ground Report: Government can get the advantage of development schemes implemented in Mirzapur, Nishad voters dominate in this region
विंडम वाटरफॉल, मिर्जापुर - फोटो : Amar Ujala/ Amit Sharma

विस्तार

मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र एनडीए की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) के खाते में आता है। अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल यहां से सांसद हैं और वे इस समय केंद्रीय मंत्री भी हैं। अपनी राजनीतिक जमीन को अनुप्रिया पटेल ने खूब अच्छे से सजाया-संवारा है। प्रयागराज और वाराणसी जैसे पूर्वांचल के बेहद प्रमुख क्षेत्रों के बीच बसे इस क्षेत्र में सड़कों का विकास स्वाभाविक तौर पर हो गया है। केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। इसका लाभ स्वाभाविक तौर पर भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन को मिल सकता है। हालांकि, कुछ लोगों की शिकायत है कि परिवार ज्यादा होने के बाद भी उन्हें कम राशन मिल रहा है।

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जिले के राजगढ़ ब्लॉक के निवासी राजू निषाद बताते हैं कि वे चार भाई हैं और उन सभी को प्रधानमंत्री आवास का लाभ मिला है। उन्होंने सपने में भी कभी यह नहीं सोचा था कि कभी उनका अपना पक्का घर होगा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की आवास योजना के कारण उनका यह सपना पूरा हो गया है। अब रात की नींद में उन्हें छत टपकने का डर नहीं लगता। यह लाभ केवल उन्हें ही नहीं, आसपास के ज्यादातर परिवारों को मिला है।

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कौन हो लाभार्थी, तय कर रहे प्रधान

हालांकि, इसी क्षेत्र के निवासी अनिल कुमार बताते हैं कि प्रधान यह तय कर रहे हैं कि किसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिले और किसे नहीं। इसमें ‘भाई-भतीजावाद’ और ‘अपना आदमी’ होने की बात खूब चल रही है। जिन लोगों के लिए माना जाता है कि उन्होंने भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन को वोट दिया है, उन्हें तो आवास दिया जा रहा है, लेकिन जो लोग दूसरे दलों से जुड़े हुए समझे जाते हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ देने में कंजूसी बरती जा रही है।

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एक दुकानदार दिलीप कुमार बताते हैं कि पूरे क्षेत्र में सड़कों का विकास हुआ है, विनय कुमार बताते हैं कि अन्य सभी योजनाओं का भी खूब लाभ लोगों को मिल रहा है, लेकिन आशीष शर्मा बताते हैं कि क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या अभी भी गंभीर है। युवाओं को रोजगार न मिलने से सड़कों की यह चमक फीकी रह जाती है। बल्कि इन सड़कों पर गुजर रही बड़ी-बड़ी गाड़ियां उन्हें उनकी गरीबी का उपहास उड़ाती ही दिखाई पड़ती हैं। उनका कहना है कि सरकार को सड़कों के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर देना चाहिए।

लालगंज गांव की श्रमिक सितारा देवी बताती हैं कि उनके परिवार में कुल छह लोग हैं, लेकिन राशन कार्ड पर केवल तीन लोगों का ही नाम चढ़ा हुआ है। कई बार कहने पर भी प्रधान सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ा रहा है, जिससे उन्हें कम राशन मिल रहा है। आज भी अनेक महिलाएं जंगल से लकड़ी लाकर ही चूल्हा फूंकती हैं।

‘विंडम फॉल का विकास करे सरकार’

पूर्वांचल के प्रसिद्ध विन्ध्याचल धाम से लगभग 20 किलोमीटर दूर विंडम वाटरफॉल एक घूमने की जगह है। यहां शनिवार, रविवार और छुट्टियों वाले दिन लोग अपने परिवार के साथ आते हैं। अक्तूबर माह से अप्रैल तक झरने में पानी बना रहता है, तब तक लोगों की यहां आने में रूचि बनी रहती है। लेकिन गर्मी के महीनों में पानी कम होने पर लोगों का यहां आना-जाना लगभग बंद हो जाता है। इसी विंडम फॉल के पास एक बड़ा क्षेत्र पार्क के लिए छोड़ा गया है, लेकिन उसमें कोई विकास कार्य न होने से यह खराब जंगल में तब्दील हो गया है।



स्थानीय निवासी सुखदेव ने अमर उजाला से कहा कि यदि सरकार इस जगह को थोड़ा विकसित करे तो इसे एक बड़े पिकनिक स्पॉट में बदला जा सकता है। चिड़ियाघर के रूप में विकसित करने के लिए यहां पर्याप्त जगह है, तो बड़े पार्क के रूप में विकसित करने के लिए अनेक प्रजाति के फूलों के पौधे और पेड़ यहां उपलब्ध हैं। इससे इस क्षेत्र के विकास में चार-चांद लगाया जा सकता है। फिलहाल विन्ध्याचल धाम को प्रमुखता से विकसित कर रही सरकार की प्राथमिकता में विंडम फॉल नहीं आया है। लोगों की उम्मीद है कि कभी सरकार की नजर इस क्षेत्र पर जायेगी तो इसके साथ-साथ उनकी किस्मत भी संवर जायेगी।

अयोध्या-काशी से लेकर विन्ध्याचल तक एक ही तकलीफ

सरकार अयोध्या, काशी की तर्ज पर पूर्वांचल के बड़े आस्था के केंद्र विन्ध्याचल धाम को भी विकसित कर रही है। लेकिन यहां के लोगों का भी दर्द अयोध्या-काशी के लोगों जैसा ही है। धाम के विकास से श्रद्धालु और आसपास के अन्य लोग सरकार से बेहद खुश हैं, लेकिन जिनकी दुकानें और घर बार तोड़कर धाम का विकास किया जा रहा है, उनका दर्द है कि उनकी आजीविका हमेशा-हमेशा के लिए छीनी जा रही है।

विन्ध्याचल धाम के एक पुजारी ने बताया कि धाम में पहुंचने की गलियां चार फुट से भी कम चौड़ाई की थीं, जिन्हें अब 30 फुट की चौड़ाई तक विकसित किया जा रहा है, लेकिन इससे आसपास के घर और दुकानें तोड़नी पड़ रही हैं, जो लोगों में आक्रोश का कारण बना हुआ है। लोगों को उनकी संपत्ति के मूल्य का तीन से चार गुना तक मुआवजा तक मिला है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह शीघ्र समाप्त हो जाएगा और उनकी रोजी-रोटी हमेशा के लिए छिन जायेगी। यदि उनके लिए एक बाजार विकसित कर उन्हें दुकानें दी गईं होतीं तो इससे उनकी आजीविका चलती रह सकती थी।

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