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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   UP Election 2022: Congress said that BJP is trying to give this election the shape of a religious war to ensure the electoral victory

कांग्रेस का सवाल: उत्तर प्रदेश चुनाव को ‘धर्म युद्ध’ क्यों बना रही है भाजपा, किसके फायदे में रहेगा यह सौदा

Tue, 11 Jan 2022 04:52 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 11 Jan 2022 04:52 PM IST
सार

कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा इस तरह का माहौल खड़ा कर वोटरों को दो पाटों में बांट देना चाहती है। इससे उसकी चुनावी लड़ाई आसान हो जाएगी। वह किसी पार्टी विशेष को मुसलमानों के पक्ष में बताकर मतदाताओं को उसके खिलाफ और अपने पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित कर सकेगी। इससे उसे रोजगार और स्वास्थ्य के मुद्दों के जवाब नहीं देने पड़ेंगे...

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UP Election 2022: Congress said that BJP is trying to give this election the shape of a religious war to ensure the electoral victory
महिलाओं का हाथ हिलाकर अभिवादन करतीं प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर राजनीति तेज हो गई है कि यह चुनाव ‘80 फीसदी बनाम 20 फीसदी’ के बीच है। मुख्यमंत्री के इस बयान का आशय चाहे जो भी रहा हो, लेकिन सामान्य लोगों के बीच इसका अर्थ यही लगाया जा रहा है कि वे इस चुनाव को ‘हिदू बनाम मुस्लिम’ की तर्ज पर ले जाना चाहते हैं। भाजपा नेताओं की ओर से पहले भी इस तरह की बयानबाजी हुई है। सभी राजनीतिक दलों की ओर से मुख्यमंत्री के इस बयान की तीव्र आलोचना हुई है।

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कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा इस चुनाव को धर्म युद्ध की शक्ल देने की कोशिश कर रही है। ऐसा कर वह अपनी चुनावी जीत को निश्चित करना चाहती है। सपा का आरोप है कि भाजपा सरकार पांच साल के दौरान लोगों को रोटी-रोजगार देने में असफल साबित हुई है। अब वह विकास की बजाय केवल इसी तरह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से चुनाव जीतना चाहती है।  
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कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा इस तरह का माहौल खड़ा कर वोटरों को दो पाटों में बांट देना चाहती है। इससे उसकी चुनावी लड़ाई आसान हो जाएगी। वह किसी पार्टी विशेष को मुसलमानों के पक्ष में बताकर मतदाताओं को उसके खिलाफ और अपने पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित कर सकेगी। इससे उसे रोजगार और स्वास्थ्य के मुद्दों के जवाब नहीं देने पड़ेंगे। भाजपा जानबूझकर इस तरह का माहौल बनाना चाहती है कि जिससे पूरी लड़ाई ‘भाजपा बनाम सपा’ के बीच दिखाई पड़े क्योंकि कांग्रेस जैसे दल की तुलना में सपा से लड़ना उसके लिए ज्यादा आसान है।  

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भाजपा के लिए ज्यादा आसान है सपा से लड़ाई - कांग्रेस

प्रमोद कृष्णम ने कहा कि प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश का प्रभार संभालने के साथ ही कड़ी मेहनत की। पूरे कोरोना काल में वे जमीनी संघर्ष करती रहीं और योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमले करती रहीं। इससे एक बार कांग्रेस यूपी में मुख्य विपक्ष की भूमिका में आती दिखाई पड़ी। लेकिन भाजपा जानबूझकर मामला भाजपा बनाम सपा दिखाना चाहती है, क्योंकि उसके लिए सपा से लड़ना आसान है। वह समाजवादी पार्टी पर अखिलेश सरकार में गुंडागर्दी होने, महिलाओं से छेड़छाड़ और भ्रष्टाचार होने के आरोप लगा सकती है, लेकिन वह चाहकर भी कांग्रेस पर यही आरोप नहीं मढ़ सकती। यही कारण है कि जानबूझकर भाजपा नेता ही पूरे चुनाव में अपने सामने सपा को केंद्रित रखना चाहते हैं।  

कौन करेगा भाजपा का मुकाबला

सहारनपुर के कद्दावर नेता इमरान मसूद ने सोमवार को कांग्रेस का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। मसूद ने कहा कि भाजपा को रोकने के लिए केवल समाजवादी पार्टी ही सक्षम है, इसीलिए वे अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम रहे हैं। लेकिन कांग्रेस नेता का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का विकल्प बनने में केवल कांग्रेस ही सक्षम है। उसने भाजपा को अकेले दम पर राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से सत्ता से हटाकर दिखाया है। महाराष्ट्र और झारखंड में भाजपा को सत्ता से हटाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बार भी  कांग्रेस अपने दम पर उत्तराखंड में भाजपा से सत्ता छीन सकती है तो पंजाब में उसकी सरकार बने रहने के आसार हैं।

प्रियंका की लगभग दो साल की मेहनत ने ही यूपी में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करनी शुरू कर दी हैं। यदि भाजपा इसे धर्म युद्ध की शक्ल न दे, और पूरी लड़ाई भाजपा बनाम सपा के मोड में न लाए तो इस चुनाव में ही उसके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। भाजपा जानती है कि कमजोर होने के बाद भी केवल कांग्रेस ही राष्ट्रीय स्तर पर उसे हटाने में सक्षम है, यही कारण है कि प्रधानमंत्री से लेकर आम भाजपा कार्यकर्ता तक हमेशा उसके निशाने पर कांग्रेस नेता ही रहते हैं।

वहीं, सपा नेता आईपी सिंह ने कहा कि अखिलेश सरकार अपने कामकाज के लिए जानी जाती थी। उसने हर क्षेत्र में विकास के काम किए थे। रिकॉर्ड समय में एक्सप्रेस-वे बनाने और उस पर लड़ाकू जहाज उतारने का आइडिया अखिलेश ने जमीन पर उतारकर दिखाया था। अब भाजपा अखिलेश यादव सरकार के एक्सप्रेस-वे पर नाम बदलकर इस पर प्लेन उतारने की नकल की है। उनका दावा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार जनता के सामने इस तरह विकास का कोई दावा नहीं कर सकती, लिहाजा वह चुनावी जीत के लिए धार्मिक विभाजन का सहारा ले रही है।

धर्म और विकास साथ-साथ

वहीं, भाजपा नेता शैलेंद्र शर्मा का कहना है कि भाजपा कभी संप्रदाय के आधार पर विभाजन की राजनीति नहीं करती। यह राजनीति कांग्रेस और सपा के कार्यकाल में हुआ करती थी, जहां एक धर्म विशेष के लोगों को विशेष लाभ दिया जाता था, जबकि हिंदू बहुल जनता का अपमान किया जाता था। भाजपा के जन्म के समय से ही अयोध्या-काशी-मथुरा के विषय पार्टी की वैचारिक सोच का आधार रहे हैं। भाजपा ने अपना यह वैचारिक आधार कभी नहीं छिपाया और खुलकर इन मुद्दों पर जनता के बीच जागृति पैदा की। ऐसे में उस पर आज यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि उसने केवल चुनावी जीत के लिए इन मुद्दों को उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अपने सामने रिकॉर्ड स्तर पर हाई-वे, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट, आयुध निर्माण फैक्ट्रियों को बनते देख रही है। सरकार का लक्ष्य धार्मिक स्थलों के विकास के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार का निर्माण करना है। इसे गलत दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।

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