UP Election 2022: आज सुल्तानपुर में 'सत्ता का संग्राम', चुनावी मुद्दों पर होगी चर्चा, सवालों के घेरे में होंगे नेता
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज और अवध के बाद अब 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' पूर्वांचल में दाखिल हो चुका है। प्रतापगढ़ के बाद शनिवार (18 दिसंबर) को ये चुनावी रथ सुल्तानपुर पहुंचेगा। यहां आम लोगों के साथ 'चाय पर चर्चा' होगी। इसके बाद महिलाओं और युवाओं से बात होगी और फिर नेताओं से जनता के सवाल पूछे जाएंगे।
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विस्तार
गोमती नदी के तट पर बसा सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख जिला है। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सुल्तानपुर का अहम स्थान रहा है। अंग्रेजी शासन से पहले यहां उदार नवाबों का राज था। पौराणिक मान्यता है कि पहले इस शहर का नाम कुशभवनपुर था, जो भगवान श्रीराम के बड़े बेटे कुश के नाम पर रखा गया था। अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में इसका नाम बदलकर सुल्तानपुर कर दिया गया। इसके बाद अवध के नवाब सफदरजंग ने इसे अवध की राजधानी बनाने का प्रयास किया था। मगर उन्हें सफलता नहीं मिली। कहा जा रहा है कि अगर प्रदेश में दोबारा भाजपा की सरकार बनेगी तो भगवान कुश के द्वारा बसाई गई इस नगरी को फिर से पुरानी पहचान मिलेगी। इस जनपद का नाम फिर से कुशभवनपुर हो जाएगा।
सुल्तानपुर में 5 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 4 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और एक पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। पहले जिले में 8 विधानसभा सीटें थीं। अमेठी के जिला बनने के बाद यहां की अमेठी, गौरीगंज और जगदीशपुर सीटें अमेठी जिले में चली गईं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर यहां का सियासी माहौल गर्म होने लगा है। सवाल उठने लगे हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में यहां कितना विकास हुआ? क्या आम लोग सरकार के कामकाज से खुश हैं? युवा महिलाएं और आम जनता मौजूदा सरकार के बारे में क्या सोचती है? राजनीतिक दलों के नेताओं का क्या मानना है? वह किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे? इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार को सुल्तानपुर में होगा।
आप भी 'अमर उजाला' के इस मंच से जुड़ सकते हैं। इसके जरिए आप अपने क्षेत्र, शहर, राज्य और देश के हर मुद्दों को उठा पाएंगे। आप बता पाएंगे कि आने वाले चुनाव में नेताओं और राजनीतिक दलों से आपको क्या उम्मीदें हैं? किन मसलों को लेकर आप मतदान करेंगे और नेताओं से आप क्या चाहते हैं?
कब और कहां होंगे कार्यक्रम
1. सुबह 9 बजे
चाय पर चर्चा
स्थान : नगर पालिका गेट
2. दोपहर 12 बजे
आधी आबादी से चर्चा
स्थान : पंडित रामनरेश त्रिपाठी सभागार परिसर
3. दोपहर दो बजे
युवाओं से चर्चा
स्थान : केएनआई परिसर
4. शाम 4 बजे
राजनीतिक दलों से चर्चा
स्थान : सीताकुंड घाट
अब तक 33 जिलों में हो चुका है कार्यक्रम
अब तक पश्चिमी यूपी, ब्रज, अवध और पूर्वांचल के 33 जिलों में 'सत्ता का संग्राम' आयोजित हो चुका है। 11 नवंबर को गाजियाबाद से चला रथ मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, मैनपुरी, एटा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़ होते हुए एक दिसंबर को बुलंदशहर पहुंचा था। इसके बाद हमारा चुनावी रथ अवध और फिर पूर्वांचल में दाखिल हुआ। यह रथ लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, प्रयागराज, प्रतापगढ़ से होते हुए सुल्तानपुर पहुंचेगा।
‘सत्ता का संग्राम’ में क्या होगा खास?
चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ के तहत अमर उजाला हर वर्ग के मतदाताओं तक पहुंचेगा। चाय पर चर्चा के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं से संवाद होगा। राजनीतिक हस्तियों से सीधे सवाल पूछे जाएंगे। अमर उजाला आपको एक मंच दे रहा है, जहां आप बातों को रख सकेंगे, ताकि जब राजनीतिक हस्तियां चुनावी रैलियां करने आएं तो उन्हें आपसे जुड़े जमीनी मुद्दे भी याद रहें।
विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था
‘सत्ता का संग्राम’ से जुड़े कार्यक्रमों में जमीनी स्तर पर हिस्सा लेने वाले दर्शकों और श्रोताओं के लिए विशेष प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है।
इस विशेष कवरेज को आप कहां देख सकेंगे
- अमर उजाला अखबार और amarujala.com पर आपको कार्यक्रम स्थल की जानकारी मिलेगी।
- ‘सत्ता का संग्राम’ से जुड़ी व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में पढ़ सकेंगे।
- amarujala.com पर आप कार्यक्रमों को लाइव देख सकेंगे।
- सभी कार्यक्रम अमर उजाला डिजिटल के फेसबुक पेज और यू-ट्यूब चैनल पर देखे जा सकेंगे।
- इन सभी कार्यक्रमों के जरिए दर्ज होने वाली जनता की आवाज विशेष रूप से अमर उजाला के पॉडकास्ट ‘आवाज’ पर भी उपलब्ध रहेगी।