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Unnao News: भारतीय कानून में महिलाओं को मिले हैं 11 अधिकार

Wed, 01 Nov 2023 12:51 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Nov 2023 12:51 AM IST
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Women have got 11 rights in Indian law
उन्नाव। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में दिल्ली पब्लिक स्कूल अकरमपुर में महिलाओं के संरक्षण और कल्याण, पीसीपीएनडीटी एक्ट व लैंगिक समानता के विषय में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
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जनपद न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय कानून में महिलाओं को 11 अलग-अलग अधिकार मिले हैं। इनमें मुख्य है दफ्तर में यौन उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार।
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इसके अलावा किसी घटना की स्थिति में जीरो एफआईआर दर्ज करने और बराबर वेतन पाने का अधिकार भी है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 भारत की संसद द्वारा पारित है।
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जिसे कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और भारत में गिरते लिंगानुपात को रोकने, प्रसव पूर्व लिंग चयन को प्रतिबंधित करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
अपर जिला जज प्रथम अल्पना सक्सेना ने कहा कि भारतीय संविधान की धारा 498 के तहत पत्नी, महिला लिव-इन पार्टनर या किसी घर में रहने वाली महिला को घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार मिला है। जुबानी, आर्थिक, जज्बाती या यौन हिंसा पर आरोपी को तीन साल गैर-जमानती कारावास की सजा हो सकती है या जुर्माना हो सकता है।
बताया कि किसी महिला आरोपी को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। कानून यह भी कहता है कि किसी से अगर उसके घर में पूछताछ कर रहे हैं तो महिला कांस्टेबल या परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में की जाए।
अपर जिला जज अनिल कुमार सेठ ने राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, महिला सुरक्षा, पॉक्सो एक्ट, दहेज निषेध अधिनियम 1961, मैटरनिटी लाभ अधिनियम 1861, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ उत्पीड़न आदि की जानकारी दी।

अपर जिला जज मनीष निगम ने विधिक सेवा प्राधिकरण के उद्देश्यों के बारे में बताया। कहा कि अनवरत वाद प्रक्रिया निरर्थक है। समझौते से वाद का निस्तारण सार्थक होता है। मध्यस्थता सौहार्द की भाषा है। नौ दिसंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी दी।
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