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उद्घाटन से पहले ही परियर पुल पर दौड़ने लगे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:49 AM IST
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परियर पुल से निकलते दोपहिया वाहन सवार।
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर के बिठूर को सीधे परियर से जोड़ने वाले पुल का उद्घाटन हुए बिना ही इस पर वाहन दौड़ने लगे हैं। छूट केवल दो पहिया व साइकिल सवारों को ही दी गई है । चौपहिया वाहन सवार भी इस पुल से फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार के पुल के शुभारंभ के बाद ही वाहनों का आवागमन शुरू करने की मंशा पर पानी फिर गया है।
वर्ष 2007 में 35 करोड़ रुपये की लागत से परियर से बिठूर के बीच लगभग दो किलोमीटर लंबे पुल का शिलान्यास सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने किया था। उस समय इसकी लंबाई 940.36 मीटर आंकी गई थी। शुरुआती समय में तेजी के साथ काम शुरू हुआ था। वर्ष 2012 में पुल बनकर तैयार होना था। वर्ष 2010 में गंगा नदी में बाढ़ आ गई। इससे उस समय काम ठप हो गया था। बाद में बाढ़ थमने पर दोबारा काम शुरू हुआ। जांच पड़ताल के बाद पुल की लंबाई 1.75 किलोमीटर और बढ़ा दी गई। मौजूदा समय में पुल पूरी तरह से तैयार हो गया है।
इस पुल पर आवागमन शुरू करने के लिए पांच जून का समय निर्धारित किया गया था। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। पीडब्ल्यूडी विभाग ने नए पुल के उद्घाटन को देखते हुए पांच जून से पहले ही पीपे का पुल हटा दिया था। नए पुल का उद्घाटन टला तो क्षेत्रवासियों के सामने आवागमन को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गईं। कानपुर जाने के लिए क्षेत्र के लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा था। वहीं चौपहिया वाहनों को लगभग 45 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था। क्षेत्रवासियों की दिक्कतों को देखते हुए सेतु निगम के अधिकारियों ने पुल से दो पहिया वाहनों के आवागमन की छूट दी थी। इससे बाइक सवार लोगों को काफी राहत मिली। दोपहिया वाहन सवारों ने इस पुल से निकलना शुरू किया तो चौपहिया वाहन सवार भी यहां से निकलने लगे।
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सेतु निगम ने दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए पुल के दोनों छोर पर एक-एक चौकीदार तैनात किया था। यह चौपहिया वाहन सवाराें को रोेक नहीं पा रहे हैं। चौपहिया वाहन सवार चौकीदारों को डांट-डपटकर अपने वाहन निकाल रहे हैं। जेई दिवाकर गौतम ने बताया कि आवागमन से रोकने पर चौपहिया वाहन सवार मारपीट पर उतर आते हैं।
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वर्ष 2007 में 35 करोड़ रुपये की लागत से परियर से बिठूर के बीच लगभग दो किलोमीटर लंबे पुल का शिलान्यास सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने किया था। उस समय इसकी लंबाई 940.36 मीटर आंकी गई थी। शुरुआती समय में तेजी के साथ काम शुरू हुआ था। वर्ष 2012 में पुल बनकर तैयार होना था। वर्ष 2010 में गंगा नदी में बाढ़ आ गई। इससे उस समय काम ठप हो गया था। बाद में बाढ़ थमने पर दोबारा काम शुरू हुआ। जांच पड़ताल के बाद पुल की लंबाई 1.75 किलोमीटर और बढ़ा दी गई। मौजूदा समय में पुल पूरी तरह से तैयार हो गया है।
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इस पुल पर आवागमन शुरू करने के लिए पांच जून का समय निर्धारित किया गया था। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। पीडब्ल्यूडी विभाग ने नए पुल के उद्घाटन को देखते हुए पांच जून से पहले ही पीपे का पुल हटा दिया था। नए पुल का उद्घाटन टला तो क्षेत्रवासियों के सामने आवागमन को लेकर मुश्किलें खड़ी हो गईं। कानपुर जाने के लिए क्षेत्र के लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा था। वहीं चौपहिया वाहनों को लगभग 45 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था। क्षेत्रवासियों की दिक्कतों को देखते हुए सेतु निगम के अधिकारियों ने पुल से दो पहिया वाहनों के आवागमन की छूट दी थी। इससे बाइक सवार लोगों को काफी राहत मिली। दोपहिया वाहन सवारों ने इस पुल से निकलना शुरू किया तो चौपहिया वाहन सवार भी यहां से निकलने लगे।
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सेतु निगम ने दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए पुल के दोनों छोर पर एक-एक चौकीदार तैनात किया था। यह चौपहिया वाहन सवाराें को रोेक नहीं पा रहे हैं। चौपहिया वाहन सवार चौकीदारों को डांट-डपटकर अपने वाहन निकाल रहे हैं। जेई दिवाकर गौतम ने बताया कि आवागमन से रोकने पर चौपहिया वाहन सवार मारपीट पर उतर आते हैं।