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फ्रांस में फंसी उन्नाव की बेटी, परिवार परेशान
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फ्रांस में भसी गौरांगी से वीडियो काल पर फोन से बात करती उनकी मां वंदना बाजपेई।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी में काम करने वाली युवती कई दिनों से फ्रांस में फंसी है। एक डिग्री कालेज की सह प्रबंधक की यह बेटी हवाई जहाज की उड़ानें बंद होने से अपने वतन नहीं आ पा रही है। होटल संचालक ने रविवार से होटल बंद होने की बात कहकर कहीं और ठिकाना तलाशने की बात कह दी है। खाने-पीने से लेकर रुकने तक की व्यवस्था नहीं है। परिजनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय से गुहार लगाई है।
सिविल निवासी वंदना बाजपेयी केशव प्रसाद स्मारक महाविद्यालय, मिर्जापुर (उन्नाव) की सह प्रबंधक हैं। उनकी इंजीनियर बेटी गौरांगी बाजपेयी छह साल से मोबाइल बनाने वाली एक कंपनी में चेन्नई में काम कर रही है। कंपनी की तरफ से 20 जनवरी को फ्रांस के शहर ग्वाडेलोप गई थी। उसका वीजा 20 अप्रैल 2020 तक है। फ्रांस में कोरोना की वजह से हवाई यात्रा, बाजार, माल और दफ्तर सब बंद हैं। कई दिनों से होटल में बंद गौरांगी अपने घर न लौट पाने से परेशान है। उधर, परिवार के लोगों की भी नींद उड़ गई है। मां वंदना बाजपेयी ने बेटी से वीडियो कॉल कर बात की। गौरांगी ने बताया कि उसने कंपनी के लोगों से बात की तो कहा गया कि जबतक हवाई जहाज की उड़ान शुरू नहीं होती तबतक वहीं रुकने की सलाह दी गई है। इस बीच, होटल संचालक ने फ्रांस में रविवार को पूरी तरह बंदी के चलते होटल बंद करने की बात कह कहीं और ठिकाना तलाशने की बात कह दी है।
चार दिनों से होटल में ब्रेड और दूध पीकर रह रही गौरांगी घर वापसी की व्यवस्था न होने से परेशान है। मां वंदना बाजपेयी व पिता संजीव बाजपेयी ने बताया कि उन्होंने पीएमओ और गृह मंत्रालय के साथ ही फ्रांस में भारतीय दूतावास को ईमेल किया है लेकिन दो दिन बाद भी कोई जवाब नहीं आया। बताया कि बुधवार रात तक कोई जवाब नहीं मिला तो वह गुरुवार डीएम से भी मिलेंगे।
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डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि अधिकांश देशों में हवाई सेवा बंद है। जबतक सेवा शुरू नहीं होती तब तक वहीं रुकें तो बेहतर रहेगा क्योंकि सफर में परेशानी हो सकती है। बताया कि परिवार के लोग अगर लिखित सूचना देते हैं तो हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
गौरांगी ने फोन पर बताया कि फ्रांस के शहर ग्वाडेलोप में कोराना के प्रकोप के कारण मास्क और सैनिटाइजर भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे वह काफी परेशान है।
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सिविल निवासी वंदना बाजपेयी केशव प्रसाद स्मारक महाविद्यालय, मिर्जापुर (उन्नाव) की सह प्रबंधक हैं। उनकी इंजीनियर बेटी गौरांगी बाजपेयी छह साल से मोबाइल बनाने वाली एक कंपनी में चेन्नई में काम कर रही है। कंपनी की तरफ से 20 जनवरी को फ्रांस के शहर ग्वाडेलोप गई थी। उसका वीजा 20 अप्रैल 2020 तक है। फ्रांस में कोरोना की वजह से हवाई यात्रा, बाजार, माल और दफ्तर सब बंद हैं। कई दिनों से होटल में बंद गौरांगी अपने घर न लौट पाने से परेशान है। उधर, परिवार के लोगों की भी नींद उड़ गई है। मां वंदना बाजपेयी ने बेटी से वीडियो कॉल कर बात की। गौरांगी ने बताया कि उसने कंपनी के लोगों से बात की तो कहा गया कि जबतक हवाई जहाज की उड़ान शुरू नहीं होती तबतक वहीं रुकने की सलाह दी गई है। इस बीच, होटल संचालक ने फ्रांस में रविवार को पूरी तरह बंदी के चलते होटल बंद करने की बात कह कहीं और ठिकाना तलाशने की बात कह दी है।
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चार दिनों से होटल में ब्रेड और दूध पीकर रह रही गौरांगी घर वापसी की व्यवस्था न होने से परेशान है। मां वंदना बाजपेयी व पिता संजीव बाजपेयी ने बताया कि उन्होंने पीएमओ और गृह मंत्रालय के साथ ही फ्रांस में भारतीय दूतावास को ईमेल किया है लेकिन दो दिन बाद भी कोई जवाब नहीं आया। बताया कि बुधवार रात तक कोई जवाब नहीं मिला तो वह गुरुवार डीएम से भी मिलेंगे।
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डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि अधिकांश देशों में हवाई सेवा बंद है। जबतक सेवा शुरू नहीं होती तब तक वहीं रुकें तो बेहतर रहेगा क्योंकि सफर में परेशानी हो सकती है। बताया कि परिवार के लोग अगर लिखित सूचना देते हैं तो हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
गौरांगी ने फोन पर बताया कि फ्रांस के शहर ग्वाडेलोप में कोराना के प्रकोप के कारण मास्क और सैनिटाइजर भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे वह काफी परेशान है।