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Unnao News: रचनाओं से कवियों ने पं. प्रताप नारायण मिश्र को दी श्रद्धांजलि
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काव्य पाठ करतीं कवयित्री रूपा पांडेय। स्रोत: आयोजक
अचलगंज। पं. प्रताप नारायण मिश्र की जयंती पर उनके पैतृक गांव बेथर में बृहस्पतिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कवि उमाशंकर यादव ने ‘जय हिंद जय हिंद मातु भारती की जय, अपने तिरंगे में तीनों लोक आ गए।’ गाकर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। लखनऊ की कवयित्री रूपा पांडेय ने नारी शक्ति का वंदन करते हुए पढ़ा, ‘पृष्ठ इतिहास के जो ध्यान से पढ़ेंगे, नारियों की शक्ति के रहस्य जान पाएंगे, माता पार्वती लोपामुद्रा गार्गी अपाला, मंत्रों में रची बसी तपस्या जान पाएंगे।’
कवि रामेश्वर द्विवेदी ने वर्तमान राजनीति पर व्यंग करते हुए पढ़ा, ‘फ्री का है राशन फ्री पेंशन किसान निधि, हमको निकम्मा कर वोट सुख लेती है। पक्ष और विपक्ष लड़ते हैं श्वानवत सूखी पड़ी नदी में जम कर ये नाव खेती है।’ बाराबंकी की कवयित्री हेमा कीर्ति पांडेय ने पढ़ा, ‘मोहब्बत की ये डोरी है इसे कमजोर मत करना, मुझे चुपके से मिल लेना कभी भी शोर मत करना।’ इसके अलावा काकोरी से आए कवि अशोक अग्निपथी, बाराबंकी के राम किशोर तिवारी, रामेश्वर द्विवेदी प्रलयंकर, राम किशोर तिवारी आदि ने काव्यपाठ किया। आयोजक हरि सहायमिश्र मदन ने आए हुए कवियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।
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कवि उमाशंकर यादव ने ‘जय हिंद जय हिंद मातु भारती की जय, अपने तिरंगे में तीनों लोक आ गए।’ गाकर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। लखनऊ की कवयित्री रूपा पांडेय ने नारी शक्ति का वंदन करते हुए पढ़ा, ‘पृष्ठ इतिहास के जो ध्यान से पढ़ेंगे, नारियों की शक्ति के रहस्य जान पाएंगे, माता पार्वती लोपामुद्रा गार्गी अपाला, मंत्रों में रची बसी तपस्या जान पाएंगे।’
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कवि रामेश्वर द्विवेदी ने वर्तमान राजनीति पर व्यंग करते हुए पढ़ा, ‘फ्री का है राशन फ्री पेंशन किसान निधि, हमको निकम्मा कर वोट सुख लेती है। पक्ष और विपक्ष लड़ते हैं श्वानवत सूखी पड़ी नदी में जम कर ये नाव खेती है।’ बाराबंकी की कवयित्री हेमा कीर्ति पांडेय ने पढ़ा, ‘मोहब्बत की ये डोरी है इसे कमजोर मत करना, मुझे चुपके से मिल लेना कभी भी शोर मत करना।’ इसके अलावा काकोरी से आए कवि अशोक अग्निपथी, बाराबंकी के राम किशोर तिवारी, रामेश्वर द्विवेदी प्रलयंकर, राम किशोर तिवारी आदि ने काव्यपाठ किया। आयोजक हरि सहायमिश्र मदन ने आए हुए कवियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।
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