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Unnao News: बांग्लादेशी घुसपैठिये को एटीएस ने पकड़ा
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सोनिक (उन्नाव)। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने उन्नाव के दही स्थित एक मांस निर्यातक फैक्टरी से बांग्लादेशी घुसपैठिए को गिरफ्तार किया है। वह फर्जी आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेज बनाकर शिवनगर मोहल्ले में रह रहा था। उसके मोबाइल फोन में बांग्लादेश सरकार द्वारा जारी उसके माता-पिता के सरकारी पहचान पत्र मिले हैं।
एटीएस लखनऊ के फील्ड यूनिट प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को उन्नाव के स्लॉटर हाउसों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के अवैध रूप से काम करने की सूचना मिली थी। बुधवार रात टीम ने शिवनगर मोहल्ले के मोड़ पर सैफुल पुत्र फरीदुल आलम को पकड़ा। तलाशी में उसके पास मोबाइल फोन और जियो सिम मिला। मोबाइल की जांच में भारतीय आधार कार्ड मिला, जिसमें गलत पता और जन्मतिथि 5 अप्रैल 1997 दर्ज थी। गैलरी में बांग्लादेशी भाषा के प्रपत्र मिले, जो गूगल लेंस से जांचने पर उसके माता-पिता के पहचान पत्र निकले। सैफुल के पिता का नाम फरीदुल आलम और मां का नाम फातिमा बेगम है। उनके पहचान पत्र 24 जून 2008 को बांग्लादेश सरकार ने जारी किए थे। पुख्ता सबूत मिलने पर एटीएस टीम उसे दही थाने ले गई।
भारत में प्रवेश और फर्जी दस्तावेज
पूछताछ में सैफुल ने बांग्लादेश का मूल निवासी होने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि करीब छह साल पहले वह बांग्लादेश के बेनापोल से भारत में दाखिल हुआ था। यह प्रवेश पश्चिम बंगाल के 24 परगना और खुलना बॉर्डर के रास्ते हुआ। एक दलाल के माध्यम से उसने फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इसके बाद वह अलग-अलग फैक्ट्रियों में काम करता रहा।
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दही थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि एटीएस के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह की तहरीर पर कार्रवाई हुई। आरोपी बांग्लादेशी घुसपैठिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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एटीएस लखनऊ के फील्ड यूनिट प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को उन्नाव के स्लॉटर हाउसों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के अवैध रूप से काम करने की सूचना मिली थी। बुधवार रात टीम ने शिवनगर मोहल्ले के मोड़ पर सैफुल पुत्र फरीदुल आलम को पकड़ा। तलाशी में उसके पास मोबाइल फोन और जियो सिम मिला। मोबाइल की जांच में भारतीय आधार कार्ड मिला, जिसमें गलत पता और जन्मतिथि 5 अप्रैल 1997 दर्ज थी। गैलरी में बांग्लादेशी भाषा के प्रपत्र मिले, जो गूगल लेंस से जांचने पर उसके माता-पिता के पहचान पत्र निकले। सैफुल के पिता का नाम फरीदुल आलम और मां का नाम फातिमा बेगम है। उनके पहचान पत्र 24 जून 2008 को बांग्लादेश सरकार ने जारी किए थे। पुख्ता सबूत मिलने पर एटीएस टीम उसे दही थाने ले गई।
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भारत में प्रवेश और फर्जी दस्तावेज
पूछताछ में सैफुल ने बांग्लादेश का मूल निवासी होने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि करीब छह साल पहले वह बांग्लादेश के बेनापोल से भारत में दाखिल हुआ था। यह प्रवेश पश्चिम बंगाल के 24 परगना और खुलना बॉर्डर के रास्ते हुआ। एक दलाल के माध्यम से उसने फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इसके बाद वह अलग-अलग फैक्ट्रियों में काम करता रहा।
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दही थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि एटीएस के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह की तहरीर पर कार्रवाई हुई। आरोपी बांग्लादेशी घुसपैठिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।