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Unnao News: नो बैग डे पर छात्रों ने सीखा प्राकृतिक खेती का पाठ
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फोटो- 12-छात्रों को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देते शिक्षक। स्रोत: शिक्षक
सफीपुर। नो बैग डे पर कंपोजिट स्कूल रनियामऊ के छात्रों को पास ही के खेत में ले जाकर प्राकृतिक खेती करने के तरीके बताए। शिक्षक ने उन्हें मिट्टी, गोबर और देसी कृषि सामग्री से बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक के खेती करने की प्रक्रिया समझाई।
शिक्षक अमित तिवारी ने छात्रों को प्राकृतिक खेती के प्रमुख स्तंभों और उनके लाभों के बारे में बताया। बच्चों को देसी गाय के गोबर, गुड़, बेसन और खेत की मिट्टी को मिलाकर प्राकृतिक घोल तैयार कर उसे खेत में डालने की विधि समझाई। उन्हें बताया कि ऐसे जैविक घोल मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाने और उर्वरता सुधारने में सहायक होते हैं।
छात्रों ने गोबर, बेसन, चूना और मिट्टी से तैयार मिश्रण की जानकारी ली। बताया गया कि इसका उपयोग बीज उपचार के लिए किया जाता है। स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल की पहली सीढ़ी है। छात्रों को भारत में सुभाष पालेकर द्वारा विकसित शून्य बजट प्राकृतिक खेती की अवधारणा और जापान के मसानोबू फुकुओका के प्राकृतिक कृषि दृष्टिकोण की भी जानकारी दी। देवेंद्र त्रिपाठी, संतोषी देवी, कृपाशंकर, पूनम देवी, सुदेवी और राधा देवी सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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शिक्षक अमित तिवारी ने छात्रों को प्राकृतिक खेती के प्रमुख स्तंभों और उनके लाभों के बारे में बताया। बच्चों को देसी गाय के गोबर, गुड़, बेसन और खेत की मिट्टी को मिलाकर प्राकृतिक घोल तैयार कर उसे खेत में डालने की विधि समझाई। उन्हें बताया कि ऐसे जैविक घोल मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाने और उर्वरता सुधारने में सहायक होते हैं।
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छात्रों ने गोबर, बेसन, चूना और मिट्टी से तैयार मिश्रण की जानकारी ली। बताया गया कि इसका उपयोग बीज उपचार के लिए किया जाता है। स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ फसल की पहली सीढ़ी है। छात्रों को भारत में सुभाष पालेकर द्वारा विकसित शून्य बजट प्राकृतिक खेती की अवधारणा और जापान के मसानोबू फुकुओका के प्राकृतिक कृषि दृष्टिकोण की भी जानकारी दी। देवेंद्र त्रिपाठी, संतोषी देवी, कृपाशंकर, पूनम देवी, सुदेवी और राधा देवी सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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