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Unnao News: मिशनरी के जाल को तोड़ने में पुलिस लाचार
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अचलगंज। हुलासखेड़ा में कथित मिशनरी के फैल रहे जाल को तोड़ने में पुलिस लाचार नजर आ रही है। पुलिस अभी शिकायतीपत्र का इंतजार कर रही है। इसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ सकता है।
थानाक्षेत्र के हुलासखेड़ा में चल रहे धर्म परिवर्तन के खेल की स्थानीय लोगों को वर्षों से जानकारी तो है लेकिन कोई उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। अधिकांश लोग तो यह भी नहीं जानते कि यहां हो रही प्रार्थना सभा उनके कल्याण के लिए नहीं बल्कि सनातन को तोड़ने के लिए रची जा रही साजिश है। वहीं क्षेत्र में बंथर, रजवाखेड़ा, बदरका, छेरिहा, गडारी, जगजीवनपुर, मालमऊ, रिठनई, सातन, बाबूखेड़ा, घोरवाखेड़ा, पड़री, नेवरना समेत हर चौथे, पांचवे गांव में मिशनरियों के सेंटर संचालित हैं पर पुलिस शिकायतीपत्र न मिलने से हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
इंसेट-1
पंकज को हल्ला लुइया के नाम से जाता है गांव का हर व्यक्तिहुलासखेड़ा के पंकज की संपत्ति में तेजी से वृद्धि हुई है। हुलासखेड़ा गांव के का हर व्यक्ति पंकज को हल्ला लुइया नाम से जानता है। उसके अचलगंज कस्बे में थाने के पीछे बने जिस मकान में प्रार्थना स्थल संचालित होने बात कही जाती है। वह भी तीन मंजिला आलीशान मकान है। चारों ओर सीसीटीवी लगे हुए हैं। इसी तरह बाबूखेड़ा में भी जिस जगह प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही है, वहां भी करोड़ों की लागत का लगभग दस हजार वर्ग फीट का बहुत बड़ा कांप्लेक्स बन रहा है। कस्बे के लोग बताते हैं कि इनमें क्रिसमस-डे पर भव्य आयोजन हुआ था। घर के अंदर प्रार्थनास्थल भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि क्रिसमस-डे पर पुलिस अगर थोड़ी भी सतर्कता बरतती तो क्षेत्र के कई प्रार्थनास्थल प्रकाश में आ सकते थे लेकिन न थाना पुलिस और ना ही एलआईयू को इसकी जानकारी हो सकी। वैसे जितनी भी मिशनरी संचालित हैं, उनके संचालकों की आय में हुई अचानक वृद्धि चौंकाने वाली है।
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इंसेट-2
पंकज के परिजनों ने बना रखी है उससे दूरी
हुलासखेड़ा निवासी दयाशंकर उर्फ दुल्ली के पंकज, महेंद्र व आकाश तीन बेटे हैं। एक बेटी भी है, जिसकी शादी हो चुकी है। आकाश अभी अविवाहित है। ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार के लोग पंकज के इस कृत्य से कोई वास्ता नहीं रखते। परिवार गांव के अंदर पुराने मकान में रहता है। पंकज, घर के लोगों से भी हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करने को मना करता है। इसीलिए परिजन उसे किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं करते हैं। हिंदू रीतिरिवाजों का विरोध करने के चलते पिछले वर्ष हुई बहन की शादी में वह शामिल नहीं हुआ था। शुरु में गांव के लोग उसके कार्यक्रम में गए लेकिन वहां हो रही ईश निंदा के चलते उससे दूरी बना ली।
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थानाक्षेत्र के हुलासखेड़ा में चल रहे धर्म परिवर्तन के खेल की स्थानीय लोगों को वर्षों से जानकारी तो है लेकिन कोई उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। अधिकांश लोग तो यह भी नहीं जानते कि यहां हो रही प्रार्थना सभा उनके कल्याण के लिए नहीं बल्कि सनातन को तोड़ने के लिए रची जा रही साजिश है। वहीं क्षेत्र में बंथर, रजवाखेड़ा, बदरका, छेरिहा, गडारी, जगजीवनपुर, मालमऊ, रिठनई, सातन, बाबूखेड़ा, घोरवाखेड़ा, पड़री, नेवरना समेत हर चौथे, पांचवे गांव में मिशनरियों के सेंटर संचालित हैं पर पुलिस शिकायतीपत्र न मिलने से हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
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पंकज को हल्ला लुइया के नाम से जाता है गांव का हर व्यक्तिहुलासखेड़ा के पंकज की संपत्ति में तेजी से वृद्धि हुई है। हुलासखेड़ा गांव के का हर व्यक्ति पंकज को हल्ला लुइया नाम से जानता है। उसके अचलगंज कस्बे में थाने के पीछे बने जिस मकान में प्रार्थना स्थल संचालित होने बात कही जाती है। वह भी तीन मंजिला आलीशान मकान है। चारों ओर सीसीटीवी लगे हुए हैं। इसी तरह बाबूखेड़ा में भी जिस जगह प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही है, वहां भी करोड़ों की लागत का लगभग दस हजार वर्ग फीट का बहुत बड़ा कांप्लेक्स बन रहा है। कस्बे के लोग बताते हैं कि इनमें क्रिसमस-डे पर भव्य आयोजन हुआ था। घर के अंदर प्रार्थनास्थल भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि क्रिसमस-डे पर पुलिस अगर थोड़ी भी सतर्कता बरतती तो क्षेत्र के कई प्रार्थनास्थल प्रकाश में आ सकते थे लेकिन न थाना पुलिस और ना ही एलआईयू को इसकी जानकारी हो सकी। वैसे जितनी भी मिशनरी संचालित हैं, उनके संचालकों की आय में हुई अचानक वृद्धि चौंकाने वाली है।
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पंकज के परिजनों ने बना रखी है उससे दूरी
हुलासखेड़ा निवासी दयाशंकर उर्फ दुल्ली के पंकज, महेंद्र व आकाश तीन बेटे हैं। एक बेटी भी है, जिसकी शादी हो चुकी है। आकाश अभी अविवाहित है। ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार के लोग पंकज के इस कृत्य से कोई वास्ता नहीं रखते। परिवार गांव के अंदर पुराने मकान में रहता है। पंकज, घर के लोगों से भी हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करने को मना करता है। इसीलिए परिजन उसे किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं करते हैं। हिंदू रीतिरिवाजों का विरोध करने के चलते पिछले वर्ष हुई बहन की शादी में वह शामिल नहीं हुआ था। शुरु में गांव के लोग उसके कार्यक्रम में गए लेकिन वहां हो रही ईश निंदा के चलते उससे दूरी बना ली।