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Unnao News: दोस्तीनगर बाईपास घटिया, शासन से भी होगी जांच
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उन्नाव। हरदोई रोड को लखनऊ-कानपुर हाईवे से जोड़ने वाले दोस्तीनगर बाईपास निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई। डीएम की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने डीएम को इसकी रिपोर्ट दी है। डीएम ने विस्तृत जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति पत्र भेजा।
सात अक्तूबर से दोस्तीनगर बाईपास का पुलिस ने ट्राॅयल के रूप में अनौपचारिक शुभारंभ करते हुए हरदोई की ओर से आने वाले वाहनों को अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र से दही चौकी के लिए डायवर्ट किया था। एक ही तरफ से (हरदोई रोड से दही चौकी तिराहा की ओर) भारी वाहनों को निकालने के बाद भी सात दिन में ही रोड जवाब दे गई।
15 अक्तूबर को दिशा की बैठक में एमएलसी अरुण पाठक ने गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। सांसद साक्षी महाराज ने डीएम से जांच कराने को कहा था। डीएम गौरांग राठी ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच कराई। समिति में शामिल परियोजना निदेशक डीआरडीए, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन व अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने शुक्रवार शाम को मौके पर जांच की थी। टीम ने 24 घंटे में रिपोर्ट डीएम को सौंपी। डीएम ने बताया कि जांचरिपोर्ट में बताया गया है कि बाईपास मार्ग मानक के अनुरूप नहीं बनाया गया है। मार्ग प्रारंभ से चार किमी तक मानकों का पालन नहीं किया गया। जो सामग्री का प्रयोग किया गया, वह सही नहीं है। इसकी विस्तृत जांच कराने की जरूरत है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा है और शासनस्तर की टीम से जांच कराने की संस्तुति की गई है।
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इंसेट-1
नहीं मिली पर्याप्त गिट्टी, डामर और क्रंक्रीट
जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि बनाई गई सड़क की रैंडम आधार पर एक जगह पर खुदाई की गई थी। इसकी जांच की गई तो पता चला कि निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया गया। तीन स्तर पर गिट्टी बिछी नहीं मिली है। डामर भी मानक के अनुसार कम मिला है। इसके अलावा क्रंक्रीट भी नहीं मिली। खराब सामग्री से ही मार्ग मात्र सात दिन में ध्वस्त हो गया है। अभी एक जगह पर ही यह स्थिति समझ में आई है। इसलिए 9.5 किमी लंबे इस पूरे मार्ग की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है। इसी कारण शासन को संस्तुति पत्र भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार अभियंताओं पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
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सात अक्तूबर से दोस्तीनगर बाईपास का पुलिस ने ट्राॅयल के रूप में अनौपचारिक शुभारंभ करते हुए हरदोई की ओर से आने वाले वाहनों को अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र से दही चौकी के लिए डायवर्ट किया था। एक ही तरफ से (हरदोई रोड से दही चौकी तिराहा की ओर) भारी वाहनों को निकालने के बाद भी सात दिन में ही रोड जवाब दे गई।
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15 अक्तूबर को दिशा की बैठक में एमएलसी अरुण पाठक ने गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। सांसद साक्षी महाराज ने डीएम से जांच कराने को कहा था। डीएम गौरांग राठी ने तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच कराई। समिति में शामिल परियोजना निदेशक डीआरडीए, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक्सईएन व अतिरिक्त मजिस्ट्रेट ने शुक्रवार शाम को मौके पर जांच की थी। टीम ने 24 घंटे में रिपोर्ट डीएम को सौंपी। डीएम ने बताया कि जांचरिपोर्ट में बताया गया है कि बाईपास मार्ग मानक के अनुरूप नहीं बनाया गया है। मार्ग प्रारंभ से चार किमी तक मानकों का पालन नहीं किया गया। जो सामग्री का प्रयोग किया गया, वह सही नहीं है। इसकी विस्तृत जांच कराने की जरूरत है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा है और शासनस्तर की टीम से जांच कराने की संस्तुति की गई है।
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नहीं मिली पर्याप्त गिट्टी, डामर और क्रंक्रीट
जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि बनाई गई सड़क की रैंडम आधार पर एक जगह पर खुदाई की गई थी। इसकी जांच की गई तो पता चला कि निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया गया। तीन स्तर पर गिट्टी बिछी नहीं मिली है। डामर भी मानक के अनुसार कम मिला है। इसके अलावा क्रंक्रीट भी नहीं मिली। खराब सामग्री से ही मार्ग मात्र सात दिन में ध्वस्त हो गया है। अभी एक जगह पर ही यह स्थिति समझ में आई है। इसलिए 9.5 किमी लंबे इस पूरे मार्ग की विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है। इसी कारण शासन को संस्तुति पत्र भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार अभियंताओं पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।