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Unnao News: अब कल्याणी नदी उफनाई, बाढ़ की चपेट में 10 गांव
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फोटो-16-कल्याणी नदी के बढ़े जलस्तर से बाजीपुरवा गांव के बाहर पहुंचा पानी। स्रोत: ग्रामीण
गंजमुरादाबाद। गंगा की बाढ़ के दंश से कटरी इलाका उबर भी नहीं पाया कि कल्याणी नदी में उफान आ गया है। इससे 10 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों के आसपास खेतों में बोई गई करीब 50 बीघे फसल जलमग्न हो गई हैं।
करीब एक महीने से गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव होता रहा। इससे कटरी इलाके की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। अभी भी गांवों के रास्तों पर कीचड़ है। गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद कल्याणी नदी में पानी बढ़ गया है। बताया जाता है कि कल्याणी नदी हरदोई से निकली है जो गंजमुरादाबाद के लोनारी से जिले में प्रवेश करती है।
हरदोई के परसोला के पास गंगा का बढ़ा जलस्तर कल्याणी नदी में पहुंच गया है। इससे कल्याणी नदी में पानी बढ़ गया है। इसके चलते विकास खंड गंजमुरादाबाद के ग्राम लोनारी, कुशराजपुर, बाजीपुरवा, देवरिया, भिलोई, छोट्टापुरवा, बिरैचामऊ सहित कुल दस गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। लोनारी के कंपोजिट विद्यालय में भी दो फीट तक पानी भर गया है। इसके अलावा इस क्षेत्र में बोई गई धान और मक्का की फसलें भी जलमग्न हो गई हैं। तीन चार गांवों में घरों तक पानी घुस जाने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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बढ़ते जलस्तर को देख लोगों में वर्ष 2010 में कल्याणी नदी में आई बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। बीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारियों से कल्याणी नदी के तलहटी के गांवों की स्थिति और होने वाली परेशानियों की जानकारी ली जा रही है। यदि स्थिति विकराल हुई तो उससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फोटो-18-सीतारामखेड़ा व पसनियाखेड़ा जाने वाली सड़क में भरा पानी और नाव से आवागमन करते ग्रामीण। संवाद
पानी घटा पर घरों के सामने भरा कीचड़ से मुसीबत
बीघापुर। गंगा व पांडु नदी के बीच बसी दूलीखेड़ा, लालाखेड़ा के मजरों में पानी कम होने से लोग धीरे-धीरे अपने घरों की ओर जाने लगे हैं। हालांकि घरों के सामने भरा कीचड़ मुसीबत बना है। ग्राम प्रधान श्रीकृष्ण यादव ने तहसील प्रशासन से जलभराव वाले स्थान पर दवा का छिड़काव कराने की मांग की है। सीतारामखेड़ा व पसनियाखेड़ा जाने के सड़क मार्ग से पानी उतर गया है लेकिन कटानस्थल पर अभी लगभग चार फीट पानी बह रहा है। लोग नाव से ही आवागमन करने को मजबूर हैं। दोनों गांव के चारों ओर कीचड़ व गंदगी ही गंदगी फैली है। अभी तक किसी प्रकार का कोई छिड़काव नहीं कराया गया है।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि लल्लन सिंह ने बताया कि दोनों गांव में कीचड़ होने से समस्याओं का अंबार है। तहसील प्रशासन की मदद के बिना लोगों को राहत दे पाना मुश्किलों भरा है। राम सिंह, रज्जू, रामबख्श, क्षेत्र पंचायत सदस्य किशोरी व पसनियाखेड़ा निवासी हरिद्वार, जीतेंद्र, तपेश्वर आदि ने बताया कि जलस्तर घट जाने के बाद भी जयराजमऊ, रायपुर, धानीखेड़ा, निहालीखेड़ा, टेढ़ा व ऊंचगांव पहुंचने के लिए अभी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कटानस्थल पर पाइप डालकर डालकर मार्ग को चालू कराया जाए। गढ़ेवा गांव के किनारे से पानी हट गया है लेकिन गोशाला सहित गांव के किनारे इलाकों में कीचड़ है।
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फोटो-19-पंकज
गंदगी और मच्छरों से लोग परेशान
बीघापुर। सीतारामखेड़ा निवासी पंकज ने बताया कि तहसील प्रशासन की लापरवाही के चलते टापू बने गांव में कोई पुरसाहाल नहीं है। जगह-जगह फैली गंदगी व मच्छरों के आतंक से लोग परेशान हैं।
फोटो-20-श्रीपाल
बाढ़ से बच्चों की पढ़ाई बाधित
पसनियाखेड़ा निवासी श्रीपाल ने बताया कि इस बार लंबे समय तक बाढ़ का प्रभाव होने से महीना बीत गया, बच्चों की पढ़ाई बाधित है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते दो साल पूर्व सड़क कटान में बही पुलिया में पाइप डालकर आवागमन ठीक नहीं किया जा सका है। इसलिए संकट बरकरार है। प्रशासन के दावे केवल कागजी हैं।
फोटो-21-सफीपुर के गांव उडंकपुरवा में खेत में भरे पानी में डूबी फसल को देखता किसान। संवाद
फसलें नष्ट, किसानों को परिवार पालने की चिंता
सफीपुर। गंगा व कल्याणी का जलस्तर बढ़ने से सकहन राजपूतान, गहोली, हमजापुर, नीबीगढ़ा, एतबारपुर, सनहा, इब्राहीमाबाद, ददलहा, करीमाबाद, उडंकपुरवा, शेरपुर, रामपुर, मुरादपुर आदि गांवों में करीब एक हजार बीघे में बोई गई फसलें जलमग्न हैं। इन गांवों के अधिकांश लोग धान व सब्जियों की खेती पर निर्भर हैं।
एतबारपुर निवासी सुनील ने बताया कि फसल डूबने के बाद उससे होने वाली आमदनी तो दूर प्रति बीघा लगभग लगाई गई तीन हजार की लागत भी चली गई। उडंकपुरवा के इकबाल शंकर ने बताया कि फसल ही आगे परिवार के भरणपोषण का सहारा थी। अब फसल नष्ट होने से बच्चों की पढ़ाई व चूल्हा जलने की चिंता सताने लगी है। एसडीएम शिवेंद्र वर्मा ने बताया कि अभी खेतों में पानी भरा है। सूखने के बाद क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
मार्गों पर अभी भी भरा पानी, आवागमन में परेशानी
अचलगंज। लगभग एक माह तक बाढ़ से प्रभावित गांवों में स्थितियां अब सामान्य होने लगी हैं। संपर्क मार्गों में बंदीपुर व बलाई में अभी भी कहीं कहीं पानी भरा हुआ है। इससे आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं। खेतों में अधिक दिन तक पानी रुक जाने से हरी सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। जानवरों के लिए हरे चारे की दिक्कत हो गई है।
सप्ताह भर से बिजली संकट झेल रही 25 हजार की आबादी
चकलवंशी । बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का बिजली उपकेंद्र एक सप्ताह से बंद है। लगभग 25 हजार उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐरा भदियार बिजली उपकेंद्र में पानी भर गया था। उच्चाधिकारियों ने आठ सितंबर से उपकेंद्र बंद कर दिया था। इससे बेहटा, थाना, पावा, सिकंदरपुर, चकलवंशी, परियर फीडरों से जुड़ी 25 हजार की आबादी को एक सप्ताह से बिजली नहीं मिल पा रही है। लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। मोबाइल चार्जिंग की बड़ी समस्या है। वहीं उमस भरी गर्मी भी परेशान कर रही है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद मंगलवार को अवर अभियंता आशीष गप्ता ने उपकेंद्र में पंपसेट लगवा कर परिसर से पानी निकालने की कवायद शुरू की। बताया कि जल्द आपूर्ति शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
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करीब एक महीने से गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव होता रहा। इससे कटरी इलाके की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। अभी भी गांवों के रास्तों पर कीचड़ है। गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद कल्याणी नदी में पानी बढ़ गया है। बताया जाता है कि कल्याणी नदी हरदोई से निकली है जो गंजमुरादाबाद के लोनारी से जिले में प्रवेश करती है।
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हरदोई के परसोला के पास गंगा का बढ़ा जलस्तर कल्याणी नदी में पहुंच गया है। इससे कल्याणी नदी में पानी बढ़ गया है। इसके चलते विकास खंड गंजमुरादाबाद के ग्राम लोनारी, कुशराजपुर, बाजीपुरवा, देवरिया, भिलोई, छोट्टापुरवा, बिरैचामऊ सहित कुल दस गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। लोनारी के कंपोजिट विद्यालय में भी दो फीट तक पानी भर गया है। इसके अलावा इस क्षेत्र में बोई गई धान और मक्का की फसलें भी जलमग्न हो गई हैं। तीन चार गांवों में घरों तक पानी घुस जाने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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बढ़ते जलस्तर को देख लोगों में वर्ष 2010 में कल्याणी नदी में आई बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। बीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारियों से कल्याणी नदी के तलहटी के गांवों की स्थिति और होने वाली परेशानियों की जानकारी ली जा रही है। यदि स्थिति विकराल हुई तो उससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फोटो-18-सीतारामखेड़ा व पसनियाखेड़ा जाने वाली सड़क में भरा पानी और नाव से आवागमन करते ग्रामीण। संवाद
पानी घटा पर घरों के सामने भरा कीचड़ से मुसीबत
बीघापुर। गंगा व पांडु नदी के बीच बसी दूलीखेड़ा, लालाखेड़ा के मजरों में पानी कम होने से लोग धीरे-धीरे अपने घरों की ओर जाने लगे हैं। हालांकि घरों के सामने भरा कीचड़ मुसीबत बना है। ग्राम प्रधान श्रीकृष्ण यादव ने तहसील प्रशासन से जलभराव वाले स्थान पर दवा का छिड़काव कराने की मांग की है। सीतारामखेड़ा व पसनियाखेड़ा जाने के सड़क मार्ग से पानी उतर गया है लेकिन कटानस्थल पर अभी लगभग चार फीट पानी बह रहा है। लोग नाव से ही आवागमन करने को मजबूर हैं। दोनों गांव के चारों ओर कीचड़ व गंदगी ही गंदगी फैली है। अभी तक किसी प्रकार का कोई छिड़काव नहीं कराया गया है।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि लल्लन सिंह ने बताया कि दोनों गांव में कीचड़ होने से समस्याओं का अंबार है। तहसील प्रशासन की मदद के बिना लोगों को राहत दे पाना मुश्किलों भरा है। राम सिंह, रज्जू, रामबख्श, क्षेत्र पंचायत सदस्य किशोरी व पसनियाखेड़ा निवासी हरिद्वार, जीतेंद्र, तपेश्वर आदि ने बताया कि जलस्तर घट जाने के बाद भी जयराजमऊ, रायपुर, धानीखेड़ा, निहालीखेड़ा, टेढ़ा व ऊंचगांव पहुंचने के लिए अभी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कटानस्थल पर पाइप डालकर डालकर मार्ग को चालू कराया जाए। गढ़ेवा गांव के किनारे से पानी हट गया है लेकिन गोशाला सहित गांव के किनारे इलाकों में कीचड़ है।
फोटो-19-पंकज
गंदगी और मच्छरों से लोग परेशान
बीघापुर। सीतारामखेड़ा निवासी पंकज ने बताया कि तहसील प्रशासन की लापरवाही के चलते टापू बने गांव में कोई पुरसाहाल नहीं है। जगह-जगह फैली गंदगी व मच्छरों के आतंक से लोग परेशान हैं।
फोटो-20-श्रीपाल
बाढ़ से बच्चों की पढ़ाई बाधित
पसनियाखेड़ा निवासी श्रीपाल ने बताया कि इस बार लंबे समय तक बाढ़ का प्रभाव होने से महीना बीत गया, बच्चों की पढ़ाई बाधित है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते दो साल पूर्व सड़क कटान में बही पुलिया में पाइप डालकर आवागमन ठीक नहीं किया जा सका है। इसलिए संकट बरकरार है। प्रशासन के दावे केवल कागजी हैं।
फोटो-21-सफीपुर के गांव उडंकपुरवा में खेत में भरे पानी में डूबी फसल को देखता किसान। संवाद
फसलें नष्ट, किसानों को परिवार पालने की चिंता
सफीपुर। गंगा व कल्याणी का जलस्तर बढ़ने से सकहन राजपूतान, गहोली, हमजापुर, नीबीगढ़ा, एतबारपुर, सनहा, इब्राहीमाबाद, ददलहा, करीमाबाद, उडंकपुरवा, शेरपुर, रामपुर, मुरादपुर आदि गांवों में करीब एक हजार बीघे में बोई गई फसलें जलमग्न हैं। इन गांवों के अधिकांश लोग धान व सब्जियों की खेती पर निर्भर हैं।
एतबारपुर निवासी सुनील ने बताया कि फसल डूबने के बाद उससे होने वाली आमदनी तो दूर प्रति बीघा लगभग लगाई गई तीन हजार की लागत भी चली गई। उडंकपुरवा के इकबाल शंकर ने बताया कि फसल ही आगे परिवार के भरणपोषण का सहारा थी। अब फसल नष्ट होने से बच्चों की पढ़ाई व चूल्हा जलने की चिंता सताने लगी है। एसडीएम शिवेंद्र वर्मा ने बताया कि अभी खेतों में पानी भरा है। सूखने के बाद क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
मार्गों पर अभी भी भरा पानी, आवागमन में परेशानी
अचलगंज। लगभग एक माह तक बाढ़ से प्रभावित गांवों में स्थितियां अब सामान्य होने लगी हैं। संपर्क मार्गों में बंदीपुर व बलाई में अभी भी कहीं कहीं पानी भरा हुआ है। इससे आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं। खेतों में अधिक दिन तक पानी रुक जाने से हरी सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। जानवरों के लिए हरे चारे की दिक्कत हो गई है।
सप्ताह भर से बिजली संकट झेल रही 25 हजार की आबादी
चकलवंशी । बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का बिजली उपकेंद्र एक सप्ताह से बंद है। लगभग 25 हजार उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐरा भदियार बिजली उपकेंद्र में पानी भर गया था। उच्चाधिकारियों ने आठ सितंबर से उपकेंद्र बंद कर दिया था। इससे बेहटा, थाना, पावा, सिकंदरपुर, चकलवंशी, परियर फीडरों से जुड़ी 25 हजार की आबादी को एक सप्ताह से बिजली नहीं मिल पा रही है। लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। मोबाइल चार्जिंग की बड़ी समस्या है। वहीं उमस भरी गर्मी भी परेशान कर रही है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद मंगलवार को अवर अभियंता आशीष गप्ता ने उपकेंद्र में पंपसेट लगवा कर परिसर से पानी निकालने की कवायद शुरू की। बताया कि जल्द आपूर्ति शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

फोटो-16-कल्याणी नदी के बढ़े जलस्तर से बाजीपुरवा गांव के बाहर पहुंचा पानी। स्रोत: ग्रामीण

फोटो-16-कल्याणी नदी के बढ़े जलस्तर से बाजीपुरवा गांव के बाहर पहुंचा पानी। स्रोत: ग्रामीण