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Unnao News: स्वाइन फ्लू के मरीज मिले फिर भी नहीं मिली किट
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उन्नाव। स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर संक्रामक रोग की समय पर पुष्टि और इलाज मरीज की जान बचाने में अहम है लेकिन जिले के अस्पतालों में आरटीपीसीआर जांच किट उपलब्ध न होने से संदिग्ध मरीजों की सटीक जांच नहीं हो पा रही है। ऐसे में डाॅक्टर लक्षणों के आधार पर अंदाज लगाकर इलाज करने के लिए मजबूर हैं। इससे संक्रमण की पुष्टि और निगरानी दोनों प्रभावित हो रही है।
स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने अथवा खांसने-छींकने के दौरान निकलने वाली एयर ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैल सकती है। डाॅक्टरों के अनुसार, इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। ठंड लगने के साथ तेज बुखार, सूखी खांसी, सिरदर्द, अत्यधिक थकान, शरीर दर्द और कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं। समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। एडवांस स्टेज में सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, लगातार तेज बुखार और कमजोरी बढ़ने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है। इस कारण डाॅक्टर बीमारी की शुरुआती स्टेज में उपचार पर जोर देते हैं।
संभावित मरीजों की शुरुआती जांच के लिए आरटीपीसीआर किट का इस्तेमाल किया जाता है। जांच में मरीज पॉजिटिव मिलने पर उसका स्वैब सैंपल बीमारी की पुष्टि के लिए बीएसएल प्रमाणित लैब भेजा जाता है। हालांकि आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद चिकित्सक पुष्टिकरण रिपोर्ट का इंतजार किए बिना एहतियातन इलाज शुरू कर देते हैं। इसके बावजूद संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग ने अब तक अस्पतालों को किट उपलब्ध नहीं कराई है। इससे संदिग्ध मरीजों में लक्षणों और क्लिनिकल स्थिति के आधार पर उपचार दिया जा रहा है।
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अब तक पांच मरीजों में बीमारी की पुष्टि
जिले के पांच मरीजों में अब तक स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। पहले बाहरी जनपद में हुई जांच में दो मरीज पॉजिटिव पाए गए थे। उनका वहीं उपचार किया जा रहा है। उधर, सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में गंजमुरादाबाद व बांगरमऊ में दो बुजुर्ग महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनका इलाज लखनऊ के निजी अस्पताल में किया जा रहा है। मंगलवार को सिविल लाइंस में एक युवक पॉजिटिव मिला है।
आइसोलेट ओपीडी में पहुंचे 11 मरीज
बुखार रोगियों के लिए संचालित ओपीडी में ब़ुधवार को 11 मरीज पहुंचे। इनमें दो मरीजों में हाईग्रेड फीवर रहा जिन्हें डॉक्टर ने जांच के बाद उपचार दिया। जानकारों के मुताबिक अस्पताल में संचालित आइसोलेट ओपीडी की जानकारी मरीजों को नहीं है, इससे अधिकांश मरीज फिजिशियन कक्ष में पहुंच रहे हैं। यहां लगने वाली भीड़ संक्रमण का खतरा बढ़ा रही है।
डॉक्टर व कर्मियों के अवकाश रद्द
स्वाइन फ्लू व संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण सभी सरकारी डॉक्टर व कर्मियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है। उपमुख्यमंत्री ने सीएमओ को इस बाबत निर्देश जारी किए हैं, जिसमें संक्रामक बीमारियों का प्रकोप थमने तक बगैर शासन की अनुमति के किसी भी डॉक्टर या कर्मियों का अवकाश निरस्त माना जाएगा।
वर्जन...
डाॅक्टरों को संभावित मरीजों का ब्योरा एकत्र करने को कहा गया है। सभी अस्पतालों को जल्द किट उपलब्ध कराई जाएगी। इससे संभावित लक्षण वाले मरीजों की जांच हो सकेगी।-डॉ. जयराम सिंह, एसीएमओ।
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स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने अथवा खांसने-छींकने के दौरान निकलने वाली एयर ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैल सकती है। डाॅक्टरों के अनुसार, इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। ठंड लगने के साथ तेज बुखार, सूखी खांसी, सिरदर्द, अत्यधिक थकान, शरीर दर्द और कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं। समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। एडवांस स्टेज में सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, लगातार तेज बुखार और कमजोरी बढ़ने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है। इस कारण डाॅक्टर बीमारी की शुरुआती स्टेज में उपचार पर जोर देते हैं।
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संभावित मरीजों की शुरुआती जांच के लिए आरटीपीसीआर किट का इस्तेमाल किया जाता है। जांच में मरीज पॉजिटिव मिलने पर उसका स्वैब सैंपल बीमारी की पुष्टि के लिए बीएसएल प्रमाणित लैब भेजा जाता है। हालांकि आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद चिकित्सक पुष्टिकरण रिपोर्ट का इंतजार किए बिना एहतियातन इलाज शुरू कर देते हैं। इसके बावजूद संक्रामक रोग नियंत्रण विभाग ने अब तक अस्पतालों को किट उपलब्ध नहीं कराई है। इससे संदिग्ध मरीजों में लक्षणों और क्लिनिकल स्थिति के आधार पर उपचार दिया जा रहा है।
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अब तक पांच मरीजों में बीमारी की पुष्टि
जिले के पांच मरीजों में अब तक स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। पहले बाहरी जनपद में हुई जांच में दो मरीज पॉजिटिव पाए गए थे। उनका वहीं उपचार किया जा रहा है। उधर, सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में गंजमुरादाबाद व बांगरमऊ में दो बुजुर्ग महिलाओं में संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनका इलाज लखनऊ के निजी अस्पताल में किया जा रहा है। मंगलवार को सिविल लाइंस में एक युवक पॉजिटिव मिला है।
आइसोलेट ओपीडी में पहुंचे 11 मरीज
बुखार रोगियों के लिए संचालित ओपीडी में ब़ुधवार को 11 मरीज पहुंचे। इनमें दो मरीजों में हाईग्रेड फीवर रहा जिन्हें डॉक्टर ने जांच के बाद उपचार दिया। जानकारों के मुताबिक अस्पताल में संचालित आइसोलेट ओपीडी की जानकारी मरीजों को नहीं है, इससे अधिकांश मरीज फिजिशियन कक्ष में पहुंच रहे हैं। यहां लगने वाली भीड़ संक्रमण का खतरा बढ़ा रही है।
डॉक्टर व कर्मियों के अवकाश रद्द
स्वाइन फ्लू व संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण सभी सरकारी डॉक्टर व कर्मियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है। उपमुख्यमंत्री ने सीएमओ को इस बाबत निर्देश जारी किए हैं, जिसमें संक्रामक बीमारियों का प्रकोप थमने तक बगैर शासन की अनुमति के किसी भी डॉक्टर या कर्मियों का अवकाश निरस्त माना जाएगा।
वर्जन...
डाॅक्टरों को संभावित मरीजों का ब्योरा एकत्र करने को कहा गया है। सभी अस्पतालों को जल्द किट उपलब्ध कराई जाएगी। इससे संभावित लक्षण वाले मरीजों की जांच हो सकेगी।-डॉ. जयराम सिंह, एसीएमओ।