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Unnao News: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से निर्यात की लागत और समय में इजाफा
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फोटो-6-बंथर औद्योगिक क्षेत्र स्थित काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट का कार्यालय। संवाद
उन्नाव। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण जनपद से चमड़ा उत्पादों और मांस के निर्यात की लागत और समय में वृद्धि हुई है। खाड़ी देशों में युद्ध के कई मोर्चे खुलने से हवाई और समुद्री मार्ग बाधित हो गए हैं। उद्यमियों के मुताबिक इससे करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का तैयार माल फंसा हुआ है। निर्यातकों को अब अपने माल को लंबे रास्तों से भेजना पड़ रहा है। इससे माल को गंतव्य तक पहुंचने में अब अधिक समय और किराया लग रहा है।
जनपद से बड़ी मात्रा में चमड़ा उत्पाद, मांस, जरी परिधान, धागा, केमिकल समेत अन्य वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। अमेरिकी टैरिफ और फिर अमेरिका-ईरान के बीच तनातनी से पहले ही निर्यात प्रभावित था। अब इसके युद्ध में बदल जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। चर्म निर्यात परिषद के पूर्व चेयरमैन असद के इराकी ने बताया कि लाल सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण, पानी के जहाजों को अब यूरोपीय देशों और अमेरिका की ओर जाने के लिए वैकल्पिक और लंबे मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बदलाव के कारण माल की डिलीवरी में लगने वाले समय में काफी वृद्धि हो गई है। अब तक पहले, लाल सागर से गुजरने वाले पानी के जहाज स्वेज नहर मार्ग का उपयोग करके यूरोप और अमेरिका तक पहुंच रहे थे। यह समुद्री मार्ग अपेक्षाकृत छोटा है लेकिन वर्तमान हालात में इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। जहाजों को अब अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।
आईआईए के रीजनल चेयरमैन जीएन मिश्रा ने बताया कि स्वेज नहर मार्ग से जिस सफर को पूरा करने में 15 से 20 दिन लगते थे अब 25 से 30 दिन लगेंगे। इससे माल की डिलीवरी में देरी होगी और माल की बीमा प्रीमियम में वृद्धि और भाड़ा भी अधिक लगेगा। बताया कि मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता से समय और बढ़ी हुई लागत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बड़ी चुनौती बन रही हैं। जब तक क्षेत्र में शांति बहाल नहीं होती, पानी के जहाजों को इस लंबे और महंगे मार्ग का ही सहारा लेना पड़ रहा है। बंदरगाहों, रास्ते में करोड़ों रुपये का माल अटका हुआ है।
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फोटो-7-ताज आलम
आयात-निर्यात के लिए कठिन समय
जिन कारोबारियों का चमड़े का माल यूरोप के फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, इंग्लैंड, स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे देशों में जाता है, उन पर खास प्रभाव पड़ा है। बुल्गारिया, पोलैंड और हंगरी जैसे समुद्र से दूर देशों में माल नीदरलैंड या इटली पहुंचने के बाद ट्रकों से भेजा जाता है। शिपिंग कंपनियां दूरी और समय अधिक लगने के कारण किराये में वृद्धि कर रही हैं। करीब 1000 करोड़ रुपये का माल रास्ते में फंसा है। आयात-निर्यात व्यापार के लिए बहुत कठिन समय है।-ताज आलम, अध्यक्ष चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर
फोटो-8- नीरज त्रिवेदी
500 करोड़ का मांस निर्यात भी प्रभावित
खाड़ी देशों में युद्ध और अस्थिरता के कारण मांस का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। जनपद से प्रतिदिन 20 से 25 कंटेनर मुंबई भेजे जाते हैं। अब लगभग 40 प्रतिशत निर्यात घट गया है। ईरान के साथ आगे जिन देशों को मांस भेजा जाता है वहां माल नहीं जा पा रहा है। सैकड़ों कंटेनर मुंबई में होल्ड हैं जिससे बढ़ा किराया भी देना पड़ रहा है। माल रुका है इस कारण उत्पादन में भी कटौती हो रही है। करीब 500 करोड़ रुपये का माल फंसा है। युद्ध जितना व्यापक होगा, हालात उतने ही बिगड़ते जाएंगे।-नीरज त्रिवेदी, सीनियर मैनेजर इंडार्गो फूड्स लिमिटेड
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जनपद से बड़ी मात्रा में चमड़ा उत्पाद, मांस, जरी परिधान, धागा, केमिकल समेत अन्य वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। अमेरिकी टैरिफ और फिर अमेरिका-ईरान के बीच तनातनी से पहले ही निर्यात प्रभावित था। अब इसके युद्ध में बदल जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। चर्म निर्यात परिषद के पूर्व चेयरमैन असद के इराकी ने बताया कि लाल सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण, पानी के जहाजों को अब यूरोपीय देशों और अमेरिका की ओर जाने के लिए वैकल्पिक और लंबे मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बदलाव के कारण माल की डिलीवरी में लगने वाले समय में काफी वृद्धि हो गई है। अब तक पहले, लाल सागर से गुजरने वाले पानी के जहाज स्वेज नहर मार्ग का उपयोग करके यूरोप और अमेरिका तक पहुंच रहे थे। यह समुद्री मार्ग अपेक्षाकृत छोटा है लेकिन वर्तमान हालात में इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। जहाजों को अब अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।
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आईआईए के रीजनल चेयरमैन जीएन मिश्रा ने बताया कि स्वेज नहर मार्ग से जिस सफर को पूरा करने में 15 से 20 दिन लगते थे अब 25 से 30 दिन लगेंगे। इससे माल की डिलीवरी में देरी होगी और माल की बीमा प्रीमियम में वृद्धि और भाड़ा भी अधिक लगेगा। बताया कि मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता से समय और बढ़ी हुई लागत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बड़ी चुनौती बन रही हैं। जब तक क्षेत्र में शांति बहाल नहीं होती, पानी के जहाजों को इस लंबे और महंगे मार्ग का ही सहारा लेना पड़ रहा है। बंदरगाहों, रास्ते में करोड़ों रुपये का माल अटका हुआ है।
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फोटो-7-ताज आलम
आयात-निर्यात के लिए कठिन समय
जिन कारोबारियों का चमड़े का माल यूरोप के फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, इंग्लैंड, स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे देशों में जाता है, उन पर खास प्रभाव पड़ा है। बुल्गारिया, पोलैंड और हंगरी जैसे समुद्र से दूर देशों में माल नीदरलैंड या इटली पहुंचने के बाद ट्रकों से भेजा जाता है। शिपिंग कंपनियां दूरी और समय अधिक लगने के कारण किराये में वृद्धि कर रही हैं। करीब 1000 करोड़ रुपये का माल रास्ते में फंसा है। आयात-निर्यात व्यापार के लिए बहुत कठिन समय है।-ताज आलम, अध्यक्ष चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर
फोटो-8- नीरज त्रिवेदी
500 करोड़ का मांस निर्यात भी प्रभावित
खाड़ी देशों में युद्ध और अस्थिरता के कारण मांस का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। जनपद से प्रतिदिन 20 से 25 कंटेनर मुंबई भेजे जाते हैं। अब लगभग 40 प्रतिशत निर्यात घट गया है। ईरान के साथ आगे जिन देशों को मांस भेजा जाता है वहां माल नहीं जा पा रहा है। सैकड़ों कंटेनर मुंबई में होल्ड हैं जिससे बढ़ा किराया भी देना पड़ रहा है। माल रुका है इस कारण उत्पादन में भी कटौती हो रही है। करीब 500 करोड़ रुपये का माल फंसा है। युद्ध जितना व्यापक होगा, हालात उतने ही बिगड़ते जाएंगे।-नीरज त्रिवेदी, सीनियर मैनेजर इंडार्गो फूड्स लिमिटेड

फोटो-6-बंथर औद्योगिक क्षेत्र स्थित काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट का कार्यालय। संवाद

फोटो-6-बंथर औद्योगिक क्षेत्र स्थित काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट का कार्यालय। संवाद

फोटो-6-बंथर औद्योगिक क्षेत्र स्थित काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट का कार्यालय। संवाद