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Unnao News: दो साल बाद भी सई नदी पुल अधूरा
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फोटो-17-पुल का अधूरा पड़ा पहुंच मार्ग। संवाद
हसनगंज। तहसील क्षेत्र के भोगला गांव के पास सई नदी पर लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से बने 55 मीटर लंबे पुल से दो साल बाद भी आवागमन शुरू नहीं हो सका है। मार्च 2024 तक पुल का निर्माण पूरा कर आवागमन चालू होना था लेकिन निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद पुल के दोनों ओर मिट्टी का भराव और पहुंच मार्ग का निर्माण नहीं हो सका। देरी के लिए लोक निर्माण विभाग ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पुल तैयार होने के बावजूद पहुंच मार्ग के अभाव में आसपास के कई गांवों के हजारों लोगों को आवागमन में कठिनाई हो रही है। आदमपुर बरेठी, सत्तीदीन खेड़ा, फरहदपुर, कुबरी खेड़ा, शेखपुर बुजुर्ग, जसमंडा बब्बन, गिरिवर खेड़ा, असुरन खेड़ा सहित अन्य गांवों के किसानों और ग्रामीणों को 10 किलोमीटर चक्कर लगाकर मोहान-सई नदी मार्ग से आना-जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने मिट्टी भरान के लिए पुराने पुल के पास खुदाई शुरू कर दी है जिससे वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
ऐतिहासिक है भोगला पुल
सई नदी पर बना भोगला पुल का ऐतिहासिक महत्व है। इसका निर्माण वर्ष 1740 में अवध के नवाब सफदरजंग के वजीर नवल राय ने कराया था। यह पुल एक समय लखनऊ, कानपुर और फर्रुखाबाद को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग का हिस्सा था। वर्ष 1856 में ब्रिटिश जनरल आउटरम ने सैनिक आवागमन रोकने के लिए इसे तोड़ने का प्रयास भी किया था। अब यह ऐतिहासिक पुल जर्जर अवस्था में है, जबकि इसके समानांतर बना नया पुल अधूरा पड़ा है।
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वर्जन...
पुल का निर्माण मार्च 2024 तक पूरा होना था। करीब दो साल होने वाले हैं लेकिन ठेकेदार अभी तक एप्रोच रोड का कार्य शुरू नहीं करा सका है। इसके लिए ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। -प्रवीण कटियार, अवर अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
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पुल तैयार होने के बावजूद पहुंच मार्ग के अभाव में आसपास के कई गांवों के हजारों लोगों को आवागमन में कठिनाई हो रही है। आदमपुर बरेठी, सत्तीदीन खेड़ा, फरहदपुर, कुबरी खेड़ा, शेखपुर बुजुर्ग, जसमंडा बब्बन, गिरिवर खेड़ा, असुरन खेड़ा सहित अन्य गांवों के किसानों और ग्रामीणों को 10 किलोमीटर चक्कर लगाकर मोहान-सई नदी मार्ग से आना-जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने मिट्टी भरान के लिए पुराने पुल के पास खुदाई शुरू कर दी है जिससे वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
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ऐतिहासिक है भोगला पुल
सई नदी पर बना भोगला पुल का ऐतिहासिक महत्व है। इसका निर्माण वर्ष 1740 में अवध के नवाब सफदरजंग के वजीर नवल राय ने कराया था। यह पुल एक समय लखनऊ, कानपुर और फर्रुखाबाद को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग का हिस्सा था। वर्ष 1856 में ब्रिटिश जनरल आउटरम ने सैनिक आवागमन रोकने के लिए इसे तोड़ने का प्रयास भी किया था। अब यह ऐतिहासिक पुल जर्जर अवस्था में है, जबकि इसके समानांतर बना नया पुल अधूरा पड़ा है।
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पुल का निर्माण मार्च 2024 तक पूरा होना था। करीब दो साल होने वाले हैं लेकिन ठेकेदार अभी तक एप्रोच रोड का कार्य शुरू नहीं करा सका है। इसके लिए ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। -प्रवीण कटियार, अवर अभियंता, पीडब्ल्यूडी।