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Unnao News: सर्विस रोड से उतारकर ट्रक खड़ा कराया होता तो बच जाती तीन की जान
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फोटो-14- घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर खड़ीं क्षतिग्रस्त बसें। संवाद
बांगरमऊ (उन्नाव)। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर रविवार रात करीब 12 बजे सिरधरपुर गांव के पास एक ट्रक में रोडवेज बस टकरा गई। यूपीडा की जांच में इस गंभीर घटना में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। यदि क्षतिग्रस्त ट्रक को सुरक्षित स्थान पर हटा कर खड़ा कराया जाता तो शायद तीन लोगों की जान नहीं जाती। यह हादसा एक्सप्रेसवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाता है।
आगरा फोर्ट डिपो की बस टकराने के बाद पुलिस और यूपीडा के बचाव दल ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। क्षतिग्रस्त ट्रक को किलोमीटर संख्या 232 पर प्रीतमपुरा पुलिस चौकी के सामने ही खड़ा कर दिया गया। क्षतिग्रस्त होने से ट्रक की पार्किंग और ब्रेक लाइटें भी टूटी हुई थीं। चौकी पुलिस ने लापरवाही बरती और ट्रक को एक किलोमीटर आगे सर्विस रोड पर नहीं उतारा। इसी लापरवाही के कारण मथुरा डिपो की एक और बस उसी ट्रक से टकरा गई। जिम्मेदार अधिकारियों ने सफाई दी कि ट्रक के आसपास संकेतक और रोशनी थी। उनका कहना है कि मथुरा डिपो की बस के चालक को झपकी आ गई थी।
यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी शशिकांत मिश्रा ने बताया कि ट्रक को सुरक्षित स्थान पर खड़ा कराना पुलिस की जिम्मेदारी थी। परिवहन निगम के अधिकारी बसों में लगे स्पीड गवर्नर के दुरुस्त होने पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों बसों के चालकों पर तेज रफ्तार के कई चालान लंबित हैं। हादसे के वक्त बस की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने का अनुमान है। परिवहन निगम के एआरएम जीसी वर्मा ने एक बस चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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चालकों की तेज रफ्तार और लंबित चालान
हादसे का शिकार हुईं दोनों बसों के चालक तेज रफ्तार से चलने के आदी थे। मथुरा डिपो की बस के कुल सात चालान लंबित पाए गए हैं। इनमें पांच तेज रफ्तार के और दो गलत पार्किंग के कारण हुए हैं। आगरा फोर्ट डिपो की बस के 26 चालान दर्ज हैं। इन चालानों में 22 तेज रफ्तार के और चार गलत पार्किंग के हैं। यह स्थिति तब है जब इन बसों में अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए स्पीड गवर्नर लगे होते हैं। इन स्पीड गवर्नर के काम न करने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परिवहन निगम के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं।
हादसे के बाद भी लापरवाही जारी
एक्सप्रेसवे पर रविवार रात 12:30 बजे और दोपहर 2:30 बजे दो अलग-अलग दुर्घटनाएं हुईं। घटना के 19 घंटे बीतने के बाद भी दोनों क्षतिग्रस्त बसें एक्सप्रेसवे पर ही खड़ी रहीं। शाम सात बजे तक भी उन्हें वहां से हटाया नहीं जा सका था। पुलिस और यूपीडा के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना था कि अधिकारी शायद किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं। क्षतिग्रस्त वाहनों को तुरंत हटाना सड़क सुरक्षा का प्राथमिक नियम है।
एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे हादसे
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और गलत लेन के कारण कई मौतें हो चुकी हैं। इन गंभीर हादसों के बावजूद तेज रफ्तार और गलत लेन में चलने वाले वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। परिणामस्वरूप, एक्सप्रेसवे पर हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
- 10 जुलाई 2024 को बेहटामुजावर क्षेत्र में एक दूध लदे टैंकर में स्लीपर बस घुसने से 18 लोगों की मौत हुई थी। इसी घटना में 19 लोग घायल भी हुए थे।
- 18 जुलाई 2024 को फतेहपुर खालसा के पास अज्ञात वाहन में स्कॉर्पियो घुसने से पांच व्यक्तियों की जान गई थी।
- 25 मई 2025 को रसूलपुर मझिगवां गांव के पास तेज रफ्तार कार कंटेनर में घुसने से चार व्यक्तियों की मौत हुई।
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आगरा फोर्ट डिपो की बस टकराने के बाद पुलिस और यूपीडा के बचाव दल ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। क्षतिग्रस्त ट्रक को किलोमीटर संख्या 232 पर प्रीतमपुरा पुलिस चौकी के सामने ही खड़ा कर दिया गया। क्षतिग्रस्त होने से ट्रक की पार्किंग और ब्रेक लाइटें भी टूटी हुई थीं। चौकी पुलिस ने लापरवाही बरती और ट्रक को एक किलोमीटर आगे सर्विस रोड पर नहीं उतारा। इसी लापरवाही के कारण मथुरा डिपो की एक और बस उसी ट्रक से टकरा गई। जिम्मेदार अधिकारियों ने सफाई दी कि ट्रक के आसपास संकेतक और रोशनी थी। उनका कहना है कि मथुरा डिपो की बस के चालक को झपकी आ गई थी।
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यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी शशिकांत मिश्रा ने बताया कि ट्रक को सुरक्षित स्थान पर खड़ा कराना पुलिस की जिम्मेदारी थी। परिवहन निगम के अधिकारी बसों में लगे स्पीड गवर्नर के दुरुस्त होने पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों बसों के चालकों पर तेज रफ्तार के कई चालान लंबित हैं। हादसे के वक्त बस की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने का अनुमान है। परिवहन निगम के एआरएम जीसी वर्मा ने एक बस चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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चालकों की तेज रफ्तार और लंबित चालान
हादसे का शिकार हुईं दोनों बसों के चालक तेज रफ्तार से चलने के आदी थे। मथुरा डिपो की बस के कुल सात चालान लंबित पाए गए हैं। इनमें पांच तेज रफ्तार के और दो गलत पार्किंग के कारण हुए हैं। आगरा फोर्ट डिपो की बस के 26 चालान दर्ज हैं। इन चालानों में 22 तेज रफ्तार के और चार गलत पार्किंग के हैं। यह स्थिति तब है जब इन बसों में अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए स्पीड गवर्नर लगे होते हैं। इन स्पीड गवर्नर के काम न करने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परिवहन निगम के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं।
हादसे के बाद भी लापरवाही जारी
एक्सप्रेसवे पर रविवार रात 12:30 बजे और दोपहर 2:30 बजे दो अलग-अलग दुर्घटनाएं हुईं। घटना के 19 घंटे बीतने के बाद भी दोनों क्षतिग्रस्त बसें एक्सप्रेसवे पर ही खड़ी रहीं। शाम सात बजे तक भी उन्हें वहां से हटाया नहीं जा सका था। पुलिस और यूपीडा के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना था कि अधिकारी शायद किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं। क्षतिग्रस्त वाहनों को तुरंत हटाना सड़क सुरक्षा का प्राथमिक नियम है।
एक्सप्रेसवे पर लगातार बढ़ रहे हादसे
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और गलत लेन के कारण कई मौतें हो चुकी हैं। इन गंभीर हादसों के बावजूद तेज रफ्तार और गलत लेन में चलने वाले वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। परिणामस्वरूप, एक्सप्रेसवे पर हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
- 10 जुलाई 2024 को बेहटामुजावर क्षेत्र में एक दूध लदे टैंकर में स्लीपर बस घुसने से 18 लोगों की मौत हुई थी। इसी घटना में 19 लोग घायल भी हुए थे।
- 18 जुलाई 2024 को फतेहपुर खालसा के पास अज्ञात वाहन में स्कॉर्पियो घुसने से पांच व्यक्तियों की जान गई थी।
- 25 मई 2025 को रसूलपुर मझिगवां गांव के पास तेज रफ्तार कार कंटेनर में घुसने से चार व्यक्तियों की मौत हुई।