{"_id":"aa5e87c6840a47998afa4c06a1366ea9","slug":"to-farmers-to-reduce-water-intact-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी घटा पर किसानों की मुश्किलें बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी घटा पर किसानों की मुश्किलें बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Fri, 11 Dec 2015 01:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिछिया और असोहा ब्लाकों में नहर की कटी खांदी गुरुवार को भी बंद नहीं की जा सकी। हालांकि नहर का पानी तो घट गया, लेकिन किसानों की मुश्किलें कम नहीं हुईं।
विज्ञापन
दिनभर किसान खेतों में भरा पानी निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करते रहे। दोनों ही ब्लाकों में सिंचाई, नहर विभाग और प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इसे लेकर किसानों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला।
विज्ञापन
असोहा में मंगलवार रात को शारदा नहर की पुरवा ब्रांच से निकले तौरा-मिर्री रजबहा में इब्राहिमपुर और मरोई के बीच खांदी कट गयी थी। इससे क्षेत्र के किसानों की सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो गयी थी। मंगलवार रात से कटी खांदी को गुरुवार को खबर लिखे जाने तक बंद नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
नहर में पानी कम आने से रजबहे में भी पानी के बहाव की गति धीमी पड़ी जिससेकिसानों को कुछ राहत मिली। क्षेत्र के अरविंद यादव, रज्जु , राम सिंह, संजय, लवकुश, संतू, दीपू, मोनू, गुलाबा आदि किसानों ने नहर बंद कराए जाने की मांग की है।
गांव वालों की मानें तो नहर विभाग का कोई कर्मचारी स्थिति का जायजा लेने नहीं आया। ग्रामीणों ने बताया इस रजबहे की सफाई बमुश्किल एक महीने पहले कराई गई थी। लेकिन सफाई के नाम पर की गई खानापूरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
उधर, बिछिया गांव में नहर का पानी गलियों में घुसने से ग्रामीण गृहस्थी उठाकर छत पर पहुुंच गए। वहीं किसान सुबह से ही बिना खाए घर छोड़कर अपने खेतों पर पानी से भीगी धान की फसल उठाकर सड़क पर सुखाते रहे। कुछ किसान सरसों, गेहूं की डूबी फसल का पानी फावड़े से काटकर बाहर निकाल रहे थे।
वहीं गांव की गलियों की टूटी पड़ी सीसी रोड को ईंटों से पाटने का काम युवा करते दिखाई पड़े। बुधवार को खांदी कटने से इस गांव के अलावा मान्धाताखेड़ा, घटोरी, झब्बाखेड़ा तक के किसानों में 80 प्रतिशत लोगों की फसलें नष्ट हो गई हैं।