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डाक टिकट का काउंटर बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Wed, 27 May 2015 12:25 AM IST
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उन्नाव। आम आदमी को स्पीड पोस्ट करनी हो या फिर रजिस्ट्री करनी हो सभी में डाकटिकट और डाक लिफाफे की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन, प्रधान डाकघर से डाक टिकट वाला काउंटर ही बंद कर दिया गया है। इससे लोगों को डाक टिकट और लिफाफे नहीं मिल रहे हैं। लोग रजिस्ट्री और स्पीड पोस्ट करने के लिए भटक रहे हैं।
मौजूदा समय में शहर स्थित प्रधान डाकघर में डाकटिकट की बिक्री के लिए चलने वाला काउंटर बंद कर दिया गया है और यहां से सिर्फ थोक में ही टिकटों की बिक्री होने की बात ग्राहकों को बताई जा रही है। कर्मचारी बता रहे हैं कि यहां से सिर्फ थोक में ही डाकटिकट दी जाती हैं यदि फुटकर में टिकट लेना है तो वह शहर के आवास विकास, किला, कलेक्ट्रेट सहित जिले के अन्य डाकखानों से जाकर ले सकते हैं।
वहीं जब ग्राहक इन पोस्ट ऑफिस में जाता है तो उसे टिकट उपलब्ध न होने की बात कहकर वापस किया जा रहा है। इससे ग्राहक दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर स्थित प्रधान डाकघर में करीब दस से पंद्रह हजार प्रतिदिन के हिसाब से टिकट बिकती हैं और नियमानुसार जिस पोस्टऑफिस में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक की टिकट बिकती है वहां पर इसके लिए अलग से काउंटर खोला जाता है। प्रतिदिन की बिक्री की सीमा को देखा जाए तो यहां की बिक्री भी दो से तीन गुना की है तो इसे क्यों बंद किया गया।
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वर्जन
टिकट काउंटर को बंद करने के आदेश विभागीय अधिकारियों ने दिए थे इसलिए इसे बंद करवा दिया गया है। यदि इसे खोलने के आदेश आएंगे तो काउंटर शुरू करवाया जाएगा। - शांतनु सिंह, सहायक अधीक्षक डाकघर
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मौजूदा समय में शहर स्थित प्रधान डाकघर में डाकटिकट की बिक्री के लिए चलने वाला काउंटर बंद कर दिया गया है और यहां से सिर्फ थोक में ही टिकटों की बिक्री होने की बात ग्राहकों को बताई जा रही है। कर्मचारी बता रहे हैं कि यहां से सिर्फ थोक में ही डाकटिकट दी जाती हैं यदि फुटकर में टिकट लेना है तो वह शहर के आवास विकास, किला, कलेक्ट्रेट सहित जिले के अन्य डाकखानों से जाकर ले सकते हैं।
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वहीं जब ग्राहक इन पोस्ट ऑफिस में जाता है तो उसे टिकट उपलब्ध न होने की बात कहकर वापस किया जा रहा है। इससे ग्राहक दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर स्थित प्रधान डाकघर में करीब दस से पंद्रह हजार प्रतिदिन के हिसाब से टिकट बिकती हैं और नियमानुसार जिस पोस्टऑफिस में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक की टिकट बिकती है वहां पर इसके लिए अलग से काउंटर खोला जाता है। प्रतिदिन की बिक्री की सीमा को देखा जाए तो यहां की बिक्री भी दो से तीन गुना की है तो इसे क्यों बंद किया गया।
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टिकट काउंटर को बंद करने के आदेश विभागीय अधिकारियों ने दिए थे इसलिए इसे बंद करवा दिया गया है। यदि इसे खोलने के आदेश आएंगे तो काउंटर शुरू करवाया जाएगा। - शांतनु सिंह, सहायक अधीक्षक डाकघर