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फैसले से गांव व शहर स्थित घर पर सन्नाटा, लोगों में खामोशी

Sat, 14 Mar 2020 01:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2020 01:09 AM IST
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The silence in the village and city house due to the decision, silence among the people
उन्नाव: कुलदीप सिंह सेंगर। (फाइल फोटो) - फोटो : UNNAO
उन्नाव। दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या में कुलदीप सेंगर व उनके छोटे भाई समेत सभी सात दोषियों को न्यायाधीश ने दस-दस साल की सजा सुनाई है। कुलदीप के बाद अब उनके भाई को भी सजा होने से सेंगर खेमे में मायूसी है। शहर व गांव स्थित आवासों पर सन्नाटा पसरा है। एहतियात के तौर पर थाना पुलिस लगातार गश्त कर रही है। वहीं, पीड़िता व उनके वकील के घर पर तैनात सीआरपीएफ भी मुस्तैद है।
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3 अप्रैल 2018 को दिल्ली से अपने गांव स्थित घर जा रहे दुष्कर्म पीड़िता के पिता को पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर व उनके सहयोगियों ने पीटा था। बाद में पुलिस को देकर दबाव बनाकर उसी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 9 अप्रैल 2018 को न्यायिक हिरासत में उसके पिता की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1 अगस्त 2019 से दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में इस मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। 4 मार्च 2020 को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने कुलदीप सेंगर, उनके भाई अतुल सेंगर, माखी थाना के तत्कालीन एसओ अशोक सिंह भदौरिया, दरोगा केपी सिंह, विनीत मिश्रा उर्फ विनय, वीरेंद्र सिंह उर्फ बउवा, शशि प्रताप सिंह उर्फ सुमन सिंह को दोषी पाया था। हालांकि सजा तय नहीं की थी। जबकि इसी मुकदमे में नामजद एक सिपाही समेत चार लोगों को निर्दोष पाया था।
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शुक्रवार को न्यायालय ने सभी सातों दोषियों को दस साल कैद की सजा सुनाई। इसके बाद कुलदीप सेंगर परिवार और उनके समर्थकों की उम्मीदें टूट गईं। कुलदीप खेमे में मायूसी छा गई। गांव में लोगों में सजा को लेकर चर्चा होती रही लेकिन मीडिया के सामने कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। दुष्कर्म पीड़िता और कुलदीप सेंगर का गांव एक ही होने से पुलिस भी सतर्क रही। माखी थाना पुलिस थोड़ी-थोड़ी देर में गांव में गश्त करती रही। पीड़िता व उसके वकील के घर पर तैनात सीआरपीएफ भी मुस्तैद रही। गांव के बाहर चाय-पान की दुकानों पर लोग इसी प्रकरण को लेकर चर्चा करते रहे। कुलदीप सेंगर के शहर के मोहल्ला सिविल लाइंस स्थित आवास पर भी सन्नाटा रहा।
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