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घोटालों की भरमार, कार्रवाई कब होगी ‘सरकार’
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:06 AM IST
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भले ही प्रशासन ने नवाबगंज में बीआरजीएफ योजना से कागजों पर काम दिखाकर 23 लाख रुपये के गबन के मामले में आठ आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हों, लेकिन इसके बाद भी जिले में कई ऐसे घोटाले हैं जिनके दोषियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। यहां प्रमुख बात तो यह है कि नवाबगंज का बीआरजीएफ घोटाला अन्य दो घोटालों से काफी कम है। इसके बाद भी नवाबगंज में तो कार्रवाई कर दी गई, लेकिन अन्य घोटाले की सिर्र्फ जांच कराई जा रही है।
सोलर लाइट घोटाला: 42 लाख घोटाले की हो चुकी पुष्टि
उन्नाव। पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 में बिछिया की 24 ग्राम पंचायतों में खरीदी गई सोलर लाइटों में मानक को दरकिनार किया गया था। कमीशन के खेल में ग्राम स्तरीय अधिकारियों ने मानक को दरकिनार कर खुले बाजार में निजी कंपनियों से सोलर लाइटें खरीदी। कुछ गांवों में तो आईडी जनरेट करके धनराशि भी निकाली गई तो कुछ में बिना आईडी के ही पैसा निकाला गया। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई थी। टीम में शामिल अधिकारियों ने कुछ गांवों में जाकर स्थलीय निरीक्षण किया।
सूत्रों के जरिये मिले कुछ अभिलेखों से तैयार जांच रिपोर्ट में लगभग 42,55600 रुपये का घोटाला निकाला था। इसी आधार पर घोटाले से संबंधित छह पंचायत सचिवों से स्पष्टीकरण मांगा। फिर 29 सितंबर को पंचायतीराज विभाग ने 24 गांवों के प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बाद में प्रधानों ने मुख्यमंत्री से मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की और आदेश जारी हो गए। दोबारा जांच को लंबा खींचा जाने लगा तो इसकी शिकायत पीएमओ में हो गई।
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इसके बाद उपनिदेशक पंचायतीराज गिरीशचंद्र रजक ने मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। टीम में निदेशालय से संबद्ध डीपीआरओ प्रदीप कुमार, एडीओ (प.) मनोज कुमार त्यागी और अवनीश कुमार श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। फिलहाल टीम जांच के लिए अभी जिले में नहीं आई है।
जांच में 50 लाख का गबन सामने आया
उन्नाव। आईटीआई प्रशासन की ओर से डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी करने पर अगस्त 2016 में सीडीओ ने डीडीओ एनबी सविता से जांच कराई थी। इसके बाद डीडीओ ने आईटीआई जाकर जांच की तो लाखों रुपये के घोटाले का मामला प्रकाश में आया था। जांच में पता चला कि आईटीआई प्रशासन ने इलेक्ट्रानिक व प्लास्टिक फर्नीचर की खरीदारी में जमकर अनियमितता बरती। प्रत्येक सामान का प्रिंट रेट से दो-तीन गुना अधिक भुगतान दर्शाया गया।
रैंडम जांच में घोटाला 50 लाख रुपये से ऊपर होने की आशंका पर तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय टीम से मामले की जांच कराई। सदस्यों ने मौके पर जाकर जांच की और भुगतान संबंधी अभिलेख और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया था तो हर सामान की खरीद में प्रिंट धनराशि से डेढ़ से दोगुना ज्यादा बिल भुगतान की जानकारी हुई। टीम ने महज 70 उपकरणों की ही खरीद प्रक्रिया की जांच की थी तो लाखों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला प्रकाश में आया।
इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम को भेजी गई रिपोर्ट में असल घोटाले की धनराशि का पता लगाने के लिए शासन स्तर की विशेष टीम से कराने की संस्तुति की थी। डीएम ने भी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब शासन ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी थी। टीम का अब इंतजार है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
बिछिया सोलर लाइट मामले की प्रगति जांच रिपोर्र्ट ली जाएगी। जांच टीम ने अभी तक क्या रिपोर्ट तैयार की। इसके अध्ययन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर पारा आईटीआई मामले में शासन से टीम गठित होने की जानकारी आ रही है। उस मामले में शासन द्वारा गठित टीम की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। -संजीव सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
नवाबगंज घोटाले में फर्मों को किया गया ब्लैक लिस्टिेड
उन्नाव। नवाबगंज ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बीआरजीएफ में 23 लाख रुपये के गबन के मामले में भुगतान पाने वाली फर्मों को ब्लैक लिस्टिेड कर दिया गया है। जिन फर्मों को काली सूची में डाला गया है उनमें मेसर्स सुपर ट्रेडर्स गौरा कठेरवा, सुपर ब्रिक फील्ड मखदूमपुर, किसान ब्रिक फील्ड बंथरा, बाबा ब्रिक फील्ड हिंदूखेड़ा व सूर्या ट्रेडर्स गौरा कठेरवा शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2009-10 में बीआरजीएफ से 15 कार्यों की स्वीकृति हुई थी। जिनमें से 8 कार्यों की जांच में 23 लाख का घोटाला मिला। इतने बड़े घोटाले की मुहर लगने के बाद अब प्रशासन शेष कामों की भी जांच कराने जा रहा है। इसके लिए जिलास्तरीय अधिकारियों की टीम गठित करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
कागजों पर हो गए लाखों के काम
हड़ैया गांव के अनुसूचित जाति बस्ती में इंटरलॉकिंग व अन्य काम-10,45970 रुपये
जगदीशपुर मार्ग से नीतू के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
रैनापुर मार्ग से खलील के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
अजगैन मार्ग से शील के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
भिम्माखेड़ा मार्ग से रामजियावन के घर तक सीसी-1,81140 रुपये
सधीरी मार्ग से प्रीती के घर तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
केशरीखेड़ा मार्र्ग से राजरानी के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
इटकुटी मार्ग से मंशाराम के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
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सोलर लाइट घोटाला: 42 लाख घोटाले की हो चुकी पुष्टि
उन्नाव। पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 में बिछिया की 24 ग्राम पंचायतों में खरीदी गई सोलर लाइटों में मानक को दरकिनार किया गया था। कमीशन के खेल में ग्राम स्तरीय अधिकारियों ने मानक को दरकिनार कर खुले बाजार में निजी कंपनियों से सोलर लाइटें खरीदी। कुछ गांवों में तो आईडी जनरेट करके धनराशि भी निकाली गई तो कुछ में बिना आईडी के ही पैसा निकाला गया। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई थी। टीम में शामिल अधिकारियों ने कुछ गांवों में जाकर स्थलीय निरीक्षण किया।
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सूत्रों के जरिये मिले कुछ अभिलेखों से तैयार जांच रिपोर्ट में लगभग 42,55600 रुपये का घोटाला निकाला था। इसी आधार पर घोटाले से संबंधित छह पंचायत सचिवों से स्पष्टीकरण मांगा। फिर 29 सितंबर को पंचायतीराज विभाग ने 24 गांवों के प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बाद में प्रधानों ने मुख्यमंत्री से मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की और आदेश जारी हो गए। दोबारा जांच को लंबा खींचा जाने लगा तो इसकी शिकायत पीएमओ में हो गई।
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इसके बाद उपनिदेशक पंचायतीराज गिरीशचंद्र रजक ने मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। टीम में निदेशालय से संबद्ध डीपीआरओ प्रदीप कुमार, एडीओ (प.) मनोज कुमार त्यागी और अवनीश कुमार श्रीवास्तव को शामिल किया गया है। फिलहाल टीम जांच के लिए अभी जिले में नहीं आई है।
जांच में 50 लाख का गबन सामने आया
उन्नाव। आईटीआई प्रशासन की ओर से डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी करने पर अगस्त 2016 में सीडीओ ने डीडीओ एनबी सविता से जांच कराई थी। इसके बाद डीडीओ ने आईटीआई जाकर जांच की तो लाखों रुपये के घोटाले का मामला प्रकाश में आया था। जांच में पता चला कि आईटीआई प्रशासन ने इलेक्ट्रानिक व प्लास्टिक फर्नीचर की खरीदारी में जमकर अनियमितता बरती। प्रत्येक सामान का प्रिंट रेट से दो-तीन गुना अधिक भुगतान दर्शाया गया।
रैंडम जांच में घोटाला 50 लाख रुपये से ऊपर होने की आशंका पर तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय टीम से मामले की जांच कराई। सदस्यों ने मौके पर जाकर जांच की और भुगतान संबंधी अभिलेख और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया था तो हर सामान की खरीद में प्रिंट धनराशि से डेढ़ से दोगुना ज्यादा बिल भुगतान की जानकारी हुई। टीम ने महज 70 उपकरणों की ही खरीद प्रक्रिया की जांच की थी तो लाखों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला प्रकाश में आया।
इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम को भेजी गई रिपोर्ट में असल घोटाले की धनराशि का पता लगाने के लिए शासन स्तर की विशेष टीम से कराने की संस्तुति की थी। डीएम ने भी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब शासन ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी थी। टीम का अब इंतजार है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
बिछिया सोलर लाइट मामले की प्रगति जांच रिपोर्र्ट ली जाएगी। जांच टीम ने अभी तक क्या रिपोर्ट तैयार की। इसके अध्ययन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर पारा आईटीआई मामले में शासन से टीम गठित होने की जानकारी आ रही है। उस मामले में शासन द्वारा गठित टीम की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। -संजीव सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
नवाबगंज घोटाले में फर्मों को किया गया ब्लैक लिस्टिेड
उन्नाव। नवाबगंज ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बीआरजीएफ में 23 लाख रुपये के गबन के मामले में भुगतान पाने वाली फर्मों को ब्लैक लिस्टिेड कर दिया गया है। जिन फर्मों को काली सूची में डाला गया है उनमें मेसर्स सुपर ट्रेडर्स गौरा कठेरवा, सुपर ब्रिक फील्ड मखदूमपुर, किसान ब्रिक फील्ड बंथरा, बाबा ब्रिक फील्ड हिंदूखेड़ा व सूर्या ट्रेडर्स गौरा कठेरवा शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2009-10 में बीआरजीएफ से 15 कार्यों की स्वीकृति हुई थी। जिनमें से 8 कार्यों की जांच में 23 लाख का घोटाला मिला। इतने बड़े घोटाले की मुहर लगने के बाद अब प्रशासन शेष कामों की भी जांच कराने जा रहा है। इसके लिए जिलास्तरीय अधिकारियों की टीम गठित करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
कागजों पर हो गए लाखों के काम
हड़ैया गांव के अनुसूचित जाति बस्ती में इंटरलॉकिंग व अन्य काम-10,45970 रुपये
जगदीशपुर मार्ग से नीतू के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
रैनापुर मार्ग से खलील के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
अजगैन मार्ग से शील के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
भिम्माखेड़ा मार्ग से रामजियावन के घर तक सीसी-1,81140 रुपये
सधीरी मार्ग से प्रीती के घर तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
केशरीखेड़ा मार्र्ग से राजरानी के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये
इटकुटी मार्ग से मंशाराम के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग-1,81140 रुपये