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Unnao News: ज्यादा दिन तक बाढ़ रहने से काली हो गई धान की फसल
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तकिया गांव में सिरधरपुर मार्ग पर फसल सुखाकर बोरे में भरती महिला किसान।
= फसल को हुए नुकसान से मुरझाए किसानों के चेहरे
संवाद न्यूज एजेंसी
गंजमुरादाबाद। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के खेतों में खड़ी धान की फसल का रंग काला पड़ गया है। वहीं, मिट्टी के संपर्क में आने से धान में अंकुर निकल आए हैं। जिन किसानों ने फसल काटने और सुखाने के बाद उसकी मड़ाई कराई तो उनका दाना भी काले रंग का निकल रहा है। फसल को हुए नुकसान से किसान मायूस हैं।
कल्याणी नदी की बाढ़ से ब्लॉक क्षेत्र के बेहटाकच्छ, शिवलालपुरवा, कुशराजपुर, लोनारी, भिलोई, बाजीपुरवा, इच्छापुरवा, देवरिया, कछियनपुरवा, पकरियापुरवा, तकिया, चिंगरपुरवा, लहरापुर, छोट्टापुरवा, बहलोलपुर, फतेहपुर हामजा, फतेहपुर खालसा, चोरहा, ककरियापुरवा सहित कुल 22 गांव जलमग्न हो गए थे। एक माह बाद प्रभावित अधिकांश गांवों से बाढ़ का पानी सिमट गया है, लेकिन खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। कुछ गांवों में पानी में रहने से कमजोर हुई पौधे जमीन पर गिर गईं। इससे मिट्टी के संपर्क में आने से धान अंकुरित होने लगे हैं। लगातार पानी भरा रहने से फसल का रंग भी काला पड़ गया है।
क्षेत्र के रामकुमार, देवीगुलाम, संतराम, विमलेश कुमार, संतोष कुमार, हरीराम, राधेश्याम, सुरेंद कुमार, रामविलास और उदय प्रताप आदि किसानों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि बाढ़ की विभीषिका से धान की करीब 90 फीसदी फसल का नुकसान हो गया है। अगली फसल की बोआई भी अभी नहीं हो पा रही है। सरकार से समय रहते उचित मुआवजा न मिला तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। तहसीलदार अखिलेश कुमार मौर्य ने बताया कि खेतों का सर्वे जारी है। जल्द ही काम पूरा होने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। किसानों को समुचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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बोले किसान
50 हजार रुपये ठेके पर लिया था खेत, अब कैसे चुकाएंगे रकम
तकिया निवासी महिला किसान नन्ही देवी ने बताया कि पति ने 50 हजार रुपए पर दो बीघा खेत ठेके पर लिया था। बाढ़ ने फसल बर्बाद कर दी। मात्र चार क्विंटल धान हुआ है वह भी काला पड़ गया है। ऐसे में उसकी बिक्री भी नहीं होगी। खेत मालिक को रकम कैसे दी जाएगी यह चिंता सता रही है।
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पानी भरा रहने से बर्बाद हो गई 80% फसल
तकिया की ही रहने वाली महिला किसान रामकली ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने से 80 फीसदी फसल सड़कर नष्ट हो चुकी है। कंबाइन मशीन वाला फसल काटने के एवज में चार हजार रुपये प्रति बीघा की मांग कर रहा है। फसल कटवाने की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंजमुरादाबाद। क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के खेतों में खड़ी धान की फसल का रंग काला पड़ गया है। वहीं, मिट्टी के संपर्क में आने से धान में अंकुर निकल आए हैं। जिन किसानों ने फसल काटने और सुखाने के बाद उसकी मड़ाई कराई तो उनका दाना भी काले रंग का निकल रहा है। फसल को हुए नुकसान से किसान मायूस हैं।
कल्याणी नदी की बाढ़ से ब्लॉक क्षेत्र के बेहटाकच्छ, शिवलालपुरवा, कुशराजपुर, लोनारी, भिलोई, बाजीपुरवा, इच्छापुरवा, देवरिया, कछियनपुरवा, पकरियापुरवा, तकिया, चिंगरपुरवा, लहरापुर, छोट्टापुरवा, बहलोलपुर, फतेहपुर हामजा, फतेहपुर खालसा, चोरहा, ककरियापुरवा सहित कुल 22 गांव जलमग्न हो गए थे। एक माह बाद प्रभावित अधिकांश गांवों से बाढ़ का पानी सिमट गया है, लेकिन खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। कुछ गांवों में पानी में रहने से कमजोर हुई पौधे जमीन पर गिर गईं। इससे मिट्टी के संपर्क में आने से धान अंकुरित होने लगे हैं। लगातार पानी भरा रहने से फसल का रंग भी काला पड़ गया है।
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क्षेत्र के रामकुमार, देवीगुलाम, संतराम, विमलेश कुमार, संतोष कुमार, हरीराम, राधेश्याम, सुरेंद कुमार, रामविलास और उदय प्रताप आदि किसानों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि बाढ़ की विभीषिका से धान की करीब 90 फीसदी फसल का नुकसान हो गया है। अगली फसल की बोआई भी अभी नहीं हो पा रही है। सरकार से समय रहते उचित मुआवजा न मिला तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। तहसीलदार अखिलेश कुमार मौर्य ने बताया कि खेतों का सर्वे जारी है। जल्द ही काम पूरा होने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। किसानों को समुचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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बोले किसान
50 हजार रुपये ठेके पर लिया था खेत, अब कैसे चुकाएंगे रकम
तकिया निवासी महिला किसान नन्ही देवी ने बताया कि पति ने 50 हजार रुपए पर दो बीघा खेत ठेके पर लिया था। बाढ़ ने फसल बर्बाद कर दी। मात्र चार क्विंटल धान हुआ है वह भी काला पड़ गया है। ऐसे में उसकी बिक्री भी नहीं होगी। खेत मालिक को रकम कैसे दी जाएगी यह चिंता सता रही है।
पानी भरा रहने से बर्बाद हो गई 80% फसल
तकिया की ही रहने वाली महिला किसान रामकली ने बताया कि खेतों में पानी भरा होने से 80 फीसदी फसल सड़कर नष्ट हो चुकी है। कंबाइन मशीन वाला फसल काटने के एवज में चार हजार रुपये प्रति बीघा की मांग कर रहा है। फसल कटवाने की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है।

तकिया गांव में सिरधरपुर मार्ग पर फसल सुखाकर बोरे में भरती महिला किसान।

तकिया गांव में सिरधरपुर मार्ग पर फसल सुखाकर बोरे में भरती महिला किसान।

तकिया गांव में सिरधरपुर मार्ग पर फसल सुखाकर बोरे में भरती महिला किसान।