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नोट की चोट से काम-धंधा सुस्त, व्यापारी पस्त
ब्यूरो, अमर उजाला,उन्नाव
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:13 AM IST
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कैश निकालने के लिए एटीएम से बाहर लगी भीड़
- फोटो : Amar ujala
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बडे़ नोट बंद होने से व्यापारी बेहाल हैं। लाखों की कमाई करने वाले व्यापारी बीते एक सप्ताह से हजारों का व्यापार भी नहीं कर पा रहे हैं। कपड़ा, हार्डवेयर, किरना बाजार, भट्ठा व भवन सामग्री के व्यापार पर भी ब्रेक लगा है।।
बड़े नोट की पुरानी करेंसी बैन हुए बारह दिन का समय बीत चुका है लेकिन मार्केट की रौनक अभी भी धुंधली है। मार्केट में ग्राहक न आते देख व्यापारी परेशान हैं। अमर उजाला टीम ने रविवार को ईंट भट्ठा व्यवसाई, कपड़ा व्यवसाई के साथ ही भवन मैटेयिल ट्रेडर्स व्यवसाई से पांच सौ व हजार की पुरानी करेंसी बंद होने के बाद से व्यापार का क्या हाल है ? इस पर चर्चा की तो हर किसी का एक ही जवाब था कि नोट बंदी से फिलहाल व्यापार का पहिया बेपटरी है। पहले की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक बिक्री नहीं हो रही है। व्यापारी खुले तौर पर तो फैसले को सही ठहरा रहे थे लेकिन व्यापार ठप होने की कसक चेहरों पर झलक रही थी। उन्होंने कहा कि बैंक से लेकर एटीएम तक खाली पड़े हैं। करेंसी की कमी ने व्यापार की कमर तोड़ रखी है।
ईंट-भट्ठा को लगा तगड़ा झटका
- पांच सौ व हजार के नोट बंद होने से व्यापार को तगड़ा झटका लगा है। न तो लेबर का भुगतान हो पा रहा है न ही अन्य सामग्री की खरीददारी हो पा रही है। उधार माल बेंचकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। अमित गुप्ता भट्टा व्यवसाई अचलगंज
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उधार माल बेंचना मजबूरी
जो भी आता वो बड़े नोट में ही पेमेंट की बात कहता। हालात यह हो गए हैं कि या तो नोट लो या फिर नुकसान झेलो है। जो कमाई एक से दो दिन में होती थी वो बीते 12 दिनों में नहीं हो सकी है। अब रिस्क लेकर उधार बेंचकर काम चलाना मजबूरी हो गया है। राजकुमार तिवारी ट्रेडर्स व्यवसाई आदर्श नगर
सहालग के महीने में भी सन्नाटा
- सहालग का महीना होने के चलते सबसे ज्यादा कपड़े का व्यापार प्रभावित हुआ है। लोगों के पास छोटे नोट न होने से बिक्री लगभग ठप है। बीते पांच दिनों में सत्तर फीसदी नुकसान हुआ है। बच्चों, महिलाओं व युवाओं के नए कपड़े न के बराबर बिक रहे हैं। रामतनेजा कपड़ा व्यवसाई
दो हजार की नोट बनी मुसीबत
दो हजार की नई करेंसी तो सरकार ने बैंकों को दे दी है। वो लोगों तक भी पहुंच रही है। इससे मुसीबत कम होने के बजाए बढ़ गई है। छोटे नोटों की किल्लत का आलम यह है कि तीन दिनों में दस हजार की बिक्री ही हुई है।
सर्वेश दीक्षित हार्डवेयर दुकानदार हिरन नगर
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बड़े नोट की पुरानी करेंसी बैन हुए बारह दिन का समय बीत चुका है लेकिन मार्केट की रौनक अभी भी धुंधली है। मार्केट में ग्राहक न आते देख व्यापारी परेशान हैं। अमर उजाला टीम ने रविवार को ईंट भट्ठा व्यवसाई, कपड़ा व्यवसाई के साथ ही भवन मैटेयिल ट्रेडर्स व्यवसाई से पांच सौ व हजार की पुरानी करेंसी बंद होने के बाद से व्यापार का क्या हाल है ? इस पर चर्चा की तो हर किसी का एक ही जवाब था कि नोट बंदी से फिलहाल व्यापार का पहिया बेपटरी है। पहले की तुलना में 40 से 50 फीसदी तक बिक्री नहीं हो रही है। व्यापारी खुले तौर पर तो फैसले को सही ठहरा रहे थे लेकिन व्यापार ठप होने की कसक चेहरों पर झलक रही थी। उन्होंने कहा कि बैंक से लेकर एटीएम तक खाली पड़े हैं। करेंसी की कमी ने व्यापार की कमर तोड़ रखी है।
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ईंट-भट्ठा को लगा तगड़ा झटका
- पांच सौ व हजार के नोट बंद होने से व्यापार को तगड़ा झटका लगा है। न तो लेबर का भुगतान हो पा रहा है न ही अन्य सामग्री की खरीददारी हो पा रही है। उधार माल बेंचकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। अमित गुप्ता भट्टा व्यवसाई अचलगंज
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उधार माल बेंचना मजबूरी
जो भी आता वो बड़े नोट में ही पेमेंट की बात कहता। हालात यह हो गए हैं कि या तो नोट लो या फिर नुकसान झेलो है। जो कमाई एक से दो दिन में होती थी वो बीते 12 दिनों में नहीं हो सकी है। अब रिस्क लेकर उधार बेंचकर काम चलाना मजबूरी हो गया है। राजकुमार तिवारी ट्रेडर्स व्यवसाई आदर्श नगर
सहालग के महीने में भी सन्नाटा
- सहालग का महीना होने के चलते सबसे ज्यादा कपड़े का व्यापार प्रभावित हुआ है। लोगों के पास छोटे नोट न होने से बिक्री लगभग ठप है। बीते पांच दिनों में सत्तर फीसदी नुकसान हुआ है। बच्चों, महिलाओं व युवाओं के नए कपड़े न के बराबर बिक रहे हैं। रामतनेजा कपड़ा व्यवसाई
दो हजार की नोट बनी मुसीबत
दो हजार की नई करेंसी तो सरकार ने बैंकों को दे दी है। वो लोगों तक भी पहुंच रही है। इससे मुसीबत कम होने के बजाए बढ़ गई है। छोटे नोटों की किल्लत का आलम यह है कि तीन दिनों में दस हजार की बिक्री ही हुई है।
सर्वेश दीक्षित हार्डवेयर दुकानदार हिरन नगर