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Unnao News: गर्मी से बेहाल हैं पक्षी विहार के हिरन
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नवाबगंज। भीषण गर्मी ने आम लोगों के साथ जंगली जीवों को भी बेहाल कर रखा है। इससे पक्षी विहार क्षेत्र में बने अभ्यारण्य में हिरन भी परेशान हैं। वह बाड़ों से निकलकर नमी वाले स्थानों पर विचरण कर रहे हैं। अत्यधिक गर्मी होने से भूसा के बजाए प्राकृतिक हरा चारा ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार लगभग 800 बीघा में फैला हुआ। वर्ष 1982 में वन क्षेत्र में डियर पार्क (अभ्यारण्य) की स्थापना की गई थी। इसमें हिरनों के लिए 10 हेक्टेयर यानि लगभग 40 बीघे का हिस्सा संरक्षित किया गया था। मौजूदा समय में 12 नर व इतने ही मादा हिरन अभ्यारण्य में हैं। जिनके भोजन की व्यवस्था वन विभाग के जिम्मे है। इन हिरनों को खाने के लिए हरा, सूखा चारा, नमक व गुड़ दिया जाता है। इस समय तेज धूप और गर्मी से हिरन बेहाल हैं। तेज धूप से हिरन बचने के लिए बड़े घने पेड़ों व नमी क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं।
वन क्षेत्राधिकारी हिमांद्री कुरील ने बताया कि हिरणों के लिए तीन शिफ्ट में अलग-अलग केयर टेकर लगाए गए हैं। जो उनके बाड़े में चारे, पानी का प्रबंध करते हैं। हालांकि अत्यधिक गर्मी के चलते हिरन प्राकृतिक चारा जंगल जलेबी, छिया, महुआ आदि खाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं, अभयारण्य के लिए टीनशेड की मांग पर हिमांद्री कुरील ने बताया कि इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
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हिरनों के लिए जगह अनुकूल नहीं
साल 2019 में वाइल्ड लाइफ की एक टीम ने हिरन अभयारण्य का निरीक्षण किया था। जहां पर टीम ने हिरणों के सुरक्षा दृष्टिकोण के हिसाब से यह अभ्यारण्य मुफीद नहीं बताया था। पानी के लिए दो हैंडपंप लगे हैं, उन्हीं से पानी भरकर पिलाया जा रहा है। जबकि अभ्यारण्य में लगा ट्यूबवेल कई साल से खराब है। अभ्यारण्य में बने स्टोर रूम और चिकित्सा कक्ष भी जर्जर है, प्लास्टर टूट कर गिरता रहता है।
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शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार लगभग 800 बीघा में फैला हुआ। वर्ष 1982 में वन क्षेत्र में डियर पार्क (अभ्यारण्य) की स्थापना की गई थी। इसमें हिरनों के लिए 10 हेक्टेयर यानि लगभग 40 बीघे का हिस्सा संरक्षित किया गया था। मौजूदा समय में 12 नर व इतने ही मादा हिरन अभ्यारण्य में हैं। जिनके भोजन की व्यवस्था वन विभाग के जिम्मे है। इन हिरनों को खाने के लिए हरा, सूखा चारा, नमक व गुड़ दिया जाता है। इस समय तेज धूप और गर्मी से हिरन बेहाल हैं। तेज धूप से हिरन बचने के लिए बड़े घने पेड़ों व नमी क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं।
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वन क्षेत्राधिकारी हिमांद्री कुरील ने बताया कि हिरणों के लिए तीन शिफ्ट में अलग-अलग केयर टेकर लगाए गए हैं। जो उनके बाड़े में चारे, पानी का प्रबंध करते हैं। हालांकि अत्यधिक गर्मी के चलते हिरन प्राकृतिक चारा जंगल जलेबी, छिया, महुआ आदि खाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं, अभयारण्य के लिए टीनशेड की मांग पर हिमांद्री कुरील ने बताया कि इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
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हिरनों के लिए जगह अनुकूल नहीं
साल 2019 में वाइल्ड लाइफ की एक टीम ने हिरन अभयारण्य का निरीक्षण किया था। जहां पर टीम ने हिरणों के सुरक्षा दृष्टिकोण के हिसाब से यह अभ्यारण्य मुफीद नहीं बताया था। पानी के लिए दो हैंडपंप लगे हैं, उन्हीं से पानी भरकर पिलाया जा रहा है। जबकि अभ्यारण्य में लगा ट्यूबवेल कई साल से खराब है। अभ्यारण्य में बने स्टोर रूम और चिकित्सा कक्ष भी जर्जर है, प्लास्टर टूट कर गिरता रहता है।