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Unnao News: साहसी राजा चंद्रिका बक्स ने अंग्रेज कमांडर को उतारा था मौत के घाट
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अचलगंज। मात्र 17 साल की कम उम्र में राज सिंहासन संभालने वाले वीर और साहसी राजा चंद्रिका बक्स सिंह ने अंग्रेजी सेना को परास्त करके उसके एक कमांडर को मौत के घाट उतारा था। इससे बौखलाई अंग्रेजी हुकूमत ने धोखे से उन्हें गिरफ्तार करके समुद्र में डुबो दिया था।
बेथर स्टेट में एक नवंबर 1836 को जन्मे चंद्रिका बक्स सिंह के पिता की असमय मौत हो गई थी। जिस कारण उन्हें कम उम्र में ही राजपाठ संभालना पड़ा था। बेहद ही कम उम्र में राजा बने चंद्रिका बक्स सिंह को अंग्रेजी हुकूमत पचा नहीं पा रही थी। पहले स्वतंत्रता आंदोलन के बाद तात्या टोपे के आह्वान पर चंद्रिका बक्स सिंह भी आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। कानपुर से गंगा पार करते हुए अंग्रेजों के एक दस्ते ने कमांडर मुरे के नेतृत्व में अचलगंज बेथर के बीच (जो आज ढनगना के नाम से जाना जाता है) डेरा डाल दिया था।
यहां पर राजा चंद्रिका बक्स सिंह से कई दिन भीषण युद्ध चला था। जिसमें अंग्रेजी सेना परास्त हुई थी। राजा साहब ने कमांडर मुरे को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने दिखावा करके पहले संधि की, फिर धोखे से उन्हें गिरफ्तार कर लिया और काला पानी की सजा सुना दी। दो दिसंबर 1857 को जहाज से ले जाते समय बीच समुद्र में उन्हें डुबो कर मौत के घाट उतार दिया था।
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अंग्रेजों ने गजेटियर में किया राजा साहब की वीरता का वर्णन
अंग्रेजों ने गजेटियर में राजा साहब की वीरता का वर्णन किया था। आज भी बेथर में उनके महल के अवशेष देखे जा सकते हैं। अधिकांश भाग पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। एक नवंबर को बेथर में उनकी जयंती मनाई जाती है। बेथर में बने स्मारक स्थल में उनकी प्रतिमा स्थापित है।
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बेथर स्टेट में एक नवंबर 1836 को जन्मे चंद्रिका बक्स सिंह के पिता की असमय मौत हो गई थी। जिस कारण उन्हें कम उम्र में ही राजपाठ संभालना पड़ा था। बेहद ही कम उम्र में राजा बने चंद्रिका बक्स सिंह को अंग्रेजी हुकूमत पचा नहीं पा रही थी। पहले स्वतंत्रता आंदोलन के बाद तात्या टोपे के आह्वान पर चंद्रिका बक्स सिंह भी आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे। कानपुर से गंगा पार करते हुए अंग्रेजों के एक दस्ते ने कमांडर मुरे के नेतृत्व में अचलगंज बेथर के बीच (जो आज ढनगना के नाम से जाना जाता है) डेरा डाल दिया था।
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यहां पर राजा चंद्रिका बक्स सिंह से कई दिन भीषण युद्ध चला था। जिसमें अंग्रेजी सेना परास्त हुई थी। राजा साहब ने कमांडर मुरे को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने दिखावा करके पहले संधि की, फिर धोखे से उन्हें गिरफ्तार कर लिया और काला पानी की सजा सुना दी। दो दिसंबर 1857 को जहाज से ले जाते समय बीच समुद्र में उन्हें डुबो कर मौत के घाट उतार दिया था।
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अंग्रेजों ने गजेटियर में किया राजा साहब की वीरता का वर्णन
अंग्रेजों ने गजेटियर में राजा साहब की वीरता का वर्णन किया था। आज भी बेथर में उनके महल के अवशेष देखे जा सकते हैं। अधिकांश भाग पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। एक नवंबर को बेथर में उनकी जयंती मनाई जाती है। बेथर में बने स्मारक स्थल में उनकी प्रतिमा स्थापित है।