फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   The bridge from which the British fired bullets on the revolutionaries... has collapsed

Unnao News: अंग्रेजों ने जिस पुल से क्रांतिकारियों पर चलवाई थीं गोलियां... वह ढहा

Wed, 27 Nov 2024 01:01 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2024 01:01 AM IST
विज्ञापन
The bridge from which the British fired bullets on the revolutionaries... has collapsed
उन्नाव। ब्रिटिशकाल में 149 साल पहले कानपुर-शुक्लागंज (उन्नाव) के बीच गंगा नदी पर बने पुल का करीब 30 मीटर हिस्सा मंगलवार तड़के धरासाई हो गया। यह पुल आजादी की लड़ाई का भी गवाह रहा। इसी पुल से अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों पर गोलियां चलवाईं थीं। पुल में आईं दरारों के चलते पीडब्ल्यूडी ने इसे तीन साल पहले बंद कर दिया था।
विज्ञापन

वर्ष 1875 में बने इस पुल के पिलर संख्या नौ और दस के बीच का 30 मीटर लंबा स्पैन (दो पिलर के बीच का हिस्सा) मंगलवार तड़के करीब चार बजे अचानक टूट कर कर नदी में गिर गया। सुबह लोगों की जब नजर पड़ी तो हड़कंप मच गया। कानपुर पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर रवि दत्ता ने पुल के टूटे हिस्से का निरीक्षण किया। बताया कि पुल यातायात के लिए पहले से बंद था। कोई जनहानि नहीं हुई है। नदी में गिरे हिस्से को हटाने के लिए एक टीम लगाई गई है। पुल के अन्य जो भी हिस्से ज्यादा क्षतिग्रस्त हैं, उनका भी सर्वे कराया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

वहीं, कानपुर की तरफ से पिलर नंबर दो, सात, नौ, 10 और 22 नंबर में बड़ी दरारें आ गई थीं। वाहनों के आवागमन के दौरान पिलर की कंक्रीट टूटकर गिरने लगी थी। इस पर कानपुर प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी से सर्वे कराया और पुल को यातायात के लिए खतरनाक होने की रिपोर्ट दी थी। इस पर इसे पांच अप्रैल 2021 को कानपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने बंद करा दिया था। तब से पुल के ऊपर के हिस्से से वाहनों और नीचे के तल से पैदल राहगीरों का आवागमन पूरी तरह बंद था। कानपुर और उन्नाव जिला प्रशासन ने प्रवेश रोकने के लिए दोनों तरफ पक्की दीवार बनाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

-------------------------
पुल को बंकर के रूप में इस्तेमाल करते थे अंग्रेज
उन्नाव। जिले ने शौर्य, स्वाधीनता संग्राम और साहित्य क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। अहिंसा आंदोलन करने वाले महात्मा गांधी के अनुयायी सेनानी हों या अंग्रेजों से अपना हक छीनने की बात कहने वाले चंद्रशेखर आजाद और कानपुर के सेनानी व क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने इस पुल का कई बार प्रयोग किया। साहित्यकार नसीर अहमद बताते हैं कि स्वतंत्रता संग्राम में कानपुर से लेकर लखनऊ तक क्रांतिकारियों और सेनानियों को रोकने, पकड़ने और आंदोलन को कुचलने में अंग्रेजों ने इस पुल का अपने लिए बंकर के रूप में इस्तेमाल किया था। अंग्रेज सेना इस पुल के नीचे के तल में रहती और ऊपरी तल से अंग्रेज सैनिक निगरानी करते थे। साहित्यकार आरपी वर्मा सरस बताते हैं कि अपनी ननिहाल बदरका गांव आने-जाने वाले और काकोरी कांड में शामिल रहे चंद्रशेखर आजाद व उनके जैसे क्रांतिकारी साथियों को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने कई बार इसी पुल से निगरानी बढ़ाई लेकिन उन्हें पकड़ नहीं पाए। (संवाद)
-----------------------
पुल को पिकनिक स्पॉट बनाने की तैयारी थी
कानपुर की ओर पुल को खोलकर पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने की कवायद चल रही थी, लेकिन इसका काम शुरू होता इससे पहले ही पुल गिर गया।

-----------------------
पुल का कुछ और हिस्सा गिरने की कगार पर

गंगा नदी के पुल का जो हिस्सा टूट कर गिरा है उसके दोनों तरफ पिलर नंबर आठ और 11 का हिस्सा भी काफी जर्जर हो चुका है। नाविकों में सुंदरलाल, सोनू, मधुसूदन आदि ने बताया कि पुल के जंग लगे एंगल और पिलर के टुकड़े अक्सर टूट कर गिरते थे। पुल कई और स्थानों पर काफी जर्जर और टूटने के कगार पर है।
----------------------

पुल का इतिहास
उन्नाव। ब्रिटिशकाल में कानपुर से लखनऊ के बीच अंग्रेजों ने जीटी रोड का निर्माण कराया था। गजेटियर के अनुसार, कानपुर और शुक्लागंज (गंगाघाट) के बीच गंगा नदी पर पुल का निर्माण 1875 में उस समय की अवध एंड रुहेलखंड कंपनी ने कराया था। इंजीनियर एसबी न्यूटन और असिस्टेंट इंजीनियर ई वेडगार्ड की देखरेख में यह 800 मीटर लंबा पुल बना था। पुल की उम्र 100 वर्ष बताई गई थी हालांकि यह 149 साल तक मजबूती से तना रहा। इस पुल के गिरने से एक ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान हुआ है। (संवाद)

-------------------------
पुल की खासियत

उन्नाव। ब्रिटिश इंजीनियरों ने इस पुल को पिलर के ऊपर लोहे के मोटे एंगल से बनाया था। यह पुल दो तल का था। तब निचले तल पर अंग्रेजों ने पैदल आवागमन के लिए बनाया और ऊपरी तल से बग्घी, बैलगाड़ी और अंग्रेज अधिकारियों के वाहनों का आवागमन होता था। बाद में निचले हिस्से से पैदल और साइकिल सवारों को रास्ता दिया गया और ऊपर से वाहनों का आवागमन होने लगा। (संवाद)
------------------------


1979 में हुआ था जीर्णोद्धार
1875 में बने इस पुल का 1979 में जीर्णोद्धार कराया गया था। तत्कालीन सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्री त्रिलोक चंद्र ने 20 मई 1979 को पुर्ननिर्माण के बाद इसका लोकार्पण किया था।

-----------------------
पुल टूटा तो चकनाचूर हुईं उम्मीदें

उन्नाव। मंगवलवार सुबह गंगा नदी पर बना पुल टूटने के साथ ही लोगों की उम्मीदें भी टूट गईं। शुक्लांगज नगर और उन्नाव शहर के लोग कानपुर आने-जाने में रोजाना जाम झेलते हैं। स्थानीय लोग इसे दो पहिया वाहनों के लिए खोलने की मांग कर रहे थे। लोगों ने कई बार धरना-प्रदर्शन और जिले के अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री तक को ज्ञापन भेजे। उम्मीद थी कि कभी न कभी उनकी मांग सुनी जाएगी, लेकिन पुल का एक हिस्सा टूटने के साथ ही लोगों की उम्मीदें भी चकनाचूर हो गईं। लोगों का कहना है कि अगर पुल की मरम्मत हुई होती तो शायद इसे टूटने से बचाया जा सकता था। (संवाद)
---------------------------
कई और पिलर दरके, नावों से आवागमन में खतरा

उन्नाव। इस पुल के एक से 12 तक के पिलर कानपुर जिले में और 13 से 24 नंबर तक के पिलर उन्नाव जिले की सीमा में आते हैं। पुल के उन्नाव की तरफ से पिलर नंबर 17, 18 और 20 में भी दरारें हैं। इससे अब नावों से आवागमन और स्नान घाट का भी खतरा बढ़ गया है। हालांकि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि यह पुल कानपुर जिले में आता है। पीडब्ल्यूडी के एसई एनके वर्मा ने बताया कि यह पूरा पुल कानपुर सर्किल में है। नदी में नावों से परिवहन और स्नानघाट को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। (संवाद)
------------------------
एक साल पहले दिल्ली के इंजीनियरों ने की थी जांच
उन्नाव। शुक्लागंज में नए गंगापुल पर रोजाना जाम की समस्या होने से स्थानीय लोगों ने इस पुराने पुल को हल्के वाहनों के लिए खोलने की लगातार मांग कर रहे थे। कानपुर पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर ने एक साल पहले दिल्ली के इंजीनियरों से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच भी कराई थी। तकनीकी टीम ने पुल को दो पहिया वाहनों, रिक्शा व इसी तरह के अन्य हल्के वाहनों के चलने लायक बनाने के लिए मरम्मत पर 29.50 करोड़ रुपये खर्च बताया था। हालांकि खतरे को देखते हुए विभाग ने पहल नहीं की और मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed