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बंदी का शव पहुंचा घर, मचा कोहराम
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शुक्लागंज(उन्नाव)। चोरी के आरोप में पांच महीने पहले जेल गए बंदी की हैलट में इलाज के दौरान मौैत के बाद बुधवार को शव घर पहुंचाया गया। शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने पुलिस पर गलत आरोप में जेल भेजने और जेल में समुचित इलाज न मिलने का आरोप लगाया है। परिजनों ने एसपी व डीएम से शिकायत करने की बात कही है।
गंगाघाट पुलिस ने पोनी गांव निवासी मो. अवन (25) पुत्र जाहिद अली को चोरी व लूट के प्रयास में 9 सितंबर 2019 को जेल भेजा था। वह कुछ महीने से बीमार चल रहा था। उसका जेल अस्पताल में इलाज भी चल रहा था। 9 फरवरी को उसकी हालत बिगड़ गई। जिसपर जेल अधीक्षक एके सिंह के निर्देश पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया था। मंगलवार को उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को शव घर ले जाया गया।
मृतक के बड़े भाई इरशाद ने आरोप लगाया कि उसके भाई को झूठे मुकदमे में फं साया गया था। आरोप है कि जिस समय भाई को जेल भेजा गया था उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। आरोप है कि जेल जाने के बाद भाई को ठीक तरीके से उपचार नहीं मिला। जिस कारण उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई। भाई ने कहा कि वह गलत आरोप में जेल भेजने और जेल में सही तरीके से इलाज न कराने की शिकायत डीएम व एसपी से करेगा। वहीं गंगाघाट पुलिस का कहना है कि जब गिरफ्तार किया गया था। उसके उपचार के कोई भी कागजात या दवा के पर्चे नहीं दिखाए गए जिसके बाद कार्रवाई की गई।
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जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि वह बंदी अवन शारीरिक रूप से कमजोर था। पूर्व में वह नशे का आदी भी था। उन्होंने बताया कि वह हेपेटाइटिस बी से पीड़ित था। जिसपर उसका इलाज कराया जा रहा था। विक्षिप्त होने की बात निराधार है। अगर ऐसा होता तो उसे बनारस जेल में शिफ्ट कर दिया जाता और वहीं के अस्पताल में इलाज कराया जाता। उन्होंने हेपेटाइटिस बी से मौत होने की बात कही है।
डीएम देवेंद्र पांडेय ने बताया कि जेल में बंदी अवन की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी। डीएम ने बताया न्यायिक मजिस्ट्रेट बंदी की मौत होने की घटना की जांच करेंगे। मृतक के परिवार की जो भी शिकायत होगी उसकी भी जांच कराई जाएगी।
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गंगाघाट पुलिस ने पोनी गांव निवासी मो. अवन (25) पुत्र जाहिद अली को चोरी व लूट के प्रयास में 9 सितंबर 2019 को जेल भेजा था। वह कुछ महीने से बीमार चल रहा था। उसका जेल अस्पताल में इलाज भी चल रहा था। 9 फरवरी को उसकी हालत बिगड़ गई। जिसपर जेल अधीक्षक एके सिंह के निर्देश पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे कानपुर हैलट रेफर कर दिया गया था। मंगलवार को उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को शव घर ले जाया गया।
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मृतक के बड़े भाई इरशाद ने आरोप लगाया कि उसके भाई को झूठे मुकदमे में फं साया गया था। आरोप है कि जिस समय भाई को जेल भेजा गया था उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। आरोप है कि जेल जाने के बाद भाई को ठीक तरीके से उपचार नहीं मिला। जिस कारण उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई। भाई ने कहा कि वह गलत आरोप में जेल भेजने और जेल में सही तरीके से इलाज न कराने की शिकायत डीएम व एसपी से करेगा। वहीं गंगाघाट पुलिस का कहना है कि जब गिरफ्तार किया गया था। उसके उपचार के कोई भी कागजात या दवा के पर्चे नहीं दिखाए गए जिसके बाद कार्रवाई की गई।
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जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि वह बंदी अवन शारीरिक रूप से कमजोर था। पूर्व में वह नशे का आदी भी था। उन्होंने बताया कि वह हेपेटाइटिस बी से पीड़ित था। जिसपर उसका इलाज कराया जा रहा था। विक्षिप्त होने की बात निराधार है। अगर ऐसा होता तो उसे बनारस जेल में शिफ्ट कर दिया जाता और वहीं के अस्पताल में इलाज कराया जाता। उन्होंने हेपेटाइटिस बी से मौत होने की बात कही है।
डीएम देवेंद्र पांडेय ने बताया कि जेल में बंदी अवन की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी। डीएम ने बताया न्यायिक मजिस्ट्रेट बंदी की मौत होने की घटना की जांच करेंगे। मृतक के परिवार की जो भी शिकायत होगी उसकी भी जांच कराई जाएगी।