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मनमाना जल दोहन व प्रदूषित करने पर होगी सजा, जुर्माना
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दहीचौकी औद्योगिक क्षेत्र में खुले में भरा प्रदूषित पानी।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। भूगर्भ जल का मनमाना दोहन और उसे प्रदूषित करने वालों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सख्त कार्रवाई करेगा। शासन से इसके निर्देश मिलने के बाद बोर्ड अलग-अलग टीमें बनाने व रूट चार्ट तैयार करने में जुटा है।
प्रदेश सरकार ने भूगर्भ जल (प्रबंधन व विनियमन) विधेयक को मंजूरी दी है। शासन ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े पैमाने पर जल उपयोग व उत्प्रवाह करने वाले उद्योगों, निर्माण परियोजनाओं और टेनरियों पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं। निर्देश हैं कि उन टेनरियों पर भी कड़ा पहरा रखा जाए जिनमें रिवर्स बोरिंग के जरिए दूषित जल को भूगर्भ में छोड़ा जा रहा है। जारी निर्देशों के अनुसार भूगर्भ जल को प्रदूषित करने या अंधाधुन दोहन की पुष्टि होने पर संबधित व्यक्ति या उद्योग संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विधेयक में दिए गए प्रावधानों के अनुसार आरोप साबित होने पर 7 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। मालूम हो कि अबतक भूगर्भ जल के अनियमित जल दोहन व प्रदूषित करते पाए जाने पर दस से पचास हजार रुपये तक जुर्माना का ही प्रावधान था। शासनादेश के अनुसार किसी भी स्तर में लोगों को भूगर्भ जल प्रदूषित न करने दिया जाए। टेनरियों की निगरानी की जाए। यह तय किया जाए कि वह प्रदूषित जल को टैंकों व गड्ढों में डंप न करें। सभी फैक्टरियों व टेनरियों में रिवर्स बोरिंग के आरोपों की भी जांच की जाए।
शासनादेश में कहा गया है कि पानी की फिजूल खर्ची पर अंकुश लगाया जाए। बोरिंग की कैपिसिटी बढ़ाने व पानी साफ करने के नाम पर ट्यूबवेल व सबमर्सिबल पंप से फालतू पानी बहाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जल बचत के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए। धुलाई सेंटरों को भी मानकों के अनुसार संचालित कराया जाए।
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भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार उन्नाव जिले में जल दोहन के सापेक्ष भूगर्भ रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। हर साल भूगर्भ जल औसतन 1 से 1.5 मीटर नीचे जा रहा है। जिले के ब्लॉक हिलौली, असोहा, सुमेरपुर, बीघापुर व पुरवा ब्लॉक में भूगर्भ जल प्रदूषण व फ्लोराइड की समस्या विकराल हो रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि अवैध जल दोहन व भूगर्भ जल को और अवैध तरीके से संभरण करने वालों पर नजर रखी जाएगी, टीमें बनाकर जांच कराकर दोषी पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदेश सरकार ने भूगर्भ जल (प्रबंधन व विनियमन) विधेयक को मंजूरी दी है। शासन ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े पैमाने पर जल उपयोग व उत्प्रवाह करने वाले उद्योगों, निर्माण परियोजनाओं और टेनरियों पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं। निर्देश हैं कि उन टेनरियों पर भी कड़ा पहरा रखा जाए जिनमें रिवर्स बोरिंग के जरिए दूषित जल को भूगर्भ में छोड़ा जा रहा है। जारी निर्देशों के अनुसार भूगर्भ जल को प्रदूषित करने या अंधाधुन दोहन की पुष्टि होने पर संबधित व्यक्ति या उद्योग संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विधेयक में दिए गए प्रावधानों के अनुसार आरोप साबित होने पर 7 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। मालूम हो कि अबतक भूगर्भ जल के अनियमित जल दोहन व प्रदूषित करते पाए जाने पर दस से पचास हजार रुपये तक जुर्माना का ही प्रावधान था। शासनादेश के अनुसार किसी भी स्तर में लोगों को भूगर्भ जल प्रदूषित न करने दिया जाए। टेनरियों की निगरानी की जाए। यह तय किया जाए कि वह प्रदूषित जल को टैंकों व गड्ढों में डंप न करें। सभी फैक्टरियों व टेनरियों में रिवर्स बोरिंग के आरोपों की भी जांच की जाए।
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शासनादेश में कहा गया है कि पानी की फिजूल खर्ची पर अंकुश लगाया जाए। बोरिंग की कैपिसिटी बढ़ाने व पानी साफ करने के नाम पर ट्यूबवेल व सबमर्सिबल पंप से फालतू पानी बहाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जल बचत के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए। धुलाई सेंटरों को भी मानकों के अनुसार संचालित कराया जाए।
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भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार उन्नाव जिले में जल दोहन के सापेक्ष भूगर्भ रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। हर साल भूगर्भ जल औसतन 1 से 1.5 मीटर नीचे जा रहा है। जिले के ब्लॉक हिलौली, असोहा, सुमेरपुर, बीघापुर व पुरवा ब्लॉक में भूगर्भ जल प्रदूषण व फ्लोराइड की समस्या विकराल हो रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि अवैध जल दोहन व भूगर्भ जल को और अवैध तरीके से संभरण करने वालों पर नजर रखी जाएगी, टीमें बनाकर जांच कराकर दोषी पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।