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Unnao News: सातवीं मोहर्रम पर निकाला गया तख्त का जुलूस
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उन्नाव/सफीपुर। सातवीं मोहर्रम के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने तख्त का जुलूस निकाला और शहीद इमाम हुसैन सहित उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया। जुलूस में शामिल लोगों के लिए लंगर-शबील जगह-जगह तकसीम किया गया।
रविवार को सातवीं मोहर्रम के मौके पर सैकड़ों वर्षों से चली आ रही तख्त उठाने की परंपरा के तहत जुलूस निकाला गया। दादा मियां चौराहे के नजदीक से उठा तख्त का जुलूस ऊंटसार, कंजी, तकीनगर, मुल्लनतरफ, कसाई चौराहा आदि मोहल्लों में घूमा। इस मौके पर तख्त पर अकीदतमंदों ने शीरीनी आदि पेश की। दुआएं और मन्नतें मांगी। वहीं चौधराना में भी तख्त जुलूस उठाया गया। यहां लोगों ने नौहेख्वानी व नजर कराई। जुलूस में शामिल लोगों के लिए जगह-जगह लंगर तकसीम किए गए।
उधर, सफीपुर कस्बे के मोहल्ला सैय्यदवाड़ा मस्जिद से अंजुमन इमामिया ने ताबूत व अलम का जुलूस उठाया। यह जुलूस मस्जिद से बड़े इमामबाड़ा होता हुआ मीरबाजार पहुंचा। जहां अंजुमन के सदस्यों ने मातम किया। जुलूस में उप्र राज्य हज समिति के अध्यक्ष व पूर्व राज्यमंत्री मोहसिन रजा भी शामिल हुए। जुलूस किले की बाजार, मियां बाजार, चालकन टोला, हाता बाजार, राहतगंज बाजार से गुजरा। अंजुमन के अध्यक्ष फाएक अहमद ने बताया कि रविवार को शुरू हुआ सातवीं मोहर्रम का जुलूस सोमवार को आठवीं मोहर्रम की सुबह तक चलेगा।
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जुलूस के दौरान एसडीएम नवीन चंद्र व कोतवाल श्याम नारायण सिंह भी मौजूद रहे। वहीं, बांगरमऊ के मोहल्ला सराय से छड़ व अल्मों का जुलूस निकाला गया जो मोहल्ला टेढ़ी बाजार, खत्रियाना व दरगाह शरीफ से गुजरता हुआ शाम को अपने गंतव्य स्थल पर पहुंच कर समाप्त हो गया। जुलूस में अकीकतमंदों ने मातम किया। शाम सात बजे मोहल्ला दरगाह शरीफ व कस्बा टोला से निकाला गया तख्तों का जुलूस सोमवार देर शाम समाप्त होगा।
सातवीं मोहर्रम को याद की जाती है हजरत कासिम की शहादत
सफीपुर। इराक के करबला शहर के रेगिस्तान पर हुई धर्म-अधर्म की जंग में मोहम्मद साहब के नवासे और उनके परिवार पर जुल्मों की शुरुआत सातवीं मोहर्रम से शुरु हुई थी। 80 साल के बुजुर्ग से लेकर छह माह के बच्चे तक पर पानी की पाबंदी लगा दी गई थी। दुनिया की सबसे दर्दनाक कही जाने वाली जंगे करबला में शहीद इमाम के भतीजे कासिम को यादकर सातवीं मोहर्रम में उनका गम मनाया जाता है। बर्बरता की हद पारकर शासक यजीद के सैनिकों ने हजरत की लाश पर हजारों घोड़े दौड़ाए थे। इन्हीं जुल्मों के साथ करबला की जंग आगे बढ़ी। इमाम सहित 72 शहादतों में 7 मोहर्रम हजरत कासिम की शहादत याद करने व गम मनाने के लिए माना गया। इसे आज पूरी दुनिया में मनाया जाता है। (संवाद)
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रविवार को सातवीं मोहर्रम के मौके पर सैकड़ों वर्षों से चली आ रही तख्त उठाने की परंपरा के तहत जुलूस निकाला गया। दादा मियां चौराहे के नजदीक से उठा तख्त का जुलूस ऊंटसार, कंजी, तकीनगर, मुल्लनतरफ, कसाई चौराहा आदि मोहल्लों में घूमा। इस मौके पर तख्त पर अकीदतमंदों ने शीरीनी आदि पेश की। दुआएं और मन्नतें मांगी। वहीं चौधराना में भी तख्त जुलूस उठाया गया। यहां लोगों ने नौहेख्वानी व नजर कराई। जुलूस में शामिल लोगों के लिए जगह-जगह लंगर तकसीम किए गए।
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उधर, सफीपुर कस्बे के मोहल्ला सैय्यदवाड़ा मस्जिद से अंजुमन इमामिया ने ताबूत व अलम का जुलूस उठाया। यह जुलूस मस्जिद से बड़े इमामबाड़ा होता हुआ मीरबाजार पहुंचा। जहां अंजुमन के सदस्यों ने मातम किया। जुलूस में उप्र राज्य हज समिति के अध्यक्ष व पूर्व राज्यमंत्री मोहसिन रजा भी शामिल हुए। जुलूस किले की बाजार, मियां बाजार, चालकन टोला, हाता बाजार, राहतगंज बाजार से गुजरा। अंजुमन के अध्यक्ष फाएक अहमद ने बताया कि रविवार को शुरू हुआ सातवीं मोहर्रम का जुलूस सोमवार को आठवीं मोहर्रम की सुबह तक चलेगा।
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जुलूस के दौरान एसडीएम नवीन चंद्र व कोतवाल श्याम नारायण सिंह भी मौजूद रहे। वहीं, बांगरमऊ के मोहल्ला सराय से छड़ व अल्मों का जुलूस निकाला गया जो मोहल्ला टेढ़ी बाजार, खत्रियाना व दरगाह शरीफ से गुजरता हुआ शाम को अपने गंतव्य स्थल पर पहुंच कर समाप्त हो गया। जुलूस में अकीकतमंदों ने मातम किया। शाम सात बजे मोहल्ला दरगाह शरीफ व कस्बा टोला से निकाला गया तख्तों का जुलूस सोमवार देर शाम समाप्त होगा।
सातवीं मोहर्रम को याद की जाती है हजरत कासिम की शहादत
सफीपुर। इराक के करबला शहर के रेगिस्तान पर हुई धर्म-अधर्म की जंग में मोहम्मद साहब के नवासे और उनके परिवार पर जुल्मों की शुरुआत सातवीं मोहर्रम से शुरु हुई थी। 80 साल के बुजुर्ग से लेकर छह माह के बच्चे तक पर पानी की पाबंदी लगा दी गई थी। दुनिया की सबसे दर्दनाक कही जाने वाली जंगे करबला में शहीद इमाम के भतीजे कासिम को यादकर सातवीं मोहर्रम में उनका गम मनाया जाता है। बर्बरता की हद पारकर शासक यजीद के सैनिकों ने हजरत की लाश पर हजारों घोड़े दौड़ाए थे। इन्हीं जुल्मों के साथ करबला की जंग आगे बढ़ी। इमाम सहित 72 शहादतों में 7 मोहर्रम हजरत कासिम की शहादत याद करने व गम मनाने के लिए माना गया। इसे आज पूरी दुनिया में मनाया जाता है। (संवाद)