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कलेक्ट्रेट में लगेगा सोलर पावर प्लांट
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 09 Apr 2015 11:23 PM IST
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उन्नाव। डीएम कार्यालय में अब बिजली न आने या जनरेटर खराब होने का बहाना नहीं चलेगा। समस्या से निपटने के लिए कलेक्ट्रेट में बीस लाख रुपये की लागत सेे सोलर पावर सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए ऊर्जा मंत्रालय ने डीएम को प्रस्ताव भेजने को कहा है।
केंद्र सरकार की पहल पर उत्तर प्रदेश ऊर्जा विकास अभिकरण की निदेशक डा. काजल ने डीएम सौम्या अग्रवाल को पत्र भेजकर कलेक्ट्रेट भवन में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा है। सोलर प्लांट लगने के बाद बिजली की समस्या से निजात मिल जाएगी।
नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार (एमएनआरई) ने प्रचार प्रसार के लिए संचालित स्पेशल एरिया डिमांसटेशन प्रोग्राम (एसएडीपी) के अंतर्गत कलेक्ट्रेट भवनों अक्षय ऊर्जा श्रोतों से संचालित संयंत्रों को लगाया जा रहा है। योजना में आधा धन केंद्र सरकार व आधा धन राज्य सरकार देगी।
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कलेक्ट्रेट भवन में बीस लाख रुपये से लगने वाली अक्षय ऊर्जा से 10 किलोवाट तक के बैटरी बैकअप सोलर पावर प्लांट एवं 20 किलोवाट वाट तक के बिना बैटरी के सोलर प्लांट लगाया जा सकता है। अक्षय ऊर्जा की स्थापना को लिए कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी व परियोजना अधिकारी यूपी नेडा को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण कर प्रस्ताव तैयार कर नेडा मुख्यालय भेजने को कहा गया है।
बिजली न आने पर जेेनरेटर के माध्यम से कार्य करना पड़ता है। इससे प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए सौर ऊर्जा के माध्यम से इस समस्या से निजात मिल जाएगी।
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केंद्र सरकार की पहल पर उत्तर प्रदेश ऊर्जा विकास अभिकरण की निदेशक डा. काजल ने डीएम सौम्या अग्रवाल को पत्र भेजकर कलेक्ट्रेट भवन में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा है। सोलर प्लांट लगने के बाद बिजली की समस्या से निजात मिल जाएगी।
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नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार (एमएनआरई) ने प्रचार प्रसार के लिए संचालित स्पेशल एरिया डिमांसटेशन प्रोग्राम (एसएडीपी) के अंतर्गत कलेक्ट्रेट भवनों अक्षय ऊर्जा श्रोतों से संचालित संयंत्रों को लगाया जा रहा है। योजना में आधा धन केंद्र सरकार व आधा धन राज्य सरकार देगी।
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कलेक्ट्रेट भवन में बीस लाख रुपये से लगने वाली अक्षय ऊर्जा से 10 किलोवाट तक के बैटरी बैकअप सोलर पावर प्लांट एवं 20 किलोवाट वाट तक के बिना बैटरी के सोलर प्लांट लगाया जा सकता है। अक्षय ऊर्जा की स्थापना को लिए कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी व परियोजना अधिकारी यूपी नेडा को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण कर प्रस्ताव तैयार कर नेडा मुख्यालय भेजने को कहा गया है।
बिजली न आने पर जेेनरेटर के माध्यम से कार्य करना पड़ता है। इससे प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए सौर ऊर्जा के माध्यम से इस समस्या से निजात मिल जाएगी।