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Unnao News: सचिवों की हड़ताल से 145 साधन सहकारी समितियों में ताले
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शहर के शेखपुर स्थित केंद्र का खुला गेट और खाद न होने से पसरा सन्नाटा। संवाद
= खाद न मिलने से फसलों की बोआई थमी, डीएपी न मिलने से आलू व सरसों की मात्र 25% हो पाई बोआई
= पिछले साल 60% हो चुकी थी बोआई, अक्तूबर माह आलू व सरसों के लिए महत्वपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। राज्य कर्मचारी का दर्जा सहित अन्य मांगों को लेकर साधन सहकारी समितियों के सचिवों के हड़ताल पर जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जिले की 145 समितियों में ताला बंद है और किसान डीएपी (खाद) के लिए भटक रहे हैं। इससे आलू व सरसों की बोआई तेजी नहीं पकड़ पा रही है। अब तक मात्र 25 फीसदी ही फसल बोआई हो सकी है। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 60 फीसदी से अधिक था। हालांकि सहायक निबंधक सहकारिता का दावा है कि सचिवों की हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है। वितरण भी शुरू करा दिया गया है।
आलू व सरसों की बोआई की तैयारी में जुटे किसानों की परेशानी सचिवों की हड़ताल ने बढ़ा दी है। जनपद में करीब दस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू व 37 हजार में सरसों की बोआई की जाती है। करीब एक लाख किसान आलू व दो लाख सरसों की पैदावार करते हैं। अक्तूबर माह में दोनों फसलों की शत-प्रतिशत बोआई हो जाती है। इन फसलों की बोआई से पहले किसानों को डीएपी की जरूरत होती है पर अक्तूबर समाप्त होने को मात्र तीन से चार दिन ही बचे हैं, लेकिन खाद न मिलने से अभी तक लगभग 25 फीसदी यानी 11750 हेक्टेयर में ही फसलों की बोआई हो पाई है। पिछले साल बोआई 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में हो गई थी। कृषि जानकारों के मुताबिक, यदि समय से फसलों की बोआई नहीं होगी तो पैदावार पर असर पड़ सकता है।
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केस-1
निजी में महंगी मिल रही डीएपी
गंजमुरादाबाद। विकासखंड क्षेत्र में कुल सात साधन सहकारी समितियां संचालित हो रही हैं। क्षेत्र के किसान बड़े पैमाने पर आलू की खेती करते हैं। इसके लिए किसानों को डीएपी की जरूरत होती है लेकिन समितियों में ताले लगे हुए हैं। समितियों में डीएपी का रेट 50 किग्रा की बोरी का 1350 रुपये है, जबकि निजी दुकानदार तालाबंदी का फायदा उठाकर किसानों से 1700 रुपये तक वसूल रहे हैं। सहायक विकास अधिकारी कृषि शरीफ अहमद मंसूरी ने बताया कि सचिवों की हड़ताल खत्म होते ही खाद का वितरण कराया जाएगा।
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केस-2
खाद वितरण ठप, भटक रहे किसान
पुरवा। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से ब्लॉक क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों चमियानी, बेहटा भवानी, सिजनी सोहरामऊ, पासाखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, दरेहटा, पकराबुजुर्ग, त्रिपुरारपुर, तुसरौर में खाद वितरण ठप है। किसानों में राजेश अग्निहोत्री, नीरज अवस्थी, प्रफुल्ल पटेल, दुर्गा शंकर तिवारी, अभय द्विवेदी, रमेश पाल, पुत्तन लाल और रामू ने बताया कि समितियों पर ताले लटकने से परेशानी बढ़ गई है। बाजार में भी खाद महंगे दाम पर मिल रही है। एडीओ सहकारिता आशीष कुमार ने बताया कि पीसीएफ तुसरौर में डीएपी और यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वहां वितरण चल रहा है। किसान वहां से खाद ले सकते हैं।
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केस-3
असोहा, हसनगंज व सुमेरपुर में भटक रहे किसान
असोहा। ब्लॉक क्षेत्र की सभी समितियों में खाद होने के बाद भी सचिवों की हड़ताल से वितरण नहीं हो पा रहा है। यही हाल हसनगंज क्षेत्र की समितियों का है। सुमेरपुर में संचालित समितियों में भी सचिवों के न पहुंचने से तालाबंदी है। किसान भटक रहे हैं। शहर के एकमात्र शेखपुर नरी स्थित समिति में कर्मचारी हैं, लेकिन यहां पर डीएपी, यूरिया का स्टॉक न होने से किसान मायूस लौटने को मजबूर हैं।
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किसानों की सुनिए
खेतों में नमी, तीन से चार दिन में बोआई जरूरी
हसनगंज के नवई निवासी रमेश ने बताया कि आलू व सरसों की बोआई के लिए डीएपी की जरूरत है लेकिन सचिवों की हड़ताल के चलते खाद नहीं मिल पा रही है। खेतों में नमी होने से अगले तीन-चार दिनों में बोआई जरूरी है। देरी होने पर दोबारा सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा।
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खाली पड़े खेत, फसल बोने को नहीं मिल रही खाद
असोहा के खरगीखेड़ा निवासी रामप्रसाद ने बताया कि वह चार बीघा जमीन पर खेती करते हैं। धान की कटाई के बाद खेत खाली है। फसल बोने के लिए डीएपी नहीं मिल रही है। निजी दुकानदार महंगे दाम पर खाद बेच रहे हैं। सचिवों की हड़ताल से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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वर्जन
सचिवों की हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है। हड़ताली सचिवों में 23 समझाने पर मान गए हैं। इसके अलावा सहकारी संघ के चार, पीसीएफ के नौ, पीसीडीएफ के एक, इफको के चार, आईएफएफडीसी के 15 व एग्री जंक्शन के 14 केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद वितरित कराई जा रही है। दो-तीन दिन में 2600 एमटी इफको डीएपी की नई रैक आने वाली है। इसे समितियों को आवंटित कराकर वितरण कराया जाएगा। - रवींद्र सिंह, सहायक निबंधक सहकारिता
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= पिछले साल 60% हो चुकी थी बोआई, अक्तूबर माह आलू व सरसों के लिए महत्वपूर्ण
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। राज्य कर्मचारी का दर्जा सहित अन्य मांगों को लेकर साधन सहकारी समितियों के सचिवों के हड़ताल पर जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जिले की 145 समितियों में ताला बंद है और किसान डीएपी (खाद) के लिए भटक रहे हैं। इससे आलू व सरसों की बोआई तेजी नहीं पकड़ पा रही है। अब तक मात्र 25 फीसदी ही फसल बोआई हो सकी है। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 60 फीसदी से अधिक था। हालांकि सहायक निबंधक सहकारिता का दावा है कि सचिवों की हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है। वितरण भी शुरू करा दिया गया है।
आलू व सरसों की बोआई की तैयारी में जुटे किसानों की परेशानी सचिवों की हड़ताल ने बढ़ा दी है। जनपद में करीब दस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू व 37 हजार में सरसों की बोआई की जाती है। करीब एक लाख किसान आलू व दो लाख सरसों की पैदावार करते हैं। अक्तूबर माह में दोनों फसलों की शत-प्रतिशत बोआई हो जाती है। इन फसलों की बोआई से पहले किसानों को डीएपी की जरूरत होती है पर अक्तूबर समाप्त होने को मात्र तीन से चार दिन ही बचे हैं, लेकिन खाद न मिलने से अभी तक लगभग 25 फीसदी यानी 11750 हेक्टेयर में ही फसलों की बोआई हो पाई है। पिछले साल बोआई 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल में हो गई थी। कृषि जानकारों के मुताबिक, यदि समय से फसलों की बोआई नहीं होगी तो पैदावार पर असर पड़ सकता है।
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केस-1
निजी में महंगी मिल रही डीएपी
गंजमुरादाबाद। विकासखंड क्षेत्र में कुल सात साधन सहकारी समितियां संचालित हो रही हैं। क्षेत्र के किसान बड़े पैमाने पर आलू की खेती करते हैं। इसके लिए किसानों को डीएपी की जरूरत होती है लेकिन समितियों में ताले लगे हुए हैं। समितियों में डीएपी का रेट 50 किग्रा की बोरी का 1350 रुपये है, जबकि निजी दुकानदार तालाबंदी का फायदा उठाकर किसानों से 1700 रुपये तक वसूल रहे हैं। सहायक विकास अधिकारी कृषि शरीफ अहमद मंसूरी ने बताया कि सचिवों की हड़ताल खत्म होते ही खाद का वितरण कराया जाएगा।
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खाद वितरण ठप, भटक रहे किसान
पुरवा। सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से ब्लॉक क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों चमियानी, बेहटा भवानी, सिजनी सोहरामऊ, पासाखेड़ा, मिर्जापुर सुम्हारी, दरेहटा, पकराबुजुर्ग, त्रिपुरारपुर, तुसरौर में खाद वितरण ठप है। किसानों में राजेश अग्निहोत्री, नीरज अवस्थी, प्रफुल्ल पटेल, दुर्गा शंकर तिवारी, अभय द्विवेदी, रमेश पाल, पुत्तन लाल और रामू ने बताया कि समितियों पर ताले लटकने से परेशानी बढ़ गई है। बाजार में भी खाद महंगे दाम पर मिल रही है। एडीओ सहकारिता आशीष कुमार ने बताया कि पीसीएफ तुसरौर में डीएपी और यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वहां वितरण चल रहा है। किसान वहां से खाद ले सकते हैं।
केस-3
असोहा, हसनगंज व सुमेरपुर में भटक रहे किसान
असोहा। ब्लॉक क्षेत्र की सभी समितियों में खाद होने के बाद भी सचिवों की हड़ताल से वितरण नहीं हो पा रहा है। यही हाल हसनगंज क्षेत्र की समितियों का है। सुमेरपुर में संचालित समितियों में भी सचिवों के न पहुंचने से तालाबंदी है। किसान भटक रहे हैं। शहर के एकमात्र शेखपुर नरी स्थित समिति में कर्मचारी हैं, लेकिन यहां पर डीएपी, यूरिया का स्टॉक न होने से किसान मायूस लौटने को मजबूर हैं।
किसानों की सुनिए
खेतों में नमी, तीन से चार दिन में बोआई जरूरी
हसनगंज के नवई निवासी रमेश ने बताया कि आलू व सरसों की बोआई के लिए डीएपी की जरूरत है लेकिन सचिवों की हड़ताल के चलते खाद नहीं मिल पा रही है। खेतों में नमी होने से अगले तीन-चार दिनों में बोआई जरूरी है। देरी होने पर दोबारा सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा।
खाली पड़े खेत, फसल बोने को नहीं मिल रही खाद
असोहा के खरगीखेड़ा निवासी रामप्रसाद ने बताया कि वह चार बीघा जमीन पर खेती करते हैं। धान की कटाई के बाद खेत खाली है। फसल बोने के लिए डीएपी नहीं मिल रही है। निजी दुकानदार महंगे दाम पर खाद बेच रहे हैं। सचिवों की हड़ताल से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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वर्जन
सचिवों की हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है। हड़ताली सचिवों में 23 समझाने पर मान गए हैं। इसके अलावा सहकारी संघ के चार, पीसीएफ के नौ, पीसीडीएफ के एक, इफको के चार, आईएफएफडीसी के 15 व एग्री जंक्शन के 14 केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद वितरित कराई जा रही है। दो-तीन दिन में 2600 एमटी इफको डीएपी की नई रैक आने वाली है। इसे समितियों को आवंटित कराकर वितरण कराया जाएगा। - रवींद्र सिंह, सहायक निबंधक सहकारिता

शहर के शेखपुर स्थित केंद्र का खुला गेट और खाद न होने से पसरा सन्नाटा। संवाद

शहर के शेखपुर स्थित केंद्र का खुला गेट और खाद न होने से पसरा सन्नाटा। संवाद

शहर के शेखपुर स्थित केंद्र का खुला गेट और खाद न होने से पसरा सन्नाटा। संवाद

शहर के शेखपुर स्थित केंद्र का खुला गेट और खाद न होने से पसरा सन्नाटा। संवाद