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Unnao News: पानी की कमी से बीमारियों का खतरा बढ़ा
Sat, 20 Jan 2024 02:43 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sat, 20 Jan 2024 02:43 AM IST
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फोटो- 4
- कम पानी पीने से लोग हो रहे बीमार, बढ़ रहे गैस, अपच व अन्य पेट संबंधी रोगी
- त्वचा रोग और डिहाइड्रेशन, स्ट्रोक का भी जोखिम गहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। ठंड में लोग पानी से दूरी बना लेते हैं। गर्मी की अपेक्षा काफी कम पानी पीते हैं। इससे पेट के रोगों के अलावा डिहाइड्रेशन और ह्रदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि कम पानी पीने से शरीर के भीतरी अंग ठीक से काम नहीं करते हैं और कई तरह के रोग पनपते हैं। खून गाढ़ा हो जाता है और इससे धमनियों में थक्का जमने व स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा संबंधी बीमारियां भी बढ़ती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि ठंड में रोजाना तीन लीटर पानी पीना चाहिए। इसे गुनगुना करके पीना भी फायदेमंद होगा।
जिला अस्पताल के बाद अब आयुर्वेद चिकित्सालय में भी सर्दी शुरू होते ही उल्टी, दस्त , शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन आदि के मरीज बढ़ने लगे हैं। शहर के कल्याणी मोहल्ला स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में रोजाना औसतन 80 मरीज पहुंच रहे हैं।
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इनमें बड़ी संख्या में कोल्ड डायरिया से पीड़ित मरीज आयुर्वेद चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों अनुसार सर्दी के मौसम में लोग पानी पीना कम कर देते हैं। इससे बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। कम पानी पीना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे डिहाइड्रेशन की परेशानी हो सकती है।
वहीं धमनियों में रक्त का थक्का जमने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा, सांस लेने में परेशानी, पेट संबंधित बीमारियों का जोखिम अधिक होता है। इससे बचने के लिए प्रतिदिन कम से कम तीन लीटर गुनगुना पानी पीते रहना चाहिए। किसी प्रकार का नशा सेवन भी छोड़ना होगा। तंबाकू का अधिक करने पर हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।
लक्षण
सांस लेने में तकलीफ
सीने में दर्द होना
उल्टी होना
जी मिचलाना
दस्त होना
सिर दर्द होना
कमजोरी महसूस होना
नियमित तीन लीटर गुनगुना पीना चाहिए-डॉ रचना वर्मा
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.रचना वर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा रहता है। बताया कि लोग ठंड में बहुत प्यास लगने पर ही पानी पी रहे हैं। इससे उनके शरीर में कमजोरी और दर्द हो रहा है। इससे बचाव के लिए नियमित कम से कम तीन लीटर गुनगुना पीना चाहिए। ऊनी कपड़े पहनने के साथ शरीर में पानी की कमी न हाेने दें। उल्टी और दस्त होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।
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आयुर्वेद की ओर बढ़ा रुझान
कोरोना संक्रमण के बाद लोगों का रुख आयुर्वेद की ओर बढ़ा है। हर रोग का इलाज होने के साथ साइडइफेक्ट न होने से लोगों की भीड़ आयुर्वेद चिकित्सा की ओर बढ़ रही है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार इस चिकित्सा में किसी भी बीमारी को खत्म करने की क्षमता है। यही वजह की लोग एक बार और इसी चिकित्सा पद्धति की ओर लौट रहे हैं। नगरीय राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में रोजाना 80 मरीज डॉक्टर को दिखाने पहुंच रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल स्थित आयुष विंग में औसतन 35 मरीज पहुंचते हैं। यहां तैनात डॉ.राजीव दीक्षित ने बताया कि सभी रोगों से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाता है। लगभग सभी रोगों की दवाएं भी उपलब्ध हैं।
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- कम पानी पीने से लोग हो रहे बीमार, बढ़ रहे गैस, अपच व अन्य पेट संबंधी रोगी
- त्वचा रोग और डिहाइड्रेशन, स्ट्रोक का भी जोखिम गहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। ठंड में लोग पानी से दूरी बना लेते हैं। गर्मी की अपेक्षा काफी कम पानी पीते हैं। इससे पेट के रोगों के अलावा डिहाइड्रेशन और ह्रदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि कम पानी पीने से शरीर के भीतरी अंग ठीक से काम नहीं करते हैं और कई तरह के रोग पनपते हैं। खून गाढ़ा हो जाता है और इससे धमनियों में थक्का जमने व स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा संबंधी बीमारियां भी बढ़ती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि ठंड में रोजाना तीन लीटर पानी पीना चाहिए। इसे गुनगुना करके पीना भी फायदेमंद होगा।
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जिला अस्पताल के बाद अब आयुर्वेद चिकित्सालय में भी सर्दी शुरू होते ही उल्टी, दस्त , शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन आदि के मरीज बढ़ने लगे हैं। शहर के कल्याणी मोहल्ला स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में रोजाना औसतन 80 मरीज पहुंच रहे हैं।
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इनमें बड़ी संख्या में कोल्ड डायरिया से पीड़ित मरीज आयुर्वेद चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों अनुसार सर्दी के मौसम में लोग पानी पीना कम कर देते हैं। इससे बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। कम पानी पीना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे डिहाइड्रेशन की परेशानी हो सकती है।
वहीं धमनियों में रक्त का थक्का जमने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा त्वचा, सांस लेने में परेशानी, पेट संबंधित बीमारियों का जोखिम अधिक होता है। इससे बचने के लिए प्रतिदिन कम से कम तीन लीटर गुनगुना पानी पीते रहना चाहिए। किसी प्रकार का नशा सेवन भी छोड़ना होगा। तंबाकू का अधिक करने पर हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।
लक्षण
सांस लेने में तकलीफ
सीने में दर्द होना
उल्टी होना
जी मिचलाना
दस्त होना
सिर दर्द होना
कमजोरी महसूस होना
नियमित तीन लीटर गुनगुना पीना चाहिए-डॉ रचना वर्मा
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.रचना वर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा रहता है। बताया कि लोग ठंड में बहुत प्यास लगने पर ही पानी पी रहे हैं। इससे उनके शरीर में कमजोरी और दर्द हो रहा है। इससे बचाव के लिए नियमित कम से कम तीन लीटर गुनगुना पीना चाहिए। ऊनी कपड़े पहनने के साथ शरीर में पानी की कमी न हाेने दें। उल्टी और दस्त होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।
आयुर्वेद की ओर बढ़ा रुझान
कोरोना संक्रमण के बाद लोगों का रुख आयुर्वेद की ओर बढ़ा है। हर रोग का इलाज होने के साथ साइडइफेक्ट न होने से लोगों की भीड़ आयुर्वेद चिकित्सा की ओर बढ़ रही है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार इस चिकित्सा में किसी भी बीमारी को खत्म करने की क्षमता है। यही वजह की लोग एक बार और इसी चिकित्सा पद्धति की ओर लौट रहे हैं। नगरीय राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में रोजाना 80 मरीज डॉक्टर को दिखाने पहुंच रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल स्थित आयुष विंग में औसतन 35 मरीज पहुंचते हैं। यहां तैनात डॉ.राजीव दीक्षित ने बताया कि सभी रोगों से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाता है। लगभग सभी रोगों की दवाएं भी उपलब्ध हैं।