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Unnao News: सीएचसी में रीजेंट तो पहुंचा, जांच के नाम पर हो रही खानापूर्ति
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उन्नाव। स्वास्थ्य केंद्रों में शोपीस बनीं सीबीसी मशीनों का संचालन और मरीजों की जांच शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने रीजेंट तो भिजवा दिया लेकिन मशीनों का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
जिन तीन सीएचसी में जांचें शुरू हुईं वहां भी 13 के बजाए सिर्फ तीन प्रकार की जांच करके कोरम पूरा किया जा रहा है। जिले के 16 सीएचसी में से 13 में जांच सुविधा शुरू होना तो दूर खराब मशीनें तक नहीं दुरुस्त हो पाईं। इससे जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में 180 मरीजों ने सैंपल दिए।
जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) मशीन लगी है। अभी तक इन मशीनों में रीजेंट न मिलने से इनका महीनों से संचालन नहीं हो पा रहा था। अब स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोरम पूरा करने के लिए रीजेंट तो भेज दिया लेकिन जांच अभी भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाईं हैं।
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स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहीं जांचों पर गौर किया जाए तो नवाबगंज सीएचसी में मशीन कबाड़ में पड़ी है। यहां मैनुअल तरीके से मरीजों की जांच की जा रही है।
फतेहपुर चौरासी में सीबीसी मशीन तो नहीं चली लेकिन रीजेंट पहुंचने से कई महीनों से बंद पड़ी बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर इंजीनियर न आने से संचालित नहीं हो पाई। टेक्नीशियन शिवमोहन ने बताया कि सीबीसी मशीन संचालन का रीजेंट नहीं आया है। इससे एलएफटी, केएफटी, कैल्शियम, लिपिड प्रोफाइल की जांचें नहीं हो पा रहीं हैं। वहीं बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर का रीजेंट है लेकिन अब तक उसकी शुरुआत नहीं हो पाई।
मौरावां सीएचसी में रीजेंट पहुंचा गया लेकिन यहां सीबीसी मशीन खराब है। सीएचसी प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि इंजीनियर से बात हो गई है। एक दो दिन में सही हो जाएगी। तब तक किट से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की जांच की जा रही है।
अचलगंज सीएचसी, औरास और बांगरमऊ में सीबीसी मशीन चलने लगी है। यहां सिर्फ तीन से चार जांचे कर कोरम पूरा हो रहा है।
सीएससी में रिजेंट तो भेजा गया लेकिन सभी प्रकार की जांचे शुरू नहीं हो पाई हैं। दिन भर में तीन से चार जांच कर सीएचसी प्रभारी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। इस समय 16 सीएचसी में से केवल अचलगंज, बांगरमऊ व औरास में सीबीसी मशीन से जांच हो पा रही है। 13 स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सुविधा न होने से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इससे जिले की 32 लाख आबादी जिला अस्पताल या फिर निजी पैथोलॉजी की जांच पर निर्भर है। जिला अस्पताल में भी सुबह से ही भीड़ लगती और धक्कामुक्की होती रहती है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि कई सीएचसी में कार्यरत कर्मचारियों की निजी पैथोलॉजी संचालकों से सांठगांठ के चलते सरकारी अस्पतालों की जांच और एक्सरे मशीनें अक्सर खराब हो जाती हैं। कहीं जांच मशीन में खराबी आ जाती है तो कहीं एक्सरे मशीन बंद हो जाती है। मजबूरन मरीज आसपास के निजी पैथोलॉजी जांच और एक्सरे कराते हैं। इसके लिए उन्हें काफी रुपये भी खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में जांच निशुल्क होती है।
जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में लगी सेलेक्ट्रा मशीन चार महीने में छह बार खराब हुई। जून और जुलाई में दो बार और अगस्त महीने में तीन बार और सितंबर महीने में दो बार मशीन खराब हुई। इस दौरान चार महीनों में 20 दिन जांच बंद रहीं और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।
सीएचसी होने के बाद भी यहां अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सुविधा नहीं है। किट के सहारे किसी तरह सीबीसी और शुगर की जांच की जा रही है। जांच केंद्र में मशीन तो हैं लेकिन उन्हें ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन की तैनाती नहीं है। इससे मशीन केवल शोपीस बनी हुई हैं। वहीं हेल्थ एटीएम से भी जांच सेवा बाधित है।
पुरवा सीएचसी में एक्सरे मशीन अक्सर खराब रहती है। 26 दिसंबर से 30 जनवरी , 22 मार्च, 27 मार्च तक, सात अप्रैल 19 अप्रैल, 12 अगस्त से 19 अगस्त तक एक्सरे मशीन खराब रही। इस दौरान मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जांच करानी पड़ती या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।
सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि रीजेंट सभी जगह भेजा गया है। सभी जगह सीबीसी मशीनों को जांच शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर हकीकत देखेंगे और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
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जिन तीन सीएचसी में जांचें शुरू हुईं वहां भी 13 के बजाए सिर्फ तीन प्रकार की जांच करके कोरम पूरा किया जा रहा है। जिले के 16 सीएचसी में से 13 में जांच सुविधा शुरू होना तो दूर खराब मशीनें तक नहीं दुरुस्त हो पाईं। इससे जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में 180 मरीजों ने सैंपल दिए।
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जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) मशीन लगी है। अभी तक इन मशीनों में रीजेंट न मिलने से इनका महीनों से संचालन नहीं हो पा रहा था। अब स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोरम पूरा करने के लिए रीजेंट तो भेज दिया लेकिन जांच अभी भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाईं हैं।
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स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहीं जांचों पर गौर किया जाए तो नवाबगंज सीएचसी में मशीन कबाड़ में पड़ी है। यहां मैनुअल तरीके से मरीजों की जांच की जा रही है।
फतेहपुर चौरासी में सीबीसी मशीन तो नहीं चली लेकिन रीजेंट पहुंचने से कई महीनों से बंद पड़ी बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर इंजीनियर न आने से संचालित नहीं हो पाई। टेक्नीशियन शिवमोहन ने बताया कि सीबीसी मशीन संचालन का रीजेंट नहीं आया है। इससे एलएफटी, केएफटी, कैल्शियम, लिपिड प्रोफाइल की जांचें नहीं हो पा रहीं हैं। वहीं बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर का रीजेंट है लेकिन अब तक उसकी शुरुआत नहीं हो पाई।
मौरावां सीएचसी में रीजेंट पहुंचा गया लेकिन यहां सीबीसी मशीन खराब है। सीएचसी प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि इंजीनियर से बात हो गई है। एक दो दिन में सही हो जाएगी। तब तक किट से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की जांच की जा रही है।
अचलगंज सीएचसी, औरास और बांगरमऊ में सीबीसी मशीन चलने लगी है। यहां सिर्फ तीन से चार जांचे कर कोरम पूरा हो रहा है।
सीएससी में रिजेंट तो भेजा गया लेकिन सभी प्रकार की जांचे शुरू नहीं हो पाई हैं। दिन भर में तीन से चार जांच कर सीएचसी प्रभारी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। इस समय 16 सीएचसी में से केवल अचलगंज, बांगरमऊ व औरास में सीबीसी मशीन से जांच हो पा रही है। 13 स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सुविधा न होने से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इससे जिले की 32 लाख आबादी जिला अस्पताल या फिर निजी पैथोलॉजी की जांच पर निर्भर है। जिला अस्पताल में भी सुबह से ही भीड़ लगती और धक्कामुक्की होती रहती है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि कई सीएचसी में कार्यरत कर्मचारियों की निजी पैथोलॉजी संचालकों से सांठगांठ के चलते सरकारी अस्पतालों की जांच और एक्सरे मशीनें अक्सर खराब हो जाती हैं। कहीं जांच मशीन में खराबी आ जाती है तो कहीं एक्सरे मशीन बंद हो जाती है। मजबूरन मरीज आसपास के निजी पैथोलॉजी जांच और एक्सरे कराते हैं। इसके लिए उन्हें काफी रुपये भी खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में जांच निशुल्क होती है।
जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में लगी सेलेक्ट्रा मशीन चार महीने में छह बार खराब हुई। जून और जुलाई में दो बार और अगस्त महीने में तीन बार और सितंबर महीने में दो बार मशीन खराब हुई। इस दौरान चार महीनों में 20 दिन जांच बंद रहीं और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।
सीएचसी होने के बाद भी यहां अल्ट्रासाउंड और एक्सरे सुविधा नहीं है। किट के सहारे किसी तरह सीबीसी और शुगर की जांच की जा रही है। जांच केंद्र में मशीन तो हैं लेकिन उन्हें ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन की तैनाती नहीं है। इससे मशीन केवल शोपीस बनी हुई हैं। वहीं हेल्थ एटीएम से भी जांच सेवा बाधित है।
पुरवा सीएचसी में एक्सरे मशीन अक्सर खराब रहती है। 26 दिसंबर से 30 जनवरी , 22 मार्च, 27 मार्च तक, सात अप्रैल 19 अप्रैल, 12 अगस्त से 19 अगस्त तक एक्सरे मशीन खराब रही। इस दौरान मरीजों को निजी पैथोलॉजी में जांच करानी पड़ती या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।
सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि रीजेंट सभी जगह भेजा गया है। सभी जगह सीबीसी मशीनों को जांच शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर हकीकत देखेंगे और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
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