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Unnao News: पालिका कर्मी खुलेआम जला रहे कूड़ा, बीमार हो रहे लोग
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उन्नाव। एनजीटी ने कूड़ा जलाने पर रोक लगा रखी है। यहां तक कि पराली जलाने पर भी रोक है, लेकिन शहर में नगर पालिका के कर्मचारी खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। शहर में दर्जनों स्थानों पर पालिका कर्मी कूड़ा एकत्र करके निस्तारण के नाम पर जला रहे हैं। दुर्गंध और धुआं लोगों को बीमार कर रहा है। हालत यह है कि लोगों ने सुबह टहलना तक बंद कर दिया है।
तीन साल पहले शहर से आठ किलोमीटर दूर जानकीखेड़ा गांव के पास छह एकड़ में 6.72 करोड़ से 65 टीडीपी (टन प्रति दिन) की क्षमता वाले कूड़ा निस्तारण केंद्र के निर्माण को मंजूरी मिली थी। लेकिन अभी तक केवल दीवारें और टिन शेड ही लगाए जा सके हैं। हालांकि यहां कूड़ा डंप करने की व्यवस्था है, लेकिन दूरी अधिक होने और डीजल बचाने के लिए कर्मचारी और साफ-सफाई का ठेका लेने वाली एजेंसी रात में जगह-जगह कूड़ा एकत्र कर उसे जला रही है। दिनभर कूड़े के ढेरों से निकल रहा धुआं और दुर्गंध लोगों के लिए मुसीबत बनी है।
हालत यह है कि शहर के वीआईपी क्षेत्र कहे जाने वाले सिविल लाइन्स में ही कई स्थानों पर दिन-रात कूड़ा जलता रहता है। धुएं के गुबार छाए रहते हैं, जिसे अफसर जानबूझकर अनदेखा कर रहे हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास, डीएम आवास से कुछ दूर डॉक्टर जीनाथ जी इंटर कॉलेज जाने वाले मार्ग और हरदोई रोड बाईपास सहित अन्य स्थान शामिल हैं। नगर पालिका के आंकड़ों के अनुसार, शहर में प्रतिदिन औसतन 50 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसे जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
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इन क्षेत्रोंं में सबसे ज्यादा मुसीबत
मोहल्ला दरोगाबाग, पुलिस लाइन क्षेत्र, जेल कालोनी, आदर्शनगर, कांशीराम कालोनी, इब्राहिमबाग, पीडी नगर, आवास विकास कालोनी, सिविल लाइंस, कचहरी रोड, कब्बाखेड़ा, पूरन नगर, लोकनगर, अनवार नगर आदि।
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क्या कहते हैं डाक्टर
धुएं से हो सकता है टीबी, अस्थमा रोग
जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. शोभित अग्रिहोत्री ने बताया कि कूड़े में प्लास्टिक, पॉलिथीन सहित अन्य चीजें होती हैं। इनके जलने से निकलने वाले धुएं के लगातार संपर्क में रहने से व्यक्ति टीबी, अस्थमा से पीडि़त हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों में रहने या आवागमन करने वाले लोगों के लिए जरूरी है, वह मॉस्क का प्रयोग करें।
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लिवर, त्वचा व आंखों के लिए भी घातक
जिला अस्पताल फिजीशियन डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि कूड़े-कचरे के धुएं से लोगों को लिवर व पेट संबंधी बीमारियों के साथ सांस, त्वचा, आंख, खून व फेफड़ों संबंधी बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है। बताया कि कूड़े को कभी जलाना नहीं चाहिए। इसका सुरक्षित निस्तारण ही आम जनमानस को संक्रमण और रोगों से बचा सकता है।
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नौ दिन में 135 सांस रोगी पहुंचे जिला अस्पताल, दो की मौत
बीते नौ दिन में जिला अस्पताल में 135 रोगी डॉक्टर को दिखाने पहुंचे। 33 गंभीर मरीजाें को भर्ती किया। इनमें से दो की मौत इलाज के दौरान हो गई। जबकि 14 मरीजों को गंभीर हालत में कानपुर रेफर किया गया है।
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बोले जिम्मेदार
कूड़ा निस्तारण केंद्र का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है। पालिका कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वह कूड़े का सुरक्षित निस्तारण करें। न तो कूड़ा खुले में फेंकें और डंप कर उसे जलाएं। दिखवाया जाएगा, अगर कहीं कूड़े में आग लगाई जा रही है तो संबंधित सुपरवाइजर व अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
- एसके गौतम, ईओ नगर पालिका
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शहर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्गों पर रात में भी झाड़ू लगवाने के साथ ही कूड़ा भी उठवाया जा रहा है। अगर ठेकेदार या नगर पालिका कर्मचारी कूड़े को डंप करके उसे निस्तारित करने के नाम पर जला रहे हैं तो यह गंभीर बात है। इसे दिखवाया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- श्वेता मिश्रा,अध्यक्ष नगर पालिका
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कूड़ा जलने से सांस लेने में हो रही दिक्कत
फोटो नंबर 32-सरला श्रीवास्तव। संवाद
मोहल्ला शाहगंज निवासी सरला श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह उठकर हरदोई पुल तक टहलने जाती हैं। लेकिन जगह-जगह कूड़ा जलने से इतना धुआं हो जाता है कि सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे एक सप्ताह से टहलना बंद कर दिया है।
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फोटो नंबर 33-गीता मिश्रा। स्रोत: स्वयं
पुराना नार्मल स्कूल कॉलोनी निवासी गीता मिश्रा ने बताया कि कॉलोनी से करीब 150 मीटर दूर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास नगर पालिका का कूड़ा डंपिंग सेंटर है। कर्मचारी यहां कूड़ा जलाते हैं, इसकी दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल होता है।
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फोटो नंबर 34- श्रीराम। स्रोत: स्वयं
एबी नगर निवासी श्रीराम ने बताया कि नगर पालिका के सफाई कर्मचारी गली मोहल्लों में कूड़ा एकत्र करके उसे उठाना न पड़े इसलिए जलाते हैं। दुर्गंध और धुआं से लोग परेशान हो रहे हैं। शिकायत भी की गई लेकिन सुधार नहीं हुआ।
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फोटो नंबर 35- सरदार कैप्टन सिंह। संवाद
गांधीनगर निवासी कैप्टन सिंह ने बताया कि शहर में कई स्थानों पर लगे कूड़े के ढेर ही नहीं, कर्मचारी नियमों की अनदेखी करके कंटेनरों में भरा कूड़ा भी जला देते हैं।लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पर लोक लगानी चाहिए।
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तीन साल पहले शहर से आठ किलोमीटर दूर जानकीखेड़ा गांव के पास छह एकड़ में 6.72 करोड़ से 65 टीडीपी (टन प्रति दिन) की क्षमता वाले कूड़ा निस्तारण केंद्र के निर्माण को मंजूरी मिली थी। लेकिन अभी तक केवल दीवारें और टिन शेड ही लगाए जा सके हैं। हालांकि यहां कूड़ा डंप करने की व्यवस्था है, लेकिन दूरी अधिक होने और डीजल बचाने के लिए कर्मचारी और साफ-सफाई का ठेका लेने वाली एजेंसी रात में जगह-जगह कूड़ा एकत्र कर उसे जला रही है। दिनभर कूड़े के ढेरों से निकल रहा धुआं और दुर्गंध लोगों के लिए मुसीबत बनी है।
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हालत यह है कि शहर के वीआईपी क्षेत्र कहे जाने वाले सिविल लाइन्स में ही कई स्थानों पर दिन-रात कूड़ा जलता रहता है। धुएं के गुबार छाए रहते हैं, जिसे अफसर जानबूझकर अनदेखा कर रहे हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास, डीएम आवास से कुछ दूर डॉक्टर जीनाथ जी इंटर कॉलेज जाने वाले मार्ग और हरदोई रोड बाईपास सहित अन्य स्थान शामिल हैं। नगर पालिका के आंकड़ों के अनुसार, शहर में प्रतिदिन औसतन 50 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसे जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
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इन क्षेत्रोंं में सबसे ज्यादा मुसीबत
मोहल्ला दरोगाबाग, पुलिस लाइन क्षेत्र, जेल कालोनी, आदर्शनगर, कांशीराम कालोनी, इब्राहिमबाग, पीडी नगर, आवास विकास कालोनी, सिविल लाइंस, कचहरी रोड, कब्बाखेड़ा, पूरन नगर, लोकनगर, अनवार नगर आदि।
क्या कहते हैं डाक्टर
धुएं से हो सकता है टीबी, अस्थमा रोग
जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. शोभित अग्रिहोत्री ने बताया कि कूड़े में प्लास्टिक, पॉलिथीन सहित अन्य चीजें होती हैं। इनके जलने से निकलने वाले धुएं के लगातार संपर्क में रहने से व्यक्ति टीबी, अस्थमा से पीडि़त हो सकता है। ऐसे क्षेत्रों में रहने या आवागमन करने वाले लोगों के लिए जरूरी है, वह मॉस्क का प्रयोग करें।
लिवर, त्वचा व आंखों के लिए भी घातक
जिला अस्पताल फिजीशियन डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि कूड़े-कचरे के धुएं से लोगों को लिवर व पेट संबंधी बीमारियों के साथ सांस, त्वचा, आंख, खून व फेफड़ों संबंधी बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है। बताया कि कूड़े को कभी जलाना नहीं चाहिए। इसका सुरक्षित निस्तारण ही आम जनमानस को संक्रमण और रोगों से बचा सकता है।
नौ दिन में 135 सांस रोगी पहुंचे जिला अस्पताल, दो की मौत
बीते नौ दिन में जिला अस्पताल में 135 रोगी डॉक्टर को दिखाने पहुंचे। 33 गंभीर मरीजाें को भर्ती किया। इनमें से दो की मौत इलाज के दौरान हो गई। जबकि 14 मरीजों को गंभीर हालत में कानपुर रेफर किया गया है।
बोले जिम्मेदार
कूड़ा निस्तारण केंद्र का काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है। पालिका कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वह कूड़े का सुरक्षित निस्तारण करें। न तो कूड़ा खुले में फेंकें और डंप कर उसे जलाएं। दिखवाया जाएगा, अगर कहीं कूड़े में आग लगाई जा रही है तो संबंधित सुपरवाइजर व अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
- एसके गौतम, ईओ नगर पालिका
शहर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्गों पर रात में भी झाड़ू लगवाने के साथ ही कूड़ा भी उठवाया जा रहा है। अगर ठेकेदार या नगर पालिका कर्मचारी कूड़े को डंप करके उसे निस्तारित करने के नाम पर जला रहे हैं तो यह गंभीर बात है। इसे दिखवाया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- श्वेता मिश्रा,अध्यक्ष नगर पालिका
कूड़ा जलने से सांस लेने में हो रही दिक्कत
फोटो नंबर 32-सरला श्रीवास्तव। संवाद
मोहल्ला शाहगंज निवासी सरला श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह उठकर हरदोई पुल तक टहलने जाती हैं। लेकिन जगह-जगह कूड़ा जलने से इतना धुआं हो जाता है कि सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे एक सप्ताह से टहलना बंद कर दिया है।
फोटो नंबर 33-गीता मिश्रा। स्रोत: स्वयं
पुराना नार्मल स्कूल कॉलोनी निवासी गीता मिश्रा ने बताया कि कॉलोनी से करीब 150 मीटर दूर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के पास नगर पालिका का कूड़ा डंपिंग सेंटर है। कर्मचारी यहां कूड़ा जलाते हैं, इसकी दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल होता है।
फोटो नंबर 34- श्रीराम। स्रोत: स्वयं
एबी नगर निवासी श्रीराम ने बताया कि नगर पालिका के सफाई कर्मचारी गली मोहल्लों में कूड़ा एकत्र करके उसे उठाना न पड़े इसलिए जलाते हैं। दुर्गंध और धुआं से लोग परेशान हो रहे हैं। शिकायत भी की गई लेकिन सुधार नहीं हुआ।
फोटो नंबर 35- सरदार कैप्टन सिंह। संवाद
गांधीनगर निवासी कैप्टन सिंह ने बताया कि शहर में कई स्थानों पर लगे कूड़े के ढेर ही नहीं, कर्मचारी नियमों की अनदेखी करके कंटेनरों में भरा कूड़ा भी जला देते हैं।लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पर लोक लगानी चाहिए।