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Unnao News: बिजली विभाग में हर कदम पर लूट
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उन्नाव। बिजली विभाग में हर कदम पर लूट है। हर काम के रेट तय हैं। मीटर लगाने से लेकर सीलिंग देने और रीडिंग से लेकर बिल का सेटलमेंट कराने तक में पैसा देना होता है। यहां तक की तार जुड़वाने तक में बिना पैसा दिए काम नहीं होता।
नए कनेक्शन की रसीद कटने के बाद घरों, दुकानों व फैक्ट्रियों में मीटर लगाया जाता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि मीटर लगाने का काम प्राइवेट कर्मियों के जिम्मे होता है। इसका फायदा उठाकर यह प्राइवेट कर्मी उपभोक्ताओं से मीटर लगाने के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। नया मीटर लगाने के बाद तीन से पांच सौ रुपये और सीलिंग सर्टिफिकेट देने पर प्रति उपभोक्ता से 200 रुपये तक अवैध रूप से वसूलते हैं। प्राइवेट कर्मी इसे सरकारी फीस बताते हैं और उपभोक्ताओं से पैसा लेते हैं। जब उपभोक्ता इसकी रसीद मांगते हैं तो दूसरे दिन आकर देने की बात कहकर निकल जाते हैं। यदि कोई उपभोक्ता पैसा देने से मना कर देता है तो न तो उसके घर में मीटर लग पाता है और न ही उसे सीलिंग सर्टिफिकेट मिलता है।
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कनेक्शन और रीडिंग के नाम पर भी होती वसूली
यहां पर बिजली कनेक्शन से लेकर रीडिंग कम-ज्यादा करने के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती है। एक किलोवाट के कनेक्शन के लिए 3500 रुपये तक वसूले जाते हैं। जबकि रसीद कम की कटती है। बिजली कर्मचारियों व फ्रेंचाइजी की सांठगांठ से अवैध वसूली का धंधा खूब जोरों के साथ चल रहा है। इसके अलावा कामर्शियल दुकानदारों से रीडिंग के नाम पर वसूली की जाती है। पहले भारी भरकम बिल दिया जाता है। फिर सेटलमेंट के जरिए सौदेबाजी की जाती है। दुकानदारों के सहमति जताने पर मीटर जलने की 1912 नंबर पर शिकायत कराते हैं। इसके बाद मीटर बदलकर बिल संशोधित थमाकर वसूली की जाती है। इसके अलावा यदि उपभोक्ता के घर या दुकान का तार टूट जाता है। पोल से समस्या आती है तो शिकायत करने के बाद भी लाइनमैन फिर पैसा लिए तार नहीं जोड़ता है।
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सरकारी नंबरों पर किए जाने वाले फोन नहीं उठाते अधिकारी
बिजली विभाग को शासन ने सीयूजी नंबर आवंटित किए हैं। इसका मकसद किसी भी समस्या पर लोग सीधे नंबरों पर फोन करके संपर्क कर सकें लेकिन विभागीय अधिकारी पूरी तरह से निरंकुश हो गए हैं। विभागीय के सबसे बडे अधिकारी से लेकर जेई और उपकेंद्र तक के फोन नहीं उठाए जाते हैं। कार्यालय में शिकायतें लेकर पहुंचने वाले उपभोक्ताओं से अधिकारी गलत ढंग से बात करते हैं। बड़ी बात यह है कि बिजली विभाग के अधिकारी प्रशासनिक अफसरों और यहां तक की मंत्री तक के आदेश नहीं मानते हैं। ऐसे ही एक मामले में प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह के 17 सितंबर को रऊकरना में लगाई चौपाल तक में पहुंचने की जहमत अधिकारी नहीं उठा सके थे। जिस पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद कार्रवाई के नाम पर केवल अवर अभियंता का क्षेत्र ही बदला गया था। एसडीओ व एक्सईएन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
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नए कनेक्शन की रसीद कटने के बाद घरों, दुकानों व फैक्ट्रियों में मीटर लगाया जाता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि मीटर लगाने का काम प्राइवेट कर्मियों के जिम्मे होता है। इसका फायदा उठाकर यह प्राइवेट कर्मी उपभोक्ताओं से मीटर लगाने के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। नया मीटर लगाने के बाद तीन से पांच सौ रुपये और सीलिंग सर्टिफिकेट देने पर प्रति उपभोक्ता से 200 रुपये तक अवैध रूप से वसूलते हैं। प्राइवेट कर्मी इसे सरकारी फीस बताते हैं और उपभोक्ताओं से पैसा लेते हैं। जब उपभोक्ता इसकी रसीद मांगते हैं तो दूसरे दिन आकर देने की बात कहकर निकल जाते हैं। यदि कोई उपभोक्ता पैसा देने से मना कर देता है तो न तो उसके घर में मीटर लग पाता है और न ही उसे सीलिंग सर्टिफिकेट मिलता है।
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कनेक्शन और रीडिंग के नाम पर भी होती वसूली
यहां पर बिजली कनेक्शन से लेकर रीडिंग कम-ज्यादा करने के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती है। एक किलोवाट के कनेक्शन के लिए 3500 रुपये तक वसूले जाते हैं। जबकि रसीद कम की कटती है। बिजली कर्मचारियों व फ्रेंचाइजी की सांठगांठ से अवैध वसूली का धंधा खूब जोरों के साथ चल रहा है। इसके अलावा कामर्शियल दुकानदारों से रीडिंग के नाम पर वसूली की जाती है। पहले भारी भरकम बिल दिया जाता है। फिर सेटलमेंट के जरिए सौदेबाजी की जाती है। दुकानदारों के सहमति जताने पर मीटर जलने की 1912 नंबर पर शिकायत कराते हैं। इसके बाद मीटर बदलकर बिल संशोधित थमाकर वसूली की जाती है। इसके अलावा यदि उपभोक्ता के घर या दुकान का तार टूट जाता है। पोल से समस्या आती है तो शिकायत करने के बाद भी लाइनमैन फिर पैसा लिए तार नहीं जोड़ता है।
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सरकारी नंबरों पर किए जाने वाले फोन नहीं उठाते अधिकारी
बिजली विभाग को शासन ने सीयूजी नंबर आवंटित किए हैं। इसका मकसद किसी भी समस्या पर लोग सीधे नंबरों पर फोन करके संपर्क कर सकें लेकिन विभागीय अधिकारी पूरी तरह से निरंकुश हो गए हैं। विभागीय के सबसे बडे अधिकारी से लेकर जेई और उपकेंद्र तक के फोन नहीं उठाए जाते हैं। कार्यालय में शिकायतें लेकर पहुंचने वाले उपभोक्ताओं से अधिकारी गलत ढंग से बात करते हैं। बड़ी बात यह है कि बिजली विभाग के अधिकारी प्रशासनिक अफसरों और यहां तक की मंत्री तक के आदेश नहीं मानते हैं। ऐसे ही एक मामले में प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह के 17 सितंबर को रऊकरना में लगाई चौपाल तक में पहुंचने की जहमत अधिकारी नहीं उठा सके थे। जिस पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद कार्रवाई के नाम पर केवल अवर अभियंता का क्षेत्र ही बदला गया था। एसडीओ व एक्सईएन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।