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पत्नी की हत्या में पति को उम्रकैद
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उन्नाव। पत्नी को गोली मारकर हत्या करने वाले पति को न्यायालय ने आजीवन कारावास व 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। संतान न होने व पत्नी द्वारा संपत्ति अपने भतीजे को देने की इच्छा जताने पर हुए विवाद में पति ने हत्या की थी।
अजगैन थाना क्षेत्र के कुईथर गांव निवासी रामशंकर ने 29 अगस्त 2015 को आसीवन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आसीवन थाना क्षेत्र के गांव भगवानदीन खेड़ा के मजरा पमेधिया निवासी उसके बहनोई रामसेवक ने अपनी पत्नी (रामशंकर की बहन) माया देवी (55) की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतका माया देवी के भाई रामशंकर ने आरोप लगाया कि घटना से करीब 35 वर्ष पहले बहन की शादी हुई थी। लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी। माया अपनी संपत्ति उसके (भाई रामशंकर) बेटे प्रिंस को देना चाहती थी। इस बात पर पति रामसेवक ने 28 अगस्त 2015 को देर रात विवाद के दौरान ही माया देवी को गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने विवेचना के बाद हत्यारोपी पति रामसवेक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नं 6 में चल रही थी। गुरुवार को अंतिम सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एहसानुउल्लाह खान ने अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे सरकारी वकील प्रेमचंद्र की दलीलों को सही ठहराया। न्यायाधीश ने रामसेवक को पत्नी की हत्या का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने दोषी पर 30 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड से 20 हजार रुपये प्रतिकर के तौर पर देने का आदेश दिया है।
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अजगैन थाना क्षेत्र के कुईथर गांव निवासी रामशंकर ने 29 अगस्त 2015 को आसीवन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आसीवन थाना क्षेत्र के गांव भगवानदीन खेड़ा के मजरा पमेधिया निवासी उसके बहनोई रामसेवक ने अपनी पत्नी (रामशंकर की बहन) माया देवी (55) की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतका माया देवी के भाई रामशंकर ने आरोप लगाया कि घटना से करीब 35 वर्ष पहले बहन की शादी हुई थी। लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी। माया अपनी संपत्ति उसके (भाई रामशंकर) बेटे प्रिंस को देना चाहती थी। इस बात पर पति रामसेवक ने 28 अगस्त 2015 को देर रात विवाद के दौरान ही माया देवी को गोली मारकर हत्या कर दी।
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पुलिस ने विवेचना के बाद हत्यारोपी पति रामसवेक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नं 6 में चल रही थी। गुरुवार को अंतिम सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एहसानुउल्लाह खान ने अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे सरकारी वकील प्रेमचंद्र की दलीलों को सही ठहराया। न्यायाधीश ने रामसेवक को पत्नी की हत्या का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने दोषी पर 30 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड से 20 हजार रुपये प्रतिकर के तौर पर देने का आदेश दिया है।
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