{"_id":"61f8203b991768602c16774a","slug":"kanpur-lucknow-highway-becomes-jarjar-unnao-news-knp6781622172","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर-लखनऊ हाईवे जर्जर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर-लखनऊ हाईवे जर्जर
विज्ञापन
लखनऊ कानपुर हाइवे की खस्ताहाल सड़क। संवाद
- फोटो : UNNAO
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। लखनऊ-कानपुर राजमार्ग (एनएच-25) पर हुए गड्ढे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहे हैं। 65 किमी लंबाई में करीब 225 गड्ढे हैं। हर 10 से 20 मीटर की दूरी पर जानलेवा गड्ढे के कारण आवागमन दूभर है। इसके अलावा गड्ढों में भारी वाहनों के फंसकर खराब होने से आए दिन जाम की समस्या से भी राहगीरों को जूझना पड़ता है। घंटों जाम में फंसने से उनका समय भी बर्बाद होता है।
लखनऊ-कानपुर हाईवे के चौड़ीकरण के सात साल बीतने के बाद भी इस पर सुरक्षित सफर और समय की बचत का सपना अधूरा ही रह गया है। उन्नाव क्षेत्र में जाजमऊ से लेकर लखनऊ बनी बार्डर तक कई स्थानों पर हाईवे की सड़क इस कदर जर्जर है कि लगभग हर रोज कोई न कोई हादसा होता है। दही, सोनिक, नवाबगंज, अजगैन, सोहरामऊ, गदनखेड़ा, आजाद मार्ग, जाजमऊ सहित कई स्थानों पर टूटी सड़क और गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गए हैं। तेज रफ्तार वाहन चालक गड्ढे से बचने के लिए ब्रेक लगाते हैं और पीछे से आ रहे वाहन उनसे टकरा जाते हैं। कई बार गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। दुर्घटनाओं के कारण इस मार्ग पर अक्सर घंटों जाम लगता है।
टोल पर होती लाखों की वसूली
नवाबगंज में संचालित टोल प्लाजा पर प्रतिदिन चार पहिया वाहनों से 20 से 25 लाख रुपये की वसूली होती है। टोल वसूलने वाली कंपनी की यह है जिम्मेदारी है कि सड़क की समय-समय पर मरम्मत कराकर लोगों के लिए सुलभ आवागमन की व्यवस्था कराए। लेकिन इसके बाद भी कंपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही है।
विज्ञापन
व्यापारियों ने बताई समस्या
व्यापारी गुरुचरण साहू का कहना है कि वर्तमान में हाईवे कस्बे की सड़क से भी बेकार है। टोल प्रबंधन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
व्यापारी वासु मानिक ने बताया कि लखनऊ से कानपुर तक हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इन गड्ढों के कारण वाहन खराब हो जाते हैं। सफर मुश्किल भरा होता है। टोल कंपनी वसूली तो कर रही है लेकिन सुविधाएं नहीं दे रही है।
वर्जन
जल्द ही गड्ढे भरवाने का कार्य शुरू किया जाएगा। बीते दिनों हुई बारिश के कारण अभियान शुरू नहीं हो सका है। जर्जर स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है। - आरके चतुर्वेदी, उपमहाप्रबंधक पीएनसी कंपनी।
विज्ञापन
लखनऊ-कानपुर हाईवे के चौड़ीकरण के सात साल बीतने के बाद भी इस पर सुरक्षित सफर और समय की बचत का सपना अधूरा ही रह गया है। उन्नाव क्षेत्र में जाजमऊ से लेकर लखनऊ बनी बार्डर तक कई स्थानों पर हाईवे की सड़क इस कदर जर्जर है कि लगभग हर रोज कोई न कोई हादसा होता है। दही, सोनिक, नवाबगंज, अजगैन, सोहरामऊ, गदनखेड़ा, आजाद मार्ग, जाजमऊ सहित कई स्थानों पर टूटी सड़क और गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गए हैं। तेज रफ्तार वाहन चालक गड्ढे से बचने के लिए ब्रेक लगाते हैं और पीछे से आ रहे वाहन उनसे टकरा जाते हैं। कई बार गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। दुर्घटनाओं के कारण इस मार्ग पर अक्सर घंटों जाम लगता है।
विज्ञापन
टोल पर होती लाखों की वसूली
नवाबगंज में संचालित टोल प्लाजा पर प्रतिदिन चार पहिया वाहनों से 20 से 25 लाख रुपये की वसूली होती है। टोल वसूलने वाली कंपनी की यह है जिम्मेदारी है कि सड़क की समय-समय पर मरम्मत कराकर लोगों के लिए सुलभ आवागमन की व्यवस्था कराए। लेकिन इसके बाद भी कंपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही है।
विज्ञापन
व्यापारियों ने बताई समस्या
व्यापारी गुरुचरण साहू का कहना है कि वर्तमान में हाईवे कस्बे की सड़क से भी बेकार है। टोल प्रबंधन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
व्यापारी वासु मानिक ने बताया कि लखनऊ से कानपुर तक हाईवे पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इन गड्ढों के कारण वाहन खराब हो जाते हैं। सफर मुश्किल भरा होता है। टोल कंपनी वसूली तो कर रही है लेकिन सुविधाएं नहीं दे रही है।
वर्जन
जल्द ही गड्ढे भरवाने का कार्य शुरू किया जाएगा। बीते दिनों हुई बारिश के कारण अभियान शुरू नहीं हो सका है। जर्जर स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है। - आरके चतुर्वेदी, उपमहाप्रबंधक पीएनसी कंपनी।