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सैकड़ों बीघे धान डूबा
अमर उजाला ब्यूरो उन्नाव
Updated Tue, 03 Nov 2015 12:19 AM IST
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शारदा नहर की पुरवा ब्रांच में ज्यादा पानी छोड़े जाने व नहर की पटरी कम चौड़ी होने से पांच दिन बाद फिर नहर की खांदी कट गई। इससे सैकड़ों बीघे धान की कटी व खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई। इससे गरीब किसानों के परिवार पालने को लेकर संकट आ गया है।
विकास खंड के गांव घूरखेत व बिछिया में इन दिनों नहर का कहर किसानों पर भारी पड़ रहा है। रविवार रात पुरवा ब्रांच की नहर की खांदी अचानक दोनों गांव के बीच कटने से पानी का बहाव तेज हो गया। इससे सैकड़ों गरीब किसानों की धान की फसल जलमग्र हो गई।
सुबह अपने खेतों की ओर निकले किसान यह देख कर सन्न रह गए। इसके बाद किसान खुद टूटी नहर बांधने में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद जब नहर को नहीं बांधा जा सका तो सभी ने चंदा कर जेसीबी मंगवाई। इससे नहर को बांधा जा सका।
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गांव के किसानों पप्पू यादव, उमाशंकर, गंगाराम, अशोक, शिववरन, राजू यादव, सूरज कुमार रावत, आशीष और विकास ने बताया क्षेत्रीय लेखपाल को इसकी जानकारी दी गई लेकिन दोपहर तक कोई विभागीय कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
एक सप्ताह पहले इसी ब्रांच की नहर के मद्दीखेड़ा गांव के पास कट जाने से सैकड़ों बीघे धान की फसल डूब गई थी। किसानों की माने तो मामले की जानकारी जिले के अफसरों को दी जाती है फिर नहर का बहावबंद किया जाता है। इसका परिणाम गरीब किसानों को भुगतना पड़ता है। नहर विभाग के क्षेत्रीय जेई केके ने बताया उन्हे नहर की खांदी कटने की कोई जानकारी नहीं है।
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विकास खंड के गांव घूरखेत व बिछिया में इन दिनों नहर का कहर किसानों पर भारी पड़ रहा है। रविवार रात पुरवा ब्रांच की नहर की खांदी अचानक दोनों गांव के बीच कटने से पानी का बहाव तेज हो गया। इससे सैकड़ों गरीब किसानों की धान की फसल जलमग्र हो गई।
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सुबह अपने खेतों की ओर निकले किसान यह देख कर सन्न रह गए। इसके बाद किसान खुद टूटी नहर बांधने में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद जब नहर को नहीं बांधा जा सका तो सभी ने चंदा कर जेसीबी मंगवाई। इससे नहर को बांधा जा सका।
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गांव के किसानों पप्पू यादव, उमाशंकर, गंगाराम, अशोक, शिववरन, राजू यादव, सूरज कुमार रावत, आशीष और विकास ने बताया क्षेत्रीय लेखपाल को इसकी जानकारी दी गई लेकिन दोपहर तक कोई विभागीय कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
एक सप्ताह पहले इसी ब्रांच की नहर के मद्दीखेड़ा गांव के पास कट जाने से सैकड़ों बीघे धान की फसल डूब गई थी। किसानों की माने तो मामले की जानकारी जिले के अफसरों को दी जाती है फिर नहर का बहावबंद किया जाता है। इसका परिणाम गरीब किसानों को भुगतना पड़ता है। नहर विभाग के क्षेत्रीय जेई केके ने बताया उन्हे नहर की खांदी कटने की कोई जानकारी नहीं है।