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Unnao News: कैसे पीले होंगे बिटिया के हाथ, कर्ज अदायगी को लेकर चिंतित किसान
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फतेहपुर चौरासी। गंगा के तटवर्ती क्षेत्र के किसानों का गंगा की रेती में बोई जाने वाली जायद की फसल जीवकोपर्जन का प्रमुख साधन है। दो दिन पूर्व गंगा का जलस्तर बढ़ जाने से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई।
मंगलवार को जलस्तर तो स्थिर हो गया लेकिन फसलों में पानी कम नहीं हुआ है। गांव चिरंजूपुरवा के परशुराम, अर्जुन, महेश, सुरेश, रामकुमार, राघवेंद्र आदि किसानों ने बताया कि गंगा बढ़ने से काफी फसलें डूब गई हैं। जिससे किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। 50 हजार रुपये से अधिक एक बीघा में लागत आने से किसान कर्ज लेकर फसलें करते है
। फसलों के डूबने से जीविकोपार्जन के साथ कर्ज अदायगी की भी समस्या खड़ी हो गई है। चौगवां, मन्ना नगरी, चिरंजू पुरवा, सहरिया बंगला हिंदूपुर, गड़ाई, धन्नापुरवा, दबौली आदि गांव के किसानों को गंगा का जलस्तर बढ़ने से नुकसान हुआ है। बड़ी बात यह कि फसल नुकसान से किसान सदमे में हैं लेकिन उनकी सुध लेने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं उठाई।
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किसानों ने बताया कि फसल नुकसान होने के बाद न तो लेखपाल जांच करने आए और ना ही झांकने कोई अन्य अधिकारी तक पहुंचे। मामले की जानकारी के लिए एसडीएम बांगरमऊ नम्रता सिंह को फोन मिलाया गया लेकिन उन्होंने फोन उठाना तक जरुरी नहीं समझा। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि राजस्व कर्मियों को मौके पर भेजकर क्षति का आंकलन कराया जाएगा।
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किसानों की व्यथा
गांव मन्नानगरी के किसान गंगादीन ने बताया कि उन्होंने पांच बीघा गंगा की रेत में खरबूजा बोया था। गंगा के जलस्तर बढ़ने से सारी फसल डूब गई। एक बीघा खरबूजा की बुआई में करीब 50 हजार रुपये लागत आती है। फसल की बोआई के लिए बैंक से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिए थे। 11 जुलाई को बेटी की शादी है। खरबूजे की फसल से ही कर्ज अदायगी के साथ बेटी के हाथ पीले करने की उम्मीद पर गंगा के बढ़े जलस्तर ने सब किए कराए पर पानी फेर दिया।
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गांव मन्नानगरी के देवीदीन ने बताया कि बैंक से दो लाख रुपये कर्ज लेकर खरबूजा गंगा के रेत में बोया था। गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोत्तरी होने से दो बीघा फसल डूब गई। जिससे वहां काफी नुकसान हुआ है। वहीं कर्ज की अदायगी को लेकर चिंता है।
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मंगलवार को जलस्तर तो स्थिर हो गया लेकिन फसलों में पानी कम नहीं हुआ है। गांव चिरंजूपुरवा के परशुराम, अर्जुन, महेश, सुरेश, रामकुमार, राघवेंद्र आदि किसानों ने बताया कि गंगा बढ़ने से काफी फसलें डूब गई हैं। जिससे किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। 50 हजार रुपये से अधिक एक बीघा में लागत आने से किसान कर्ज लेकर फसलें करते है
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। फसलों के डूबने से जीविकोपार्जन के साथ कर्ज अदायगी की भी समस्या खड़ी हो गई है। चौगवां, मन्ना नगरी, चिरंजू पुरवा, सहरिया बंगला हिंदूपुर, गड़ाई, धन्नापुरवा, दबौली आदि गांव के किसानों को गंगा का जलस्तर बढ़ने से नुकसान हुआ है। बड़ी बात यह कि फसल नुकसान से किसान सदमे में हैं लेकिन उनकी सुध लेने की जिम्मेदारी किसी ने नहीं उठाई।
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किसानों ने बताया कि फसल नुकसान होने के बाद न तो लेखपाल जांच करने आए और ना ही झांकने कोई अन्य अधिकारी तक पहुंचे। मामले की जानकारी के लिए एसडीएम बांगरमऊ नम्रता सिंह को फोन मिलाया गया लेकिन उन्होंने फोन उठाना तक जरुरी नहीं समझा। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि राजस्व कर्मियों को मौके पर भेजकर क्षति का आंकलन कराया जाएगा।
किसानों की व्यथा
गांव मन्नानगरी के किसान गंगादीन ने बताया कि उन्होंने पांच बीघा गंगा की रेत में खरबूजा बोया था। गंगा के जलस्तर बढ़ने से सारी फसल डूब गई। एक बीघा खरबूजा की बुआई में करीब 50 हजार रुपये लागत आती है। फसल की बोआई के लिए बैंक से डेढ़ लाख रुपये कर्ज लिए थे। 11 जुलाई को बेटी की शादी है। खरबूजे की फसल से ही कर्ज अदायगी के साथ बेटी के हाथ पीले करने की उम्मीद पर गंगा के बढ़े जलस्तर ने सब किए कराए पर पानी फेर दिया।
गांव मन्नानगरी के देवीदीन ने बताया कि बैंक से दो लाख रुपये कर्ज लेकर खरबूजा गंगा के रेत में बोया था। गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोत्तरी होने से दो बीघा फसल डूब गई। जिससे वहां काफी नुकसान हुआ है। वहीं कर्ज की अदायगी को लेकर चिंता है।