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Unnao News: हाईवे और एक्सप्रेसवे के अस्पताल बदलहाल, मयखाने मालामाल

Tue, 04 Mar 2025 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Mar 2025 12:15 AM IST
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Hospitals on highways and expressways are in a bad shape, bars are flourishing
हाईवे पर खुले शराब ठेके के बाहर जमा लोग।  - फोटो : हाईवे पर खुले शराब ठेके के बाहर जमा लोग।
उन्नाव। एक तरफ सरकार हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे नए अस्पताल बनाने और शराब की दुकानें हटाने पर जोर दे रही है। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी आवास में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में भी अफसरों को इससे जुड़े दिशा-निर्देश दिए। हकीकत जानने के लिए जब पड़ताल की गई तो जिले में दोनों हाईवे और एक्सप्रेसवे के आसपास की सीएचसी, पीएचसी और ट्राॅमा सेंटर बदहाल मिले। कहीं, पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं तो कहीं जांचें ही ठप हैं। यही वजह है कि यह अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। सीएचसी से जिला अस्पताल और फिर कानपुर हैलट और लखनऊ मेडिकल कॉलेज या ट्राॅमा सेंटर के चक्कर लगाने और समय पर समुचित इलाज न मिलने से सड़क हादसों में घायलों की जान जा रही है। (संवाद)
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लखनऊ-कानपुर हाईवे
उन्नाव/नवाबगंज। 82 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर हाईवे पर जिला अस्पताल के अलावा नवाबगंज सीएचसी है। हादसों में घायल होने वाले लोगों को इन्हीं अस्पतालों में पहुंचाया जाता है। नवाबगंज सीएचसी में अस्थि रोग विशेषज्ञ और जरूरी उपकरण न होने से घायलों को देखते ही जिला अस्पताल और वहां से कानपुर भेज दिया जाता है। सीएचसी से लखनऊ सीमा 12 किलोमीटर और जिला अस्पताल 22 किलोमीटर है। इस दौरान गंभीर घायलों को समय पर इलाज न मिलने से मौत भी हो जाती है। इस सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन भी शोपीस बनी है। वहीं जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में पर्याप्त डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ न होने से हैलट रेफर करने की मजबूरी रहती है। वहीं, दूसरी ओर इस हाईवे के किनारे 24 स्थानों पर शराब की दुकानें खुली हुई हैं। सीएमएस डॉ. आरए मिर्जा का कहना है कि ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों की तैनाती के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा गया है। ट्रामा सेंटर का संचालन शुरू होने पर मरीजों को हैलट नहीं रेफर करना पड़ेगा।
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उन्नाव-रायबरेली हाईवे

अचलगंज/बीघापुर। उन्नाव- रायबरेली हाइवे पर बीघापुर स्थित 100 बेड के अस्पताल में शासन की ओर से 28 जून 2023 को चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके रमन की तैनाती की गई थी। इसके चार दिन बाद नौ पुरुष डॉक्टर और तीन महिला डॉक्टर सहित 15 पैरामेडिकल स्टॉफ की भी तैनाती कर दी गई थी। इसके बाद ओपीडी तो शुरू हो गई। लेकिन संसाधन न होने से लोगों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीबीसी सहित अन्य जांच मशीनें नहीं हैं। इससे डॉक्टर केवल संभावना के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके अलावा अचलगंज स्थित सीएचसी में एक्सरे सुविधा है। लेकिन अस्थि रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। वहीं, इस हाईवे के किनारे 22 जगहों पर शराब की दुकानें हैं। सीएमएस डॉ. आरके रमन ने बताया कि जिला मुख्यालय में तीन बार पत्राचार किया गया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। (संवाद)
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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे
औरास/बांगरमऊ। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे औरास स्थित सीएचसी में इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं हैं। दुर्घटना में घायल मरीजों की केवल मरहम पट्टी करके जिला अस्पताल या लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। यहां लगा ऑक्सीजन प्लांट दो महीने से खराब पड़ा है। इंचार्ज फार्मासिस्ट प्रेम कुमार ने बताया कि प्लांट खराब होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जाएगी। इसके अलावा हेल्थ एटीएम भी बंद पड़ा है। यह केवल नाम की सीएचसी,यहां सुविधाएं शून्य हैं। इसके अलावा बांगरमऊ सीएचसी में भी इलाज के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती है। यहां केवल एक्सरे सुविधा है। विशेषज्ञ डॉक्टर व संसाधन न होने मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉ.मुकेश ने बतााया कि जांच सुविधा व डॉक्टरों की तैनाती की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई। (संवाद)

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बोले जिम्मेदार
शहर में बनने वाली सीसीबी को पहले शहर के अंदर बनाने की योजना थी। जानकारी होने पर उसे लखनऊ-कानपुर हाईवे पर स्टेडियम के पास जमीन चिह्नित करके निर्माण शुरू कराया गया है। इससे हाईवे पर हादसों में घायल होने वालों को तत्काल बेहतर इलाज मिल सकेगा। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के पास बांगरमऊ में एक ट्राॅमा सेंटर बनाने की योजना है। चौराहे के पास जमीन चिह्नित की गई है और प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जिला अस्पताल परिसर में स्थित ट्राॅमा सेंटर में भी स्टॉफ की तैनाती के लिए शासन को फिर पत्र भेजा है।
- गौरांग राठी, जिलाधिकारी उन्नाव
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अभी तक के नियमों के अनुसार हाईवे की सड़क से 220 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान खोली जा सकती हैं। वहीं, नगरीय क्षेत्रों में दूरी का मानक लागू नहीं है। इन्हीं नियमों के अनुसार देसी, अंग्रेजी और बीयर की दुकानें संचालित हैं। शासन का कोई नया आदेश नहीं नहीं मिला है। जो भी आदेश होगा उसका अनुपालन कराया जाएगा।
- रविशंकर, जिला आबकारी अधिकारी उन्नाव
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जिले में सड़क हादसों पर एक नजर

वर्ष-हादसे-मौत-घायल
2020-634-475-424
2021-844-515-568
2022-875-510-557
2023-868-478-721
2024-919-537-772
2025-157-103-117
नोट-2025 के आंकड़े फरवरी तक के हैं।
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