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सूखे में मिला ठेंगा, ओलावृष्टि व बारिश में भगवान ही मालिक
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Wed, 08 Apr 2015 12:51 AM IST
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उन्नाव। खरीफ सीजन में पड़े सूखे के दौरान जिला प्रशासन द्वारा शासन को भेजे गए करोड़ों रुपये के नुकसान में अन्नदाता को राहत के नाम पर एक भी धेला नहीं मिला है।
वहीं रबी सीजन में ओलावृष्टि व बारिश से तबाह हुई फसलों के नुकसान के एवज में प्रदेश सरकार ने जो राशि जारी की है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अन्नदाता के आंसू पोंछने के लिए न तो प्रदेश सरकार ही सामने आई है और ना ही बीमा कंपनी।
वर्ष 2014 में खरीफ सीजन में भीषण सूखा पड़ा था। धान व अन्य फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई थीं। शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने सूखे से हुए नुकसान का सर्वे कराया था। इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई उसमें 4526.83 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के लिए मांगे गए थे।
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रिपोर्ट में 64669 हेक्टेअर में बोई गई फसलों को नुकसान पहुंचना दिखाया गया था। सूखे से लगभग सात हजार किसान प्रभावित बताए गए थे।
कलेक्ट्रेट सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट अगस्त/सितम्बर माह में शासन को भेजी गई थी। तबसे आज तक लगभग सात माह बीतने को हैं। प्रदेश सरकार ने सूखे से राहत देने के लिए मांगे गए 45 करोड़ रुपये में से एक भी पैसा नहीं दिया है। मुआवजे की आस में किसानों की आंखें पथरा गईं। बैंकों से लिया गया कर्जा भी माफ नहीं किया गया। शासन की इस ‘बेरुखी’ से किसानों को तगड़ा झटका लगा।
इधर, प्रकृति ने फिर अन्नदाता पर कहर ढाया। बेमौसम की ओलावृष्टि व बारिश से रबी सीजन की फसलों को तगड़ा नुकसान पहुंचा। एक बार फिर जिला प्रशासन से सर्वे कराया। नुकसान लगभग 15 करोड़ का सामने आया। शासन ने इस रकम के एवज में मात्र 6 करोड़ रुपये ही जारी किए। ऐसे में किसानों को मुआवजे के लिए जो राशि मिल रही है उससे एक माह का राशन नहीं मिल पा रहा है।
फसलों के नुकसान की भरपाई की तो बात छोड़िए। सूखा प्रभावित किसानों को बीमा कंपनी से भी ठेंगा मिला। सूखा पड़ने के महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक कंपनी ने फसल बीमा का लाभ नहीं दिया है।
इधर, ओलावृष्टि व बारिश से हुए नुकसान में भी बीमा कंपनी द्वारा अभी सर्वे पूरा नहीं किया गया है। ऐसे में रबी सीजन में तबाह हुई फसलों की बीमा राशि कब मिलेगी इसका जवाब भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है।
शासन, प्रशासन और बीमा कंपनी ने अन्नदाता को ठगा
शासन, प्रशासन और बीमा कंपनी के बीच की इस नूराकुश्ती में अन्नदाता ठगा गया। खरीफ सीजन के नुकसान में अन्नदाता को राहत दिए जाने के मामले में जिला प्रशासन, अग्रणी बैंक प्रबंधक व बीमा कंपनी के जिला प्रभारी अपनी ढपली, अपना राग अलाप रहे हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि तीनों में कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ।
वहीं, सात माह बीतने को हैं सूखा के नाम पर एक पैसा भी हाथ में नहीं पहुंचा।
यहां यहां गौर करने वाली बात यह है कि रविवार को जनपद दौरे पर आए केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने सूखे के समय प्रदेश को 744 करोड़ रुपये जारी करने की जानकारी दी थी। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री को कुछ किसानों ने सूखा राहत के नाम पर फूटी कौड़ी न मिलने की बात बताई थी। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार ये करोड़ोें रुपये कहां गए। सूखे में धेला नहीं मिला और ओलावृष्टि व बारिश से कितना मिलेगा इसका जवाब तो आने वाले समय में मिलेगा।
1-रिलाइंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के जिला प्रभारी विनय गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार ने राज्यस्तर पर जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया। जिस कारण किसी प्रकार का भुगतान करने से कंपनी ने मना कर दिया। हां, फसल कटाई के बाद हुए सर्वे में क्राप कटिंग के आधार पर कंपनी ने लगभग एक करोड़ 60 लाख रुपये जारी किए हैं। जो जल्द ही किसानों को दिया जाएगा।
2- अग्रणी बैंक के जिला प्रबन्धक राजेश राबर्ट ने भी बीमा कंपनी के प्रभारी की बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सूखे से फसलों का 50 प्रतिशत कम नुकसान हुआ था। इसी आधार पर शासन ने भी पैसा जारी नहीं किया और बीमा कंपनी ने भी बीमित फसल का पूरा पैसा देने से साफ इंकार कर दिया।
3- जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल का कहना है कि शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया था। इसका शासनादेश उनके पास है। अभी तक मुआवजा राशि क्यों नहीं दी गई इस सवाल के जवाब में डीएम ने कहा कि इसकी उनको जानकारी नहीं है।
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वहीं रबी सीजन में ओलावृष्टि व बारिश से तबाह हुई फसलों के नुकसान के एवज में प्रदेश सरकार ने जो राशि जारी की है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अन्नदाता के आंसू पोंछने के लिए न तो प्रदेश सरकार ही सामने आई है और ना ही बीमा कंपनी।
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वर्ष 2014 में खरीफ सीजन में भीषण सूखा पड़ा था। धान व अन्य फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई थीं। शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने सूखे से हुए नुकसान का सर्वे कराया था। इसके बाद जिलाधिकारी द्वारा शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई उसमें 4526.83 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के लिए मांगे गए थे।
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रिपोर्ट में 64669 हेक्टेअर में बोई गई फसलों को नुकसान पहुंचना दिखाया गया था। सूखे से लगभग सात हजार किसान प्रभावित बताए गए थे।
कलेक्ट्रेट सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट अगस्त/सितम्बर माह में शासन को भेजी गई थी। तबसे आज तक लगभग सात माह बीतने को हैं। प्रदेश सरकार ने सूखे से राहत देने के लिए मांगे गए 45 करोड़ रुपये में से एक भी पैसा नहीं दिया है। मुआवजे की आस में किसानों की आंखें पथरा गईं। बैंकों से लिया गया कर्जा भी माफ नहीं किया गया। शासन की इस ‘बेरुखी’ से किसानों को तगड़ा झटका लगा।
इधर, प्रकृति ने फिर अन्नदाता पर कहर ढाया। बेमौसम की ओलावृष्टि व बारिश से रबी सीजन की फसलों को तगड़ा नुकसान पहुंचा। एक बार फिर जिला प्रशासन से सर्वे कराया। नुकसान लगभग 15 करोड़ का सामने आया। शासन ने इस रकम के एवज में मात्र 6 करोड़ रुपये ही जारी किए। ऐसे में किसानों को मुआवजे के लिए जो राशि मिल रही है उससे एक माह का राशन नहीं मिल पा रहा है।
फसलों के नुकसान की भरपाई की तो बात छोड़िए। सूखा प्रभावित किसानों को बीमा कंपनी से भी ठेंगा मिला। सूखा पड़ने के महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक कंपनी ने फसल बीमा का लाभ नहीं दिया है।
इधर, ओलावृष्टि व बारिश से हुए नुकसान में भी बीमा कंपनी द्वारा अभी सर्वे पूरा नहीं किया गया है। ऐसे में रबी सीजन में तबाह हुई फसलों की बीमा राशि कब मिलेगी इसका जवाब भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है।
शासन, प्रशासन और बीमा कंपनी ने अन्नदाता को ठगा
शासन, प्रशासन और बीमा कंपनी के बीच की इस नूराकुश्ती में अन्नदाता ठगा गया। खरीफ सीजन के नुकसान में अन्नदाता को राहत दिए जाने के मामले में जिला प्रशासन, अग्रणी बैंक प्रबंधक व बीमा कंपनी के जिला प्रभारी अपनी ढपली, अपना राग अलाप रहे हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि तीनों में कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ।
वहीं, सात माह बीतने को हैं सूखा के नाम पर एक पैसा भी हाथ में नहीं पहुंचा।
यहां यहां गौर करने वाली बात यह है कि रविवार को जनपद दौरे पर आए केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने सूखे के समय प्रदेश को 744 करोड़ रुपये जारी करने की जानकारी दी थी। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री को कुछ किसानों ने सूखा राहत के नाम पर फूटी कौड़ी न मिलने की बात बताई थी। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार ये करोड़ोें रुपये कहां गए। सूखे में धेला नहीं मिला और ओलावृष्टि व बारिश से कितना मिलेगा इसका जवाब तो आने वाले समय में मिलेगा।
1-रिलाइंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के जिला प्रभारी विनय गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार ने राज्यस्तर पर जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया। जिस कारण किसी प्रकार का भुगतान करने से कंपनी ने मना कर दिया। हां, फसल कटाई के बाद हुए सर्वे में क्राप कटिंग के आधार पर कंपनी ने लगभग एक करोड़ 60 लाख रुपये जारी किए हैं। जो जल्द ही किसानों को दिया जाएगा।
2- अग्रणी बैंक के जिला प्रबन्धक राजेश राबर्ट ने भी बीमा कंपनी के प्रभारी की बात का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सूखे से फसलों का 50 प्रतिशत कम नुकसान हुआ था। इसी आधार पर शासन ने भी पैसा जारी नहीं किया और बीमा कंपनी ने भी बीमित फसल का पूरा पैसा देने से साफ इंकार कर दिया।
3- जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल का कहना है कि शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया था। इसका शासनादेश उनके पास है। अभी तक मुआवजा राशि क्यों नहीं दी गई इस सवाल के जवाब में डीएम ने कहा कि इसकी उनको जानकारी नहीं है।