{"_id":"5cdc6113bdec2206fc126547","slug":"gangrape-s-case-over-five-including-village-head","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्राम प्रधान समेत पांच पर गैंगरेप का मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्राम प्रधान समेत पांच पर गैंगरेप का मुकदमा
Thu, 16 May 2019 12:27 AM IST
संतोष भदौरिया
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Published by: संतोष भदौरिया
Updated Thu, 16 May 2019 12:27 AM IST
विज्ञापन
court order
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। किशोरी से गैंगरेप व उसे बेचने की कोशिश के आरोप में कोर्ट ने बारासगवर के गढ़ेवा निवासी ग्राम प्रधान समेत पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। बारासगवर थानाध्यक्ष अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कोर्ट के आदेश पर पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना की जाएगी।
तहरीर के मुताबिक बारासगवर के एक गांव निवासी किशोरी का आरोप है कि गढ़ेवा निवासी प्रधान ने 2015 में (तब प्रधान नहीं था) उससे दुष्कर्म किया था। तब उसकी उम्र 16 साल थी। मामले को छिपाने के लिए उसे जबरन बांदा के तिंदवारी में एक युवक के सुपुर्द कर दिया गया था। पीड़िता की मां को जब घटना की जानकारी मिली तो उसने पुलिस को तहरीर दी थी। जिसके बाद आरोपी ने किशोरी को बांदा से बुला लिया। आरोपी के घर पर ही दो युवकों ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने बाद में उसे कई जगह बेचने की कोशिश की। हालांकि इसमें सफल न होने पर उन्होंने उसे कौशांबी निवासी एक युवक के सुपुर्द कर दिया। दो साल तक युवक ने उसे घर में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसने दो बच्चों को जन्म भी दिया। किसी तरह पीड़िता कौशांबी से वापस अपने घर पहुंची।
जहां उसने कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस पर उसने अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट अष्टम की शरण ली। न्यायालय ने गढ़ेवा निवासी मौजूदा ग्राम प्रधान योगेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, बारासगवर के चंदनपुर निवासी रामशंकर उर्फ मुंशी, बांदा जिले के तिंदवारी निवासी राजू सिंह व कौशांबी के महेवाघाट निवासी भोला के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
आदेश को फाइल में दबाए रहे थानाध्यक्ष
न्यायालय ने किशोरी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश 26 अप्रैल को दिया था, लेकिन बारासगवर थानाध्यक्ष ने उसे फाइलों में दबाकर रख दिया। रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़िता ने दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
विज्ञापन
तहरीर के मुताबिक बारासगवर के एक गांव निवासी किशोरी का आरोप है कि गढ़ेवा निवासी प्रधान ने 2015 में (तब प्रधान नहीं था) उससे दुष्कर्म किया था। तब उसकी उम्र 16 साल थी। मामले को छिपाने के लिए उसे जबरन बांदा के तिंदवारी में एक युवक के सुपुर्द कर दिया गया था। पीड़िता की मां को जब घटना की जानकारी मिली तो उसने पुलिस को तहरीर दी थी। जिसके बाद आरोपी ने किशोरी को बांदा से बुला लिया। आरोपी के घर पर ही दो युवकों ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने बाद में उसे कई जगह बेचने की कोशिश की। हालांकि इसमें सफल न होने पर उन्होंने उसे कौशांबी निवासी एक युवक के सुपुर्द कर दिया। दो साल तक युवक ने उसे घर में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसने दो बच्चों को जन्म भी दिया। किसी तरह पीड़िता कौशांबी से वापस अपने घर पहुंची।
विज्ञापन
जहां उसने कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस पर उसने अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट अष्टम की शरण ली। न्यायालय ने गढ़ेवा निवासी मौजूदा ग्राम प्रधान योगेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, बारासगवर के चंदनपुर निवासी रामशंकर उर्फ मुंशी, बांदा जिले के तिंदवारी निवासी राजू सिंह व कौशांबी के महेवाघाट निवासी भोला के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
आदेश को फाइल में दबाए रहे थानाध्यक्ष
न्यायालय ने किशोरी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश 26 अप्रैल को दिया था, लेकिन बारासगवर थानाध्यक्ष ने उसे फाइलों में दबाकर रख दिया। रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़िता ने दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।