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Unnao News: ड्रोन से किया खाद व कीटनाशक का छिड़काव
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उन्नाव। ड्रोन दीदी के नाम पहचान बनाने वाली बीघापुर तहसील क्षेत्र के गांव सथनीबालाखेड़ा की रहने वाली ललिता को धान की तीन सौ एकड़ फसल में खाद व कीटनाशक का छिड़काव करने पर उप कृषि निदेशक ने पुरस्कृत किया है।
सथनीबालाखेड़ा निवासी ललिता के पति सोहन एक निजी गैस एजेंसी में काम करते थे। ललिता के पास खेती नहीं थी। ऐसे में घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब थी। ललिता ने गांव के ही इफको सोसाइटी से जुड़ी। इसके बाद प्रयागराज जाकर ड्रोन के जरिये लिक्विड खाद व कीटनाशक का फसलों पर छिड़काव करने का प्रशिक्षण लिया। वहां से लौटीं और काम शुरू किया।
इस खरीफ सीजन में केवल धान की तीन सौ एकड़ फसल में ड्रोन के जरिये छिड़काव किया। पिछले एक साल में ललिता ने बीघापुर से बांगरमऊ तक जाकर एक हजार से अधिक एकड़ में बोई गई आलू, मक्का, केला, धान, गेहूं आदि फसलों में इफको नैनो डीएपी व यूरिया के साथ कीटनाशकों का छिड़काव कर चुकी हैं। इस उपलब्धि पर कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक रवि चंद्र प्रकाश ने मोमेंटो देकर उत्साह बढ़ाया।
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प्रति एकड़ छिड़काव पर मिलते हैं तीन सौ रुपये
ललिता ड्रोन से छिड़काव करके अच्छी कमाई कर रही हैं। बताया कि छिड़काव के एवज में जहां किसानों से तीन सौ रुपये प्रति एकड़ का मेहनताना मिलता है। वहीं इफको सौ रुपये प्रति एकड़ देता है। क्षेत्र में अब उन्हें लोग ड्रोन दीदी के नाम से बुलाते हैं।
लोग मारते थे ताना, कैसे चलाएंगी ड्रोन
ललिता के मुताबिक, ड्रोन संचालन के शुरुआती समय में तो उन्हें काफी परेशानी हुई। लोग ही इसको लेकर ताना मारते थे कि महिला होकर आखिर कैसे यह काम कर पाएंगी पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कार्य में लगी रहीं। इसका सुखद परिणाम सामने आया और धीरे-धीरे किसानों का उन पर विश्वास बढ़ने लगा। शैक्षिक योग्यता मात्र हाईस्कूल होने के बाद भी वह आत्मनिर्भरता की ऊंची उड़ान भर रही हैं।
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सथनीबालाखेड़ा निवासी ललिता के पति सोहन एक निजी गैस एजेंसी में काम करते थे। ललिता के पास खेती नहीं थी। ऐसे में घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब थी। ललिता ने गांव के ही इफको सोसाइटी से जुड़ी। इसके बाद प्रयागराज जाकर ड्रोन के जरिये लिक्विड खाद व कीटनाशक का फसलों पर छिड़काव करने का प्रशिक्षण लिया। वहां से लौटीं और काम शुरू किया।
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इस खरीफ सीजन में केवल धान की तीन सौ एकड़ फसल में ड्रोन के जरिये छिड़काव किया। पिछले एक साल में ललिता ने बीघापुर से बांगरमऊ तक जाकर एक हजार से अधिक एकड़ में बोई गई आलू, मक्का, केला, धान, गेहूं आदि फसलों में इफको नैनो डीएपी व यूरिया के साथ कीटनाशकों का छिड़काव कर चुकी हैं। इस उपलब्धि पर कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक रवि चंद्र प्रकाश ने मोमेंटो देकर उत्साह बढ़ाया।
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प्रति एकड़ छिड़काव पर मिलते हैं तीन सौ रुपये
ललिता ड्रोन से छिड़काव करके अच्छी कमाई कर रही हैं। बताया कि छिड़काव के एवज में जहां किसानों से तीन सौ रुपये प्रति एकड़ का मेहनताना मिलता है। वहीं इफको सौ रुपये प्रति एकड़ देता है। क्षेत्र में अब उन्हें लोग ड्रोन दीदी के नाम से बुलाते हैं।
लोग मारते थे ताना, कैसे चलाएंगी ड्रोन
ललिता के मुताबिक, ड्रोन संचालन के शुरुआती समय में तो उन्हें काफी परेशानी हुई। लोग ही इसको लेकर ताना मारते थे कि महिला होकर आखिर कैसे यह काम कर पाएंगी पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कार्य में लगी रहीं। इसका सुखद परिणाम सामने आया और धीरे-धीरे किसानों का उन पर विश्वास बढ़ने लगा। शैक्षिक योग्यता मात्र हाईस्कूल होने के बाद भी वह आत्मनिर्भरता की ऊंची उड़ान भर रही हैं।