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गंगा एक्सप्रेस वे: यूपीडा के अनुरोध को जिला प्रशासन ने ‘नकारा’

Sun, 12 Jan 2020 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 12:33 AM IST
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उन्नाव। योगी सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे की जद में आने वाली चार तहसीलों के 202 गांवों की भूमि खरीदने, बेचने पर रोक लगाने के यूपीडा के अनुरोध को जिला प्रशासन ने नकार दिया है। प्रशासन ने कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को एक्सप्रेसवे का एलाइमेंट उपलब्ध कराने को कहा है।
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596 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज के बीच बनेगा। एक्सप्रेसवे जनपद के रास्ते होते हुए रायबरेली, प्रतापगढ़ होकर प्रयागराज जाएगा। इसका निर्माण मेरठ से शुरू होगा, जो विभिन्न जिलों से होते हुए हरदोई आएगा। फिर हरदोई से जिले की सफीपुर तहसील के 86 गांव को छुएगा। इसके बाद हसनगंज तहसील के 14 गांव को छूते हुए सदर तहसील पहुंचेगा। सदर के 44 गांवों से होते हुए बीघापुर तहसील क्षेत्र में प्रवेश करेगा। इस तहसील के 58 गांवों को छूते हुए सीधे रायबरेली जनपद को जाएगा। भूमि अध्यापित विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रदेश सरकार ने एक्सप्रेसवे के निर्माण का जिम्मा यूपीडा को दिया है। यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने जिला प्रशासन को पत्र भेज 202 गांवों में भूमि बेचने-खरीदने पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। जवाब में प्रशासन ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर एक्सप्रेसवे के दायरे में आनी वाली भूमि का एलाइमेंट (रेखांकन) कराने कोे कहा है, जिससे उसके आधार पर संबंधित भूमि की खरीद, बिक्री रोकी जा सके।
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जिले में औद्योगिक विकास की बनेगी योजना
गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में जो जिले आ रहे हैं उनमें औद्योगिक विकास पर काम किया जाएगा। एक्सप्रेसवे पर पेट्रोलपंप, दुकानें, होटल, रेस्टारेंट सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। दावा किया जा रहा है कि यह देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा। इसके जरिए लोग मेरठ, दिल्ली और प्रयागराज काफी कम समय में पहुंच सकेंगे।
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इन गांवों से निकलने को प्रस्तावित
तहसील-सफीपुर
फतेहपुर खालसा, रघुरामपुर, फतेहपुर हामजा, गंजमुरादाबाद, बारौकी, कपूरपुर, मुरताजपुर, जालालाब, महामदाबाद, ताहिरपुर, हसनपुर मजरा, मदारपुर, हेबतपुर, कलवारी, अकबरपुर, खामभावली, जहांगीराबाद, कबीरपुर, अमीरपुर गंभीरपुर, गोसाकुतुब, जोगीकोट, इस्माइलपुर आमा पारा, पलिया, गौआरा, गोसा परयागपुर, सायदापुर, चकपीरनगर, भरीहारपुर, रुरीसादिकपुर, गौरियाखुर्द, नवलापुर, गोदारी, मुस्तफाबाद, उतमानपुर, हरियापुर, डाडिया सुनौरा, काठीगारा, सदुल्लापुर, सेंता, काजीपुर बंगर, पट्टी उस्मान, पट्टी हमीद, जुलफकारपुर, अहमदाबाद मठार, ऊगू, मलूफपुर, ऊगू देहात, मतलबपुर, जसरा, साल्हेपुर पुरबा, रज्जाकपुर, कुदीना, दारोली, अजगावन, टिकारा, दयाल गरही, दाकोली, गुरधारी, मुंडा, ओसिया, अटवा मोहाल ओसिया, खिजराबाद, रहीमाबाद, रैयामउ, उदसाह, मवईलाल, बृजपालपुर, भैंसारा, मीरनगर, लक्षिमनगंज, मवईब्राह्मण, सिरसअछेरा, सिरस कनहर, ताजपुर, जहांगीराबाद, लगलयेसरा, खरगौरा, सिरेपुर, लहबरपुर, जगदीशपुर, जुनेदपुर, अमभारा, कुरेमउ, मिर्जापुर कला, रामपुर व सलेमपुर।
तहसील-सदर
कोरारी खुर्द, पुरवा, तेनई, लगलेसरापुर, माखी, जंगल जहानाबाद, बासावन खेरा, सोनेगरही, अलगनगढ़, कसांदा, मुर्तजापुर, सोनिक, बिचपरी, सरई कटयान, सुनेधा, ओरहर, मैता, लालपुर, रायपुर बुजुर्ग, लहिया, तारगांव, बंदौरा, गौरी शंकरपुर ग्रांट, जरगांव, नेवरना, तिवारीखेड़ा, पड़री कला, रायपुर सातन, पड़री खुर्द, शिवपुर, मरोई, सिरपटपुर, भैंसी चतुर, भैंसी कोयलपुर, बारा खेरा, दुबेपुर, लालगंज, ऊंचगांव सानी, पलहारी, गोकुलपुर, कातोन, हरीखेरा, महई व रामपुर।
तहसील-हसनगंज
बिरसिंहपुर, चितौली, पवई, दिलवल, बिरसिंघी मलेथा, मझकोरिया, मुलुक गड़ार, रुपऊ, अथारी, नानाटिकुर, पिपरोसा, सिंधुरिया, शाहपुर व अजैयाखेरा।
तहसील-बीघापुर
अनोन, मेहराबनखेरा, केलोन, राजापुरगरेहवा, सरसोन, बरबत, गदोरवा, गढ़ेवा, टिकारिया, अतवत, मियागंज, जाजनपुर, काठर, मुलाहिमपुर, चमियानी, लच्छीखेरा, गढ़ाकोला, जगतखेरा, सलेथू, अंगनुआखेरा, भाटमउ, सिजनी सोरामऊ, मांझीगवनसेवक, किशनखेरा, तेवरिया, मुरैता, रसूलपुर, ममरेजपुर, धेमनाखेरा, रावतपुर, रघुनाथपुर, पनहन, बेजुआमऊ, रामाखैरा, शंभूखैरा, पुरंडरपुर, परसंडा, महराजपुर, मलौना, दैता, भगवंतपुर, कोटवार, पुरारी, दिवारा, चंदौली, गोनामउ, हिंदनगर, कुंदनपुर, रावतपुर, हिंदूपुर, गौरा, बेहार, सहिला, मवइया, अकमपुर, बजौरा, कुतुबपुर व सिरियापुर।

बोले जिम्मेदार
-यूपीडा ने जिन 202 गांवों में जमीन की खरीद, बिक्री पर रोक लगाने का पत्र भेजा है उनमें एक्सप्रेसवे का एलाइमेंट (रेखांकन) उपलब्ध नहीं कराया है। ऐसे में यदि पूरे गांव की भूमि की खरीद, बिक्री रोक दी जाएगी तो इससे स्टांप ड्यूटी प्रभावित होगी। इसलिए यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर एलाइमेंट की मांग की गई है।
-आत्मस्वरूप श्रीवास्तव, प्रभारी भूमि अध्यापित अधिकारी।
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