{"_id":"58b5c6114f1c1bbe1c8310ae","slug":"every-step-is-flying-apart-rules","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर कदम पर उड़ रही नियमों की धज्जियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर कदम पर उड़ रही नियमों की धज्जियां
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 01 Mar 2017 12:18 AM IST
विज्ञापन
हाईवे पर खड़े व दौड़ते ओवरलोड वाहन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जिले में परिवहन विभाग के मानकों की हर कदम पर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां की सड़कों पर डग्गामार व ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा रूट हो जहां यह डग्गामार व क्षमता से अधिक सामान लदे वाहन फर्राटा भरते नजर न आते हों। यह वाहन शासन को राजस्व का चूना लगा रहे हैं। इसके बाद भी रोडवेज व आरटीओ विभाग के अलावा पुलिस विभाग भी मौन है।
पिछले साल परिवहन मंत्री ने सभी आरटीओ व रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक को आदेश दिया था कि जिलों में डग्गामार व ओवरलोड वाहन बंद होने चाहिए। परिवहन मंत्री ने सख्त लहजे में कहा था कि यदि किसी भी जिले में डग्गामार व क्षमता से अधिक भार लादे वाहन चलते मिले तो संबंधित एआरएम व एआरटीओ पर कार्रवाई होगी। लेकिन जिले में मंत्री का आदेश हवाहवाई है। यहां के हर रूट पर डग्गामार व ओवरलोड वाहनों की भरमार है।
आलम यह है कि डग्गामार वाहन के चालक बेखौफ होकर शहर के बस अड्डे के पास खड़े होकर सवारियां भरते हैं। रोडवेज बस से सफर करने वाले लोगों को भी जबरन अपनी गाड़ियों में बिठा लेते हैं। यही नहीं विभिन्न रूट जैसे बांगरमऊ, हसनगंज, पुरवा, बीघापुर, नवाबगंज आदि सड़क मार्गों पर भी डग्गामार वाहनों के चालक रोडवेज की बसों में सवारियां बैठने नहीं देते हैं। सूत्रों के मुताबिक डग्गामार वाहनों के चक्कर में रोडवेज को हर माह 10-20 लाख रुपये राजस्व की चोट पहुंच रही है। उधर लखनऊ-कानपुर हाईवे के साथ ही उन्नाव-हरदोई मार्ग और अन्य मार्गों में ओवरलोड वाहन फर्राटा भरते रोजाना दिख जाते हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी आंखें बंद किए हैं।
विज्ञापन
डग्गामार वाहन संचालकों पर खाकी मेहरबान
डग्गामार वाहन संचालकों पर खाकी मेहरबान है। इसी कारण शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है। सूत्रों की मानें तो कुछ पुलिस वालों का डग्गामार वाहन संचालकों से महीना बंधा हैं। हर माह एक तय रकम पुलिस वालों को दी जाती है। इसलिए शिकायत तो होती है, लेकिन वह कूड़े के डिब्बे में चली जाती है। न ही पुलिस कोई कार्रवाई करती है और न ही एआरटीओ।
चलाया जाता है चेकिंग अभियान
डग्गामार व ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अक्सर अभियान चलाया जाता है। जो पकड़े जाते हैं उन पर कार्रवाई भी की जाती है। वैसे इन वाहनों पर अंकुश लगाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। -गौरव वर्मा, एआरएम रोडवेज व सियाराम वर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन।
पिछले साल परिवहन मंत्री ने सभी आरटीओ व रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक को आदेश दिया था कि जिलों में डग्गामार व ओवरलोड वाहन बंद होने चाहिए। परिवहन मंत्री ने सख्त लहजे में कहा था कि यदि किसी भी जिले में डग्गामार व क्षमता से अधिक भार लादे वाहन चलते मिले तो संबंधित एआरएम व एआरटीओ पर कार्रवाई होगी। लेकिन जिले में मंत्री का आदेश हवाहवाई है। यहां के हर रूट पर डग्गामार व ओवरलोड वाहनों की भरमार है।
विज्ञापन
आलम यह है कि डग्गामार वाहन के चालक बेखौफ होकर शहर के बस अड्डे के पास खड़े होकर सवारियां भरते हैं। रोडवेज बस से सफर करने वाले लोगों को भी जबरन अपनी गाड़ियों में बिठा लेते हैं। यही नहीं विभिन्न रूट जैसे बांगरमऊ, हसनगंज, पुरवा, बीघापुर, नवाबगंज आदि सड़क मार्गों पर भी डग्गामार वाहनों के चालक रोडवेज की बसों में सवारियां बैठने नहीं देते हैं। सूत्रों के मुताबिक डग्गामार वाहनों के चक्कर में रोडवेज को हर माह 10-20 लाख रुपये राजस्व की चोट पहुंच रही है। उधर लखनऊ-कानपुर हाईवे के साथ ही उन्नाव-हरदोई मार्ग और अन्य मार्गों में ओवरलोड वाहन फर्राटा भरते रोजाना दिख जाते हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी आंखें बंद किए हैं।
विज्ञापन
डग्गामार वाहन संचालकों पर खाकी मेहरबान
डग्गामार वाहन संचालकों पर खाकी मेहरबान है। इसी कारण शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है। सूत्रों की मानें तो कुछ पुलिस वालों का डग्गामार वाहन संचालकों से महीना बंधा हैं। हर माह एक तय रकम पुलिस वालों को दी जाती है। इसलिए शिकायत तो होती है, लेकिन वह कूड़े के डिब्बे में चली जाती है। न ही पुलिस कोई कार्रवाई करती है और न ही एआरटीओ।
चलाया जाता है चेकिंग अभियान
डग्गामार व ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अक्सर अभियान चलाया जाता है। जो पकड़े जाते हैं उन पर कार्रवाई भी की जाती है। वैसे इन वाहनों पर अंकुश लगाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। -गौरव वर्मा, एआरएम रोडवेज व सियाराम वर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन।