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चप्पल तो घिस गई फिर भी नहीं मिली बिजली
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sat, 20 Dec 2014 12:26 AM IST
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बीघापुर। बीघापुर की अमरपुर आंव ग्राम पंचायत में बिजली के लिए लोगों ने सीधा लखनऊ का रुख किया। बिजली विभाग के मुख्य अभियंता के सामने न सिर्फ अधिकारियों की पोल खोली बल्कि गांव में विद्युतीकरण की हकीकत में बयां कर दी।
उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते चप्पल भी घिस गई, लेकिन विद्युतीकरण नहीं हुआ है। मुख्य अभियंता ने सर्वे कराकर बिजली संकट दूर करने का आश्वासन दिया है।
ग्राम पंचायत के अंतगर्त अमरपुरा आंव, बिहारीखेड़ा व मेहरबानखेड़ा आते हैं। इन तीनों गांवों में से केवल अमरपुरा गांव में ही 80 फीसदी तक विद्युतीकरण है, जबकि शेष दोनों गांव आज भी बिजली के इंतजार में हैं। अमरपुरा आंव में भी बिजली व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है।
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करीब 25 साल पहले यहां विद्युतीकरण कराया गया था। तब से उसी व्यवस्था के सहारे यहां बिजली आपूर्ति की जा रही है। यानि न तो आज तक जर्जर हो चुके तारों को बदला गया और न ही ट्रांसफार्मर की ही क्षमता बढ़ाई गई। आज भी 63 केवीए के ही ट्रांसफार्मर से लोगों को बिजली दी जा रही है।
जो लोड बढ़ते ही धड़ाम हो जाता है और ठीक होने में कई बार हफ्तों लग जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार विद्युतीकरण व जर्जर बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग जिला प्रशासन व बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने उठाई। लिखित शिकायत के बाद भी स्थिति आज तक नहीं सुधरी।
जिसके चलते ग्राम पंचायत के लोगों ने समस्या को मुख्य अभियंता के सामने उठाने की ठानी और लखनऊ पहुंच गए।
मुख्य अभियंता वीपी वर्मा के सामने अमरपुर आंव के पूर्व प्रधान जमुना प्रसाद त्रिवेदी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह, ग्राम प्रधान पति सुरेश बाबू, बीडीसी अनीता अवस्थी, लाला दीक्षित, सीताराम पांडेय, दिलीप पटेल, सतीश वर्मा, बेचेलाल रावत, दीपक दुबे, राजन बाजपेयी, संजय वर्मा, शांति गौतम, डॉ. विनय पटेल आदि ग्रामवासियों ने बताया कि ग्राम पंचायत की बड़ी आबादी आज भी बिना बिजली के ही जीवन यापन कर रही है।
अधिकारियों को समस्या बताते-बताते चप्पल तक घिस गई हैं लेकिन अधिकारी आज तक टाल मटोल वाला रवैय्या अख्तियार किए हैं।
ग्रामीणों ने मुख्य अभियंता विद्युत को ज्ञापन देकर मांग की है कि ग्राम पंचायत में 25 साल पुराने हो चुके जर्जर तारों को बदलवाया जाए व ट्रांसफार्मर की क्षमता भी बढ़ाई जाए।
ग्रामीणों की माने तो मुख्य अभियंता वीपी वर्मा ने जल्द सर्वेक्षण का काम शुरू कराकर गांव की बिजली समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया है।
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उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते चप्पल भी घिस गई, लेकिन विद्युतीकरण नहीं हुआ है। मुख्य अभियंता ने सर्वे कराकर बिजली संकट दूर करने का आश्वासन दिया है।
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ग्राम पंचायत के अंतगर्त अमरपुरा आंव, बिहारीखेड़ा व मेहरबानखेड़ा आते हैं। इन तीनों गांवों में से केवल अमरपुरा गांव में ही 80 फीसदी तक विद्युतीकरण है, जबकि शेष दोनों गांव आज भी बिजली के इंतजार में हैं। अमरपुरा आंव में भी बिजली व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है।
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करीब 25 साल पहले यहां विद्युतीकरण कराया गया था। तब से उसी व्यवस्था के सहारे यहां बिजली आपूर्ति की जा रही है। यानि न तो आज तक जर्जर हो चुके तारों को बदला गया और न ही ट्रांसफार्मर की ही क्षमता बढ़ाई गई। आज भी 63 केवीए के ही ट्रांसफार्मर से लोगों को बिजली दी जा रही है।
जो लोड बढ़ते ही धड़ाम हो जाता है और ठीक होने में कई बार हफ्तों लग जाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार विद्युतीकरण व जर्जर बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग जिला प्रशासन व बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने उठाई। लिखित शिकायत के बाद भी स्थिति आज तक नहीं सुधरी।
जिसके चलते ग्राम पंचायत के लोगों ने समस्या को मुख्य अभियंता के सामने उठाने की ठानी और लखनऊ पहुंच गए।
मुख्य अभियंता वीपी वर्मा के सामने अमरपुर आंव के पूर्व प्रधान जमुना प्रसाद त्रिवेदी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह, ग्राम प्रधान पति सुरेश बाबू, बीडीसी अनीता अवस्थी, लाला दीक्षित, सीताराम पांडेय, दिलीप पटेल, सतीश वर्मा, बेचेलाल रावत, दीपक दुबे, राजन बाजपेयी, संजय वर्मा, शांति गौतम, डॉ. विनय पटेल आदि ग्रामवासियों ने बताया कि ग्राम पंचायत की बड़ी आबादी आज भी बिना बिजली के ही जीवन यापन कर रही है।
अधिकारियों को समस्या बताते-बताते चप्पल तक घिस गई हैं लेकिन अधिकारी आज तक टाल मटोल वाला रवैय्या अख्तियार किए हैं।
ग्रामीणों ने मुख्य अभियंता विद्युत को ज्ञापन देकर मांग की है कि ग्राम पंचायत में 25 साल पुराने हो चुके जर्जर तारों को बदलवाया जाए व ट्रांसफार्मर की क्षमता भी बढ़ाई जाए।
ग्रामीणों की माने तो मुख्य अभियंता वीपी वर्मा ने जल्द सर्वेक्षण का काम शुरू कराकर गांव की बिजली समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया है।