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ईश्वर की सच्ची भक्ति से पूरी होती है मनोकामना: कथावाचक
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंजमुरादाबाद। क्षेत्र के हैबतपुर स्थित जंगलेश्वर मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। कथावाचक ने बताया कि जो भी भक्त भगवान की भक्ति सच्चे मन से करता है उसकी मनोकामना पूरी होती है और वह उन्नति करता है।
श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को कथावाचक राहुल द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। बताया कि उतनवाड़ नामक राजधानी के राजा उत्तानपाद थे। उत्तानपाद ने दो विवाह किए थे। पहली पत्नी सुनीति से ध्रुव और दूसरी पत्नी सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र हुए। दूसरी पत्नी सुरुचि को राजा अधिक प्रेम करते थे। बड़ा पुत्र होने के कारण ध्रुव राजा का उत्तराधिकारी था। लेकिन सुरुचि अपने पुत्र उत्तम को ही उत्तराधिकारी बनाना चाहती थीं।
मां सुनीति अपने पुत्र ध्रुव को नारायण की शरण में जाने के लिए प्रेरित किया। इससे बचपन में ही ध्रुव पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की तपस्या करने लगे। तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान प्रकट हो गए और ध्रुव को वरदान दिया कि अंतरिक्ष में उत्तर दिशा में ध्रुव नामक एक तारा होगा। यह हमेशा चमकता रहेगा और युगों-युगों तक अस्तित्व में रहेगा।
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गंजमुरादाबाद। क्षेत्र के हैबतपुर स्थित जंगलेश्वर मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। कथावाचक ने बताया कि जो भी भक्त भगवान की भक्ति सच्चे मन से करता है उसकी मनोकामना पूरी होती है और वह उन्नति करता है।
श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को कथावाचक राहुल द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। बताया कि उतनवाड़ नामक राजधानी के राजा उत्तानपाद थे। उत्तानपाद ने दो विवाह किए थे। पहली पत्नी सुनीति से ध्रुव और दूसरी पत्नी सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र हुए। दूसरी पत्नी सुरुचि को राजा अधिक प्रेम करते थे। बड़ा पुत्र होने के कारण ध्रुव राजा का उत्तराधिकारी था। लेकिन सुरुचि अपने पुत्र उत्तम को ही उत्तराधिकारी बनाना चाहती थीं।
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मां सुनीति अपने पुत्र ध्रुव को नारायण की शरण में जाने के लिए प्रेरित किया। इससे बचपन में ही ध्रुव पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की तपस्या करने लगे। तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु भगवान प्रकट हो गए और ध्रुव को वरदान दिया कि अंतरिक्ष में उत्तर दिशा में ध्रुव नामक एक तारा होगा। यह हमेशा चमकता रहेगा और युगों-युगों तक अस्तित्व में रहेगा।
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