{"_id":"6165cb138ebc3e4267715a53","slug":"cultural-unnao-news-knp6579292195","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां कालरात्रि की पूजा, लगे जयकारे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां कालरात्रि की पूजा, लगे जयकारे
विज्ञापन
नवाबगंज दुर्गा मंदिर में दर्शन के लिए लाइन में खड़े भक्त। संवाद
- फोटो : UNNAO
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। शारदीय नवरात्र पर भक्तों ने मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की। भोर पहर से मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़ शाम तक बनी रही। चारों और घंटा घड़ियालों, आरती व मंत्रोच्चार की गूंज रही।
भक्तों ने मां के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विधि विधान से पूजा की। शहर के कल्याणी देवी मंदिर, बड़े दुर्गा मंदिर, पूर्णादेवी धाम, नवाबगंज कुसुंभी स्थित कुशहरी देवी मंदिर, दुर्गा मंदिर के कपाट मां का भव्य श्रृंगार कर कपाट भोर पहर खोल दिए गए। इस दौरान भक्तों ने मेवा मिष्ठान, फल, चुनरिया का सामान मां के चरणों में भेंट कर सुख समृद्धि की कामना की। देवी का यह स्वरूप अनंत और व्यापक है।
कालरात्रि अर्थात काल को जीतने वाली। जन्म, पालन और काल। सृष्टि संयोजन और संचालन इन्हीं कालीजी की कृपा का फल है। एक बार शिवजी ने देवी को काली कह दिया। इस कारण उनका नाम काली पड़ गया। माता काली की पूजा से सब कुछ सिद्ध होता है। इस रात्रि अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजन करने एवं जप तप करने से ही मां काली प्रसन्न होती है। रात्रि में यज्ञ करने से साधक के मनोरथ पूर्ण करते हैं। देर शाम देवी मंदिरों में महिलाओं ने भजन कीर्तन किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
भक्तों ने मां के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विधि विधान से पूजा की। शहर के कल्याणी देवी मंदिर, बड़े दुर्गा मंदिर, पूर्णादेवी धाम, नवाबगंज कुसुंभी स्थित कुशहरी देवी मंदिर, दुर्गा मंदिर के कपाट मां का भव्य श्रृंगार कर कपाट भोर पहर खोल दिए गए। इस दौरान भक्तों ने मेवा मिष्ठान, फल, चुनरिया का सामान मां के चरणों में भेंट कर सुख समृद्धि की कामना की। देवी का यह स्वरूप अनंत और व्यापक है।
विज्ञापन
कालरात्रि अर्थात काल को जीतने वाली। जन्म, पालन और काल। सृष्टि संयोजन और संचालन इन्हीं कालीजी की कृपा का फल है। एक बार शिवजी ने देवी को काली कह दिया। इस कारण उनका नाम काली पड़ गया। माता काली की पूजा से सब कुछ सिद्ध होता है। इस रात्रि अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजन करने एवं जप तप करने से ही मां काली प्रसन्न होती है। रात्रि में यज्ञ करने से साधक के मनोरथ पूर्ण करते हैं। देर शाम देवी मंदिरों में महिलाओं ने भजन कीर्तन किए।
विज्ञापन