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फौजी का शव गांव पहुंचते ही मचा कोहराम
unnao
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:55 PM IST
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रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : amarujala
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मौरावां/उन्नाव। कर्नाटक के बंगलुरू में तैनात मौरावां थाना के रजवाड़ा गांव निवासी फौजी का ताबूत में बंद शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। अंतिम दर्शन के लिए दो दिन से प्रतीक्षा कर रहे लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। अधजला शव देखकर परिजन बदहवास हो गए। शाम लगभग छह बजे सैनिक सम्मान के साथ खेत में शव को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी गई।
मौरावां थानाक्षेत्र के गांव रजवाड़ा के मजरा चंदीखेड़ा निवासी पंकज यादव(25) पुत्र राजबहादुर यादव थल सेना में जवान था। मौजूदा समय में वह कर्नाटक के बंगलुरू में तैनात था। वह शुक्रवार शाम को संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। शनिवार सुबह शव ट्रेनिंग कैंप के पास कूड़े के ढेर में मिला था। इसके बाद सैन्य अधिकारियों ने पंकज की पत्नी रेनू को फोन कर घटना की सूचना दी थी। भाई अजीत यादव बंगलुरू पहुंचे थे। मंगलवार को शव दोपहर लगभग ढाई बजे हवाई जहाज से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा। साथ रहे जवान एंबुलेंस से शव गांव लाए। शाम लगभग चार बजे शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया।
इनसेट
भारत माता के लगे जयकारे
उन्नाव। फौजी पंकज का शव आने का इंतजार कर रहे लोगों को पता चला कि शाम तक शव गांव आ जाएगा। इस पर परिवार, रिश्तेदार और आसपास कई गांव के लोगों की भीड़ लग गई। हजारों की भीड़ के बीच जैसे ही वाहन से शव को उतारा गया। सभी की आंखें नम हो गईं। सेना की टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी। इस पर भारत माता के जयकारे गूंजने लगे। इस पर पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया।
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पैर और हाथ से की शव की पहचान
बंगलुरू में पंकज की हत्या करने के बाद चेहरे को केमिकल से जलाने के बाद कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था। सैन्य अधिकारियों ने शव की पहचान के लिए घर वालों को बंगलुरू बुलाया था। भाई नीरज साला व कुछ अन्य लोगों के साथ बंगलुरू गया था। हाथ-पैर व शरीर के गैर जले अंगों से पहचान की गई।
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लोगों में रहा आक्र ोश
फौैजी के परिवार से मिलने किसी जनप्रतिनिधि या उच्चाधिकारी के न पहुंचने से लोगों में आक्रोश रहा। परिवार के लोगों ने किसी के न आने तक शव का अंतिम संस्कार न करने का फैसला ले लिया। बाद शव आने के बाद तहसीलदार लालधर यादव, सीओ उमेश चंद्र त्यागी और इंस्पेक्टर अमित तोमर ने परिजनों से बात की। तहसीलदार ने बुधवार को पूरे परिवार को डीएम से मिलने के लिए कहा। रिश्तेदारों के समझाने के बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए।
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विधानसभा अध्यक्ष के बेटे को दिया मांगपत्र
फौजी पंकज यादव का शव गांव पहुंचने की सूचना पर विधान सभा अध्यक्ष ह्रदयनारायण दीक्षित के बेटे सुशील दीक्षित गांव पहुंचे। परिजनों ने उन्हें मांगपत्र दिया। इसमें पंकज यादव के नाम से स्मारक स्थल बनवाने, मृतक की पत्नी रेनू यादव को नौकरी, बूढ़े माता-पिता को शासकीय सहायता, डेढ़ साल की बेटी प्रियांशी और डेढ़ माह के बेटे की पढ़ाई व पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेने की सरकार से मांग की गई। परिवार के पास केवल दो बीघा खेत हैं। इससे अधिक से अधिक से सहायता दिलाने के लिए कहा गया। परिवार का खर्च पंकज की नौकरी से ही चलता था। पेट्रोल पंप दिलाने की भी मांग की गई। सुशील ने मांगपत्र विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का भरोसा दिया।
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मौरावां थानाक्षेत्र के गांव रजवाड़ा के मजरा चंदीखेड़ा निवासी पंकज यादव(25) पुत्र राजबहादुर यादव थल सेना में जवान था। मौजूदा समय में वह कर्नाटक के बंगलुरू में तैनात था। वह शुक्रवार शाम को संदिग्ध हालात में लापता हो गया था। शनिवार सुबह शव ट्रेनिंग कैंप के पास कूड़े के ढेर में मिला था। इसके बाद सैन्य अधिकारियों ने पंकज की पत्नी रेनू को फोन कर घटना की सूचना दी थी। भाई अजीत यादव बंगलुरू पहुंचे थे। मंगलवार को शव दोपहर लगभग ढाई बजे हवाई जहाज से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचा। साथ रहे जवान एंबुलेंस से शव गांव लाए। शाम लगभग चार बजे शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया।
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भारत माता के लगे जयकारे
उन्नाव। फौजी पंकज का शव आने का इंतजार कर रहे लोगों को पता चला कि शाम तक शव गांव आ जाएगा। इस पर परिवार, रिश्तेदार और आसपास कई गांव के लोगों की भीड़ लग गई। हजारों की भीड़ के बीच जैसे ही वाहन से शव को उतारा गया। सभी की आंखें नम हो गईं। सेना की टुकड़ी ने अंतिम सलामी दी। इस पर भारत माता के जयकारे गूंजने लगे। इस पर पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया।
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पैर और हाथ से की शव की पहचान
बंगलुरू में पंकज की हत्या करने के बाद चेहरे को केमिकल से जलाने के बाद कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था। सैन्य अधिकारियों ने शव की पहचान के लिए घर वालों को बंगलुरू बुलाया था। भाई नीरज साला व कुछ अन्य लोगों के साथ बंगलुरू गया था। हाथ-पैर व शरीर के गैर जले अंगों से पहचान की गई।
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लोगों में रहा आक्र ोश
फौैजी के परिवार से मिलने किसी जनप्रतिनिधि या उच्चाधिकारी के न पहुंचने से लोगों में आक्रोश रहा। परिवार के लोगों ने किसी के न आने तक शव का अंतिम संस्कार न करने का फैसला ले लिया। बाद शव आने के बाद तहसीलदार लालधर यादव, सीओ उमेश चंद्र त्यागी और इंस्पेक्टर अमित तोमर ने परिजनों से बात की। तहसीलदार ने बुधवार को पूरे परिवार को डीएम से मिलने के लिए कहा। रिश्तेदारों के समझाने के बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए।
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विधानसभा अध्यक्ष के बेटे को दिया मांगपत्र
फौजी पंकज यादव का शव गांव पहुंचने की सूचना पर विधान सभा अध्यक्ष ह्रदयनारायण दीक्षित के बेटे सुशील दीक्षित गांव पहुंचे। परिजनों ने उन्हें मांगपत्र दिया। इसमें पंकज यादव के नाम से स्मारक स्थल बनवाने, मृतक की पत्नी रेनू यादव को नौकरी, बूढ़े माता-पिता को शासकीय सहायता, डेढ़ साल की बेटी प्रियांशी और डेढ़ माह के बेटे की पढ़ाई व पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेने की सरकार से मांग की गई। परिवार के पास केवल दो बीघा खेत हैं। इससे अधिक से अधिक से सहायता दिलाने के लिए कहा गया। परिवार का खर्च पंकज की नौकरी से ही चलता था। पेट्रोल पंप दिलाने की भी मांग की गई। सुशील ने मांगपत्र विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का भरोसा दिया।
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